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संजय गांधी ने वर्ष 1977 में रखी थी इस सूती मिल की नींव, अब उपेक्षा का है शिकार

Sun, 20 Sep 2020 09:16 AM IST
vivek shukla मोहम्मद आफताब आलम अंसारी, मगहर।
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cotton mill sant kabir nagar - फोटो : अमर उजाला।
पूर्व मुख्यमंत्री नारायन दत्त तिवारी के कार्यकाल में सात जनवरी 1977 में संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल मगहर में स्थापित हुई थी। कताई मिल की नींव पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी के पुत्र स्वर्गीय संजय गांधी ने रखी थी। इस मिल में करीब 1200 मजदूर काम करते थे। वर्ष 1997 में मिल पूरी तरह बंद हो गई और करीब 1200 कामगार बेरोजगार हो गए। बंद मिल फिर चले तो रोजगार के द्वार खुलेंगे।
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cotton mill sant kabir nagar - फोटो : अमर उजाला।
वर्ष 1978 से सूती धागे का उत्पादन शुरू हुआ था। बुनकर बाहुल्य क्षेत्र होने की वजह से बुनकरों को सुलभता से सूत मिल जाया करता था। मिल चालू होने से क्षेत्र के अलावा कस्बे के लोगों के हुनरमंद हाथों को भी काम मिला। मिल मजदूर संगठन के अस्तित्व में आने से वर्ष 1981 में मिल प्रबंधन व मजदूर संगठन के बीच विवाद छिड़ गया। जिसकी वजह से मिल 28 दिन तक बंद हो गई थी, फिर आपसी सहमति से पुनः मिल चली।
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cotton mill sant kabir nagar - फोटो : अमर उजाला।
वर्ष 1989 में सूती मिल में आग लगने के कारण काफी क्षति हुई और करीब दो वर्ष तक मिल बंद रही। 1992 में पुनः सूती मिल चालू हुई, लेकिन मुनाफे की जगह घाटे के कारण लगातार नहीं चल सकी। 1997 में तत्कालीन जीएम आरपी चौबे के कार्यकाल में मिल पूरी तरह से बंद हो गई। उसके बाद फेडरेशन ने कर्मचारियों को बीआरएस देने की घोषणा कर दी गई।

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cotton mill sant kabir nagar - फोटो : अमर उजाला।
तत्कालीन एमडी एसडी खन्ना के कार्यकाल में मिल कर्मचारियों को बीआरएस का भुगतान कर दिया गया।मिल पर बकाया अधिक होने के कारण मुंबई हाईकोर्ट के निर्देश पर मिल में ताला लग गया। कर्मचारी जगन्नाथ, शब्बीर अहमद, ताज मोहम्मद, जल्लू, मोहम्मद हनीफ व कमाल खान ने बताया कि मिल बंद होने के बाद से लगातार दोबारा चालू करने की मांग की जा रही है। 28 जून 2018 को प्रधानमंत्री मगहर आए थे तो उम्मीद जगी कि मिल पुनः चालू करने की घोषणा करेंगे लेकिन, आशा निराशा में बदल गई। कताई मिल मजदूर संगठन के अध्यक्ष अशरफ अली ने बताया कि बकाया भुगतान और मिल को दोबारा चालू करने की लड़ाई जारी रहेगी।

 
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cotton mill sant kabir nagar - फोटो : अमर उजाला।
नगर चेयरमैन ने भी मिल परिसर में दिया था धरना
नगर चेयरमैन संगीता वर्मा ने भी अपने कार्यकाल से पूर्व में सूती मिल परिसर में मिल को चालू करने व मजदूरों का बकाया भुगतान कराने की मांग को लेकर कई बार धरना दिया था। साथ ही क्षेत्र के जन प्रतिनिधियों से मिलकर मिल को चालू करने की गुहार लगाई थी, ताकि क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके।

 
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cotton mill sant kabir nagar - फोटो : अमर उजाला।
मिल चालू होती तो बुनकरों को मिलता काम
संतकबीरनगर बुनकर बहुल है। यही वजह है कि कांग्रेस की सरकार ने बुनकरों को सुलभता व सस्ते दर पर सूत उपलब्ध कराने के लिए मगहर में संतकबीर सहकारी सूती कताई मिल की स्थापना की थी। उत्पादन भी खूब होता रहा। बुनकर बिलाल अहमद, मुख्तार अहमद, अफजल हुसैन ने बताया कि अगर यह मिल चालू होती तो आज बुनकरों की हालत बहुत बेहतर होती।

मिल के सामानों पर चोरों की गड़ी नजर
मिल बंद होने के बाद प्राइवेट कंपनी के सुरक्षा गार्ड भुगतान नहीं पाने से अपने घरों को चले गए। उसके बाद से मिल के सामानों पर चोरों की नजर टिक गई। कई बार मिल से चुराए गए सामानों के साथ चोर पकड़े गए थे और पुलिस ने उन पर कार्रवाई की थी।
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मिल नीलाम होने की प्रक्रिया में
27 जुलाई 2018 को आयुक्त व निदेशक/निबंधक, हथकरघा व वस्त्र उद्योग सहकारी समितियां कानपुर उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में हुई बैठक में मगहर नगर में स्थित सूती मिल को नीलाम करने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए मिल की भूमि, भवन, मशीनरी आदि का आंकलन होना था। मिल के मूल्यांकन को लेकर जिला प्रशासन ने टीम भी गठित की थी। तत्कालीन सूती कताई मिल प्रबंधक एनके मिश्रा मगहर पहुंचे थे और बंद पड़ी सूती मिल का निरीक्षण किया था।

उन्होंने अपने स्तर से मूल्यांकन कार्य की शुरुआत की थी। इस दौरान मौके पर पहुंचे वन विभाग के तत्कालीन वन निरीक्षक अशोक तिवारी ने मिल के प्रबंधक से वार्ता के बाद बताया था कि वन विभाग सूती मिल में लगे सभी पेड़ों को सूचीबद्ध करके मूल्यांकन करेगा। इसके अलावा आईटीआई के तत्कालीन अनुदेशक एसके शर्मा ने भी इलेक्ट्रिक पार्ट्स के मूल्यांकन की बात कही थी।
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