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इस प्रोफेसर के घर के कोने-कोने में है हरियाली का राज, तस्वीरों में देखें इनकी बगिया में भी खिलती है जिंदगी

Mon, 31 Aug 2020 04:21 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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प्रो. सुधा यादव , पुष्पदंत जैन, वंदना गुप्ता और नुसरत अतीक की बगिया में भी खिलखिलाती है जिंदगी। - फोटो : अमर उजाला।
हरियाली से लगाव का नतीजा है कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. सुधा यादव ने अपने आवास में 120 स्क्वायर फीट का लॉन तैयार किया है। यही नहीं हुमायुंपुर उत्तरी स्थित अशोक नगर कॉलोनी के आवास के टैरेस, बालकनी और कोटयार्ड में भी बागवानी कर डाली है।
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के रसायन शास्त्र विभाग की विभागाध्यक्ष ने टैरेस पर भी की है बागवानी। - फोटो : अमर उजाला।
प्रो. सुधा यादव ने बताया कि बागवानी का शौक पिता सेवानिवृत प्रो. राजाराम यादव से मिला। हीरापुरी कॉलोनी में इस शौक को पूरा करने के लिए काफी जगह भी थी। अभी अशोक नगर स्थित आवास में शमी, गुलचांदनी, पारिजात, मधुमालती, कोचियाग्रास, लक्ष्मणबूटी, गुलमेंहदी, गुलचांदनी, डहेलिया, गुलदाउदी, साइनेरिया, सरकुलेंट्स और लिली लॉन की शोभा बढ़ा रहे हैं। घर में पीछे खाली जगह में किचन गार्डन है। यहां अमरुद, आम, मेंहदी, मीठी नीम भी हैं। 
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बागवानी का शौक पूरा करने के लिए समय निकाल लेते हैं पुष्पदंत जैन। - फोटो : अमर उजाला।
70 साल पुरानी नीम करती है घर के वातावरण को शुद्ध
सामाजिक कार्यों और व्यापार में व्यस्तता के बावजूद उत्तर प्रदेश व्यापार कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष पुष्पदंत जैन बागवानी का शौक पूरा करने के लिए समय निकाल लेते हैं। बागवानी का शौक उन्हें पिता दिवंगत मुन्नीलाल जैन से मिला। करीब छह दशक से वह रोजाना एक घंटे समय पेड़-पौधों को जरूर देते हैं। उनकी गार्डेन में लगा नीम का वृक्ष लगभग 70 साल पुराना है। यह वातावरण को तो शुद्ध रखता ही है दातुन व निमोरी के प्रयोग से शरीर स्वस्थ रहता है। गार्डन में आंवला, बेल, आम, नींबू, हरसिंगार, मीठी नीम, तुलसी, मोरपंखी, अशोक आदि के पौधे भी हैं।

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गमलों में लहलहाती हैं मौसमी सब्जियां - फोटो : अमर उजाला।
पूर्वोत्तर रेलवे से ऑफिस सुपरिटेंडेंट पद से सेवानिवृत्त वंदना गुप्ता नौकरी के दौरान रेलवे क्वार्टर में बागवानी का शौक पूरा करती थीं। पादरी बाजार स्थित आसरा अपार्टमेंट के फ्लैट में आईं तो पौधों का आशियाना करीब 200 गमले बन गए। वंदना इनमें इनडोर और आउटडोर सजावटी पौधों के साथ मौसमी सब्जियां भी उगाती हैं।
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30 साल से बगिया में प्राण फूंक रहीं कवियत्री नुसरत। - फोटो : अमर उजाला।
ऑल इंडिया रेडियो में अपनी कविताओं से श्रोताओं को मुग्ध करने वाली नुसरत अतीक वर्ष 1990 से ही बागवानी के प्रति समर्पित हैं। बताया कि शादी के बाद पति अरशद ने शौक को बढ़ावा दिया। तुर्कमानपुर में नुसरत के घर की गार्डेन में फूलों और औषधीय पौधों के अतिरिक्त धनिया, हरी मिर्च, हरा लहसुन, नींबू आदि भी उपलब्ध रहते हैं।
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