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भारत-नेपाल सीमा सील होने से कारोबारियों को बड़ा नुकसान, जानिए कहां मनाया जाएगा नया साल

Wed, 30 Dec 2020 04:43 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, महराजगंज।
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भारत-नेपाल सीमा। - फोटो : अमर उजाला।
इस बार भारत-नेपाल सीमा सील होने के कारण लोग देश में ही नए साल का जश्न मनाएंगे। कोई केदारनाथ का दर्शन करेगा तो कोई महाकाल का दर्शन कर कोरोना से मुक्ति की दुआ करेगा। वहीं नेपाल में भारतीय पर्यटकों को नहीं जाने से चहल पहल कम है। वहां के बाजारो में पहले जैसी रौनक नहीं है। नेपाल का पर्यटन कारोबार ज्यादा प्रभावित हुआ है।

 
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New year 2021 - फोटो : अमर उजाला
इस बार भारत नेपाल की सीमा सील है। लोगों को उम्मीद था कि नए साल में सीमा खुल जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो नए साल की खुशियों को मनाने के लिए लोगों ने व्यवस्था बना ली है। सीमावर्ती क्षेत्र के लोगों की पहली पसंद नेपाल हुआ करता था। लेकिन इस बार सीमा सील होने के कारण कुल्लू मनाली का रूख ज्यादातर लोग कर लिए हैं। ऐसे में नेपाल पर्यटन को इस बार झटका लगा है।

सोनौली कस्बे के रहने वाले नीरज कहते हैं कि कोरोना के वजह से बहुत कुछ बदल गया है। इस बार नए साल पर उज्जैन महाकाल का दर्शन करने के लिए निकलना है। पूजा कर कोरोना से मुक्ति की कामना की जाएगी। अगर नेपाल सीमा खुली रहती तो वहां जाने का मौका मिलता। लेकिन पता नहीं नेपाल सीमा कब खुलेगी।

 
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बाबा महाकाल - फोटो : Mahakal Mandir FB
सौनौली के हरिश्चंद्र जायसवाल ने बताया कि परिवार के साथ उज्जैन जाने की व्यवस्था बन चुकी है। इस बार नए साल पर परिवार के सदस्यों के साथ महाकाल की पूजा कर सुख समृद्धि की कामना की जाएगी। वैसे भी कोरोना के वहज से कहीं