गोरखपुर के बुजुर्ग मां का अंतिम संस्कार न करने का बेटों को पछतावा है। मां की मौत के बाद बेटों ने पिता को अपना लिया है। अब बेटे पिता को घर में साथ रखने की पहल की।
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गोरखपुर से शर्मसार करने वाली खबर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर के कैंपियरगंज क्षेत्र के भरोहियां गांव में बुजुर्ग दंपती भुआल मद्धेशिया और शोभा देवी की उपेक्षा, वृद्धाश्रम में गुजरे दिन और मां के निधन के बाद बेटों के किनारा कर लेने की चर्चाएं गांव-कस्बे से लेकर सोशल मीडिया तक छाई रहीं। इसके बेटों को भी पछतावा हुआ और पिता को घर में साथ रखने की पहल की। भुआल ने भी पत्नी के जाने के बाद अकेले जीना मुश्किल हो गया है।
भुआल मद्धेशिया 17 माह से पत्नी शोभा (65) के साथ जौनपुर में एक वृद्धाश्रम में रह रहे थे। बीते 19 नवंबर को शोभा का निधन हो गया। इसके बाद वृद्धाश्रम संचालक रवि कुमार चौबे ने भुआल के छोट बेटे अज्जू को फोन पर सूचना दी। अज्जू ने रवि को बताया कि बड़े भाई संजय के बेटे की शादी है इसलिए उन्होंने इस समय दाह संस्कार करने से मना कर दिया था और कहा था कि शव फ्रीजर में लाश रखवा दें।
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शोभा देवी
- फोटो : अमर उजाला
शादी के बाद दाह संस्कार कराया जाएगा। हालांकि, भुआल पत्नी का शव लेकर गांव पहुंचे लेकिन घर तक नहीं ले जा सके। बेटे की शादी के कारण दाह संस्कार को लेकर संजय के विरोध पर भुआल को करमैनी घाट पर पत्नी का शव दफनाना पड़ा।
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बेटा और मृतक मां शोभा देवी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संजय ने मंगलवार को कहा कि, उसकी मां शोभा का निधन उस समय हुआ जब घर में विवाह समारोह चल रहा था। शव घर लाने और दाह संस्कार करने पर वैवाहिक कार्यक्रम बाधित होते इसलिए दाह संस्कार बाद में करने का निर्णय लिया था।
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शोभा देवी
- फोटो : अमर उजाला
मामला चर्चा में आने के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया। संजय ने बताया कि पुरोहित की बताई विधि के अनुसार आटे का पुतला बनाकर छह दिसंबर को अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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शोभा देवी
- फोटो : अमर उजाला
उधारी और विवादों के चलते घर छोड़ गए थे भुआल
संजय ने बताया कि उसके पिता भुआल मद्धेशिया उधारी के बोझ और मानसिक तनाव के चलते घर से अलग हो गए थे। किसी ने उन्हें घर से नहीं निकाला था। उन्होंने कहा कि गांव के कुछ लोगों ने गलत आरोप लगाए जिससे हालात और बिगड़ गए। वहीं, मंगलवार को भुआल ने कहा कि परिवार की काफी बदनामी हुई है, इसके लिए उन्होंने परिवार से क्षमा मांगी और कहा कि, अब अपने परिवार के साथ रहना चाहता हूं।
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भुआल गुप्ता और शोभा देवी
- फोटो : अमर उजाला
पंचायत में बंटी थीं जिम्मेदारियां
मूलरूप से महराजगंज के पनियरा थाना क्षेत्र के नरकटहां गांव निवासी भुआल मद्धेशिया लगभग दो दशक पहले पत्नी शोभा के साथ भरोहियां स्थित ससुराल में रहने लगे थे। शोभा के पिता सीताराम ने अपनी संपत्ति तीनों नातियों संजय, अजय और संदीप के नाम कर दी थी।
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मृतक आशा देवी की फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
भुआल पर उधारी बढ़ने पर परिवार में विवाद के बाद गांव में पंचायत हुई थी। पंचायत में मां-बाप की जिम्मेदारियां बेटों में बांट दी गई थीं इसके बाद फिर विवाद बढ़ने पर आहत होकर भुआल पत्नी शोभा को लेकर घर छोड़ गए थे।
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मृतक आशा देवी के पति
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
यह था मामला
यूपी के गोरखपुर स्थित कैंपियरगंज थानाक्षेत्र के भरोहियां ग्राम पंचायत में एक ऐसी घटना सामने आई जिसने गांव में ही नहीं, सोशल मीडिया पर भी भारी आक्रोश पैदा कर दिया। जौनपुर वृद्धाश्रम में रह रही शोभा देवी (65) की तबीयत बिगड़ने पर मौत हो गई। लेकिन जब सुचना उनके बड़े बेटे को दी गई तो उसने मां का शव घर लाने से मना कर दिया। कारण बताया, घर में बेटे की शादी है, लाश आई तो अपशकुन हो जाएगा। उसने यहां तक कह दिया कि शव को चार दिन फ्रीजर में रख दिया जाए, शादी के बाद आकर दाह संस्कार कर देगा।
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बेटों ने पिता को स्वीकार कर घर में रखा
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
घाट किनारे मिट्टी में दफना दी शोभा देवी की लाश
यह सुनकर मृतका के पति भुआल गुप्ता का दिल टूट गया। वह अपनी पत्नी की अंतिम इच्छा पूरी कराने के लिए जौनपुर से गोरखपुर तक शव लेकर पहुंचे, लेकिन यहां भी बड़े बेटे ने दरवाजा नहीं खोला। इसके बाद गांव के लोगों और रिश्तेदारों ने समझाया और दिखावा भर की सहमति से शोभा देवी को घाट किनारे मिट्टी में दफना दिया गया।
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शोभा देवी के पति भुआल
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
'मिट्टी में उसकी लाश को कीड़े खा जाएंगे'
यहीं से बुजुर्ग पिता की पीड़ा फूट पड़ी। रोते हुए वह बार-बार कहते रहे, 'मेरी पत्नी हिंदू रीति रिवाज से विदा होने की हकदार थी। उसे जला भी नहीं पाए। उसे मिट्टी में दफना दिया गया, वहां कीड़े खा जाएंगे…।' उन्हें संभालना लोगों के लिए मुश्किल हो गया।
पति-पत्नी सिर्फ छोटे बेटे से करते थे बात
भुआल गुप्ता और उनकी पत्नी पिछले कई महीनों से जौनपुर के वृद्धाश्रम में रह रहे थे। बड़े बेटे ने घर से निकाल दिया था। संस्था के लोगों ने इलाज, रहने और खाने की व्यवस्था की थी। पति-पत्नी कभी-कभी छोटे बेटे से फोन पर बात भी कर लेते थे। लेकिन मौत के बाद भी हालात नहीं बदले। गांव में लोग इस घटना पर गुस्से में हैं। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी।