मुंशी प्रेमचंद। फाइल
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गोरखपुर बनी मुंशी प्रेमचंद की कर्मभूमि
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद ने जन्म भले ही लमही में लिया, लेकिन उनकी कर्मस्थली गोरखपुर ही बनी। इस शहर में मुंशी जी ने पढ़ाई की, फिर पढ़ाया भी। दो बैलों की जोड़ी, ईदगाह, रामलीला, बूढ़ी काकी, कफन, पंच परमेश्वर, गोदान, गबन जैसी उनकी कालजयी कृतियों की पृष्ठभूमि गोरखपुर में ही तैयार हुई थी। इसी शहर में उन्होंने महात्मा गांधी के आह्वान पर 1921 में अपनी नौकरी से त्यागपत्र दिया था और स्वाधीनता सेनानी बने। नार्मल स्कूल के जिस आवास में रहकर प्रेमचंद ने गोरखपुर में शिक्षा विभाग की नौकरी की, उसी में आज प्रेमचंद साहित्य संस्थान की लाइब्रेरी है।