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तस्वीरों में 'सेनाओं को जानो': छह हजार फीट की ऊंचाई से कूदे, तिरंगा आकृति बनाकर भरा जोश

Wed, 25 Jan 2023 11:20 AM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी गोरखपुर।
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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
एयरफोर्स के विमान से छह हजार फीट की ऊंचाई से जब जांबाजों ने छलांग लगाई, तो नंदानगर स्थित एयरफोर्स स्टेशन पर बैठे हजारों लोग रोमांचित हो उठे। हवा में तिरंगा लहराते नौ वायु योद्धाओं की टीम दर्शकों को नजर आई तो परिसर भारत माता की जय के घोष से गूंजने लगा। हवा में कलाबाजियां करते एक-एक कर जांबाज परिसर में उतरने लगे तो लोग रोमांच से तालियां बजाने लगे। जगुआर ने जब रफ्तार के साथ आसमान में उड़ान भरी तो सभी उत्साहित हो गए।

 
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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में एयरफोर्स स्टेशन की ओर से आयोजित ‘सेनाओं को जानो’ कार्यक्रम का उद्घाटन एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर मनीष सहदेव और एयरफोर्स फैमिली वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष नितिका सहदेव ने किया। कार्यक्रम में विभिन्न स्कूलों-कॉलेजों, एनसीसी कैडेट्स, स्काउट गाइड सहित आमजन शामिल हुए।

 
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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
आयोजन का मकसद बच्चों को वायुसेना की ताकत दिखाने के साथ उन्हें गौरवशाली सेना से जुड़ने के लिए प्रेरित करना था। जगुआर के साथ सूर्यकिरण और माइक्रोलाइट गरुण प्रदर्शनी में नजर आए। एक्सपर्ट ने बच्चों को अस्त्र-शस्त्र की प्रणाली के साथ वायु सेना में कॅरिअर बनाने के बारे में बताया। स्कूली बच्चे एक-एक कर इन जहाजों के पास गए और उनकी क्षमता को करीब से जाना।  

 

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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
एमआई 17वीं फाइव ने की फूलों की वर्षा
कार्यक्रम की शुरूआत एमआई फाइव हेलीकॉप्टर से अतिथियों और दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों पर फूलों की वर्षा से हुई। लोगों ने तालियां बजाकर एयरफोर्स की टीम का अभिवादन किया।

 
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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
इन फाइटर एयरकॉफ्ट, हेलीकॉप्टरों ने भरा जोश
एयर शो के दौरान तीन जगुआर ने एक साथ हवा में उड़कर दर्शकों को रोमांचित किया। इनके बाद तीन सूर्यकिरण एयरक्राफ्ट ने विशेष आकृति बनाते हुए वायुसेना की ताकत का अहसास कराया। एमआई फाइव हेलीकॉप्टर ने भी हवा में उड़ान भरते हुए जोश भरा।

 
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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
दुश्मन के चंगुल से छुुड़ाई पोस्ट, साहस को लोगों ने किया सलाम  
कार्यक्रम के आकर्षण का केंद्र पैराट्रूपर्स के साथ-साथ वायुसेना की स्पेशल फोर्स ‘गरुड़’ का साहसिक प्रदर्शन रहा। वायु योद्धाओं ने दुश्मन के चंगुल से पोस्ट को छुड़ाने के ऑपरेशन का प्रदर्शन किया। इस दौरान जवान हेलीकॉप्टर से जमीन पर उतरे।

 
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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
वायुसेना की ताकत एम17 वी5 हेलीकॉप्टर
  • 39 लोगों के बैठने की क्षमता, हवा में स्थिर रह सकता है
  • रूस से हुआ निर्माण, 2012 से एयरफोर्स स्टेशन में दे रहा सेवा
  • प्राकृतिक आपदा में बेहद कारगर, सैनिकों को दुर्गम स्थानों पर ले जाने में माहिर
  • 250 किमी प्रति घंटा की स्पीड
  • एक राउंड में तीन सौ गोलियां दागने वाली मशीनगन, छह रॉकेट, एयर-टू-एयर और एयर-टू-सरफेस मार करने वाली मिसाइलों से लैस

