एकादशी 2021
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व्रत का परिणाम यह हुआ कि श्रीहरि की कृपा से लुंभक के पिता और राजा महिष्मान ने अपने बेटे को वापस लाने के लिए सैनिक भेजे और उसे पुन: अपने राजमहल में आदर के साथ स्थान दिया। लुंभक में आए परिवर्तन को देखकर उसके पिता ने राज-पाट उसे सौंप दिया और खुद तपस्या करने चले गए। लुंभक ने जीवनभर भगवान विष्णु की पूजा की और अपने राज्य की जनता का ध्यान रखा। जिस प्रकार से सफला एकादशी का व्रत करने से लुंभक को फिर से अपना राजघराना प्राप्त हुआ, उसी प्रकार से जो लोग सच्चे मन से इस एकादशी का व्रत करते हैं, उन्हें भी अपने सभी कार्यों में सफलता प्राप्त होती है।