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lockdown 3.0: गोरखपुर पहुंचते ही हजारों लोगों ने सुनाई ये दर्द भरी दास्तां, कहा- घर आने की छोड़ दी थी उम्मीद

Tue, 12 May 2020 01:19 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
लॉकडाउन में फंसे यात्रियों को लेकर छह श्रमिक स्पेशल ट्रेनें गोरखपुर पहुंचीं। अहमदाबाद, सूरत, साबरमती, लुधियाना और भावनगर से इन ट्रेनों में 7966 श्रमिक एवं उनके परिवारवाले आए। रेलवे स्टेशन आते ही सभी के चेहरे खिल गए। यात्रियों ने कहा कि अब घर पहुंच गए तो समझ लीजिए कि सारा कष्ट दूर हो जाएगा। इन यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग कराई गई और पहले से खड़ी बसों में बैठाकर घर भेज दिया गया।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
घर आने की छोड़ दी थी उम्मीद
प्लेटफॉर्म एक पर सोमवार सुबह 10:10 बजे अहमदाबाद से पहली ट्रेन आई। इससे यहां 1268 यात्री उतरे। इन यात्रियों ने कहा कि हमने तो उम्मीद ही छोड़ दी थी कि अपने घर जा पाएंगे। पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रयासों से अब हम घर पहुंच गए हैं।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर के दीनदयाल मौर्या ने कहा कि थोड़ी दिक्कत तो हुई पर खुश हूं कि घर आ गया। अभी भी अगर नहीं आ पाते तो अहमदाबाद में हम लोग भूखों मर जाते। ना खाने के लिए एक दाना था और ना रहने के लिए जगह। घर पर रहेंगे तो यह दिक्कत नहीं आएगी।

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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
महराजगंज के धीरज ने कहा कि फैक्ट्री बंद हो गई तो सोचा कि कुछ दिन बाद हालात सुधर जाएंगे। लेकिन जब लॉकडाउन बढ़ता गया तो मुश्किलें बढ़ गईं। अब तो बचे रुपये भी खत्म हो गए थे। मकान मालिक ने किराया न देने की वजह से कमरे से निकाल दिया था। दर- दर की ठोकरे खा रहा था। किसी तरह भूख मिटा रहे थे। बहुत बुरा हाल था। कुछ दिन और न आ पाते तो जान निकल जाती।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
दूसरी ट्रेन अहमदाबाद से ही दोपहर दो बजे आई। इस ट्रेन में 1565 यात्री सवार थे। इसके बाद तीन बजे सूरत से 1245, लुधियाना से शाम पांच बजे 1278, सवा छह बजे सूरत से 1302 तथा अंतिम ट्रेन भावनगर से रात 10 बजे 1308 लोगों को लेकर गोरखपुर पहुंची। यहां पहुंचते ही सभी यात्रियों ने राहत की सांस ली। खुशी के कारण लोगों के चेहरे खिल गए। 
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सभी यात्रियों की टीटीई, जीआरपी और आरपीएफ ने सर्किल में खड़ाकर थर्मल स्कैनिंग कराई और स्टेशन पर ही जीआरपी की ओर से मक्के के भूजे का पैकेट, एक छोटा पैकेट बिस्किट और एक साबुन दिया गया। उसके बाद यात्रियों को तहसीलवार खड़ी बसों में बैठाकर भेजा गया। इस दौरान रेलवे और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा आरपीएफ, चिकित्सक सहित सुरक्षा बल व रेलवे कर्मचारी मौजूद थे।
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