 

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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
जगुआर
  • फ्रांस निर्मित एयरक्राफ्ट भारतीय वायुसेना में 1979 में शामिल
  • 2000 किलोमीटर प्रतिघंटा की स्पीड
  • उड़ान की ऊंचाई अधिकतम 45,900 फीट
  • लेजर गाइडेड बम, हारपून मिसाइल और एक हजार पांउड तक के बम ले जाने की क्षमता
  • यान में लगी बंदूक एक बार में पांच राउंड गोलियां फायर कर सकती है।
  • लड़ाकू विमान, दुश्मन के रडार से गायब होने में सक्षम

 

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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
सूर्य किरन
  • फाइटर ट्रेनर, 60 के दशक में वायुसेना में शामिल
  • 1971 की लड़ाई में अहम भूमिका निभाई, रफ-टफ वायुयान, बेसिक ट्रेनिंग में इस्मेमाल
  • रॉकेट, बम ले जाने की क्षमता, गन भी मौजूद

 

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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
माइक्रोलाइट गरुण
  • मेड इन स्लोवेनिया, अक्तूबर 2015 में एयरफोर्स में शामिल
  • दो लोगों के बैठने की क्षमता, 200 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार
  • लंबाई 6.5 मीटर, ऊंचाई 2.5 मीटर
  • एरियल सर्वे, सर्च और बचाव, एंटी बर्ड हेजार्ड एक्टिविटी को रोकने में इस्तेमाल

 

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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
एक मिनट में एक हजार गोलियां दागती है एमएमजी
एयरफोर्स स्टेशन में अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया। आकर्षण का केंद्र रशिया में बनी एके-103 रही। एक मिनट के अंदर 600 गोलियां दागने के साथ यह अंधेरे में 350 मीटर तक निशान लगा सकती है। साथ ही एमएमजी ने भी लोगों का ध्यान आकृष्ट किया। एमएमजी एक मिनट में 600-1000 गोलियां दाग सकती है। जी लॉक पिस्टल, अमेरिकन राइफल सिग शौर, एलएमजी इनसास, स्टेन मैक भी आकर्षण का केंद्र रहीं।

 
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सेनाओं को जानो कार्यक्रम। - फोटो : अमर उजाला।
पायलट की सीट के नीचे होती है खाने की सामग्री, आपदा में आती है काम
प्रदर्शनी में फाइटर जहाज के पायलट की सीट को रखा गया था। लड़ाकू जहाज में खराबी आने के बाद पायलट को सीट के नीचे लगी एक रस्सी खींचनी होती है। इसके प्रयोग से वह अपने जीवन को सुरक्षित रख सकता है। साथ ही सीट के नीचे पानी, फिशिंग कीट, हाई कैलोरी चॉकलेट, चाकू, गन, चश्मा, दवा, कम्यूनिकेशन डिवाइस, स्टेरलाइज वाटर सहित कई आवश्यक सामान होते हैं, जिनके उपयोग से तीन से चार दिनों तक पायलट अपनी जीवन को सुरक्षित रख सकता है।

क्या बोले बच्चे
अपनी सेना को जानें कार्यक्रम से एयरफोर्स की ताकत का अहसास हुआ। आगे चलकर इस क्षेत्र में भविष्य बनाने की ठानी है। -प्राची यादव
लड़ाकू जहाज, अत्याधुनिक हथियारों को देखकर चलाने की लालसा जगी है। सेना से जुड़कर देशसेवा करूंगी। - अर्पिता राय
एयरफोर्स स्टेशन में नियमित अंतराल पर ऐसे कार्यक्रम होने चाहिए। वायुसेना का पराक्रम देख उत्साहित हूं।-उज्जवल
फिल्मों में ही लड़ाकू जहाजों को देखा था। आज करीब से देखकर विश्वास नहीं हो रहा था। सेना के लिए सम्मान बढ़ गया है।- अशीष
 
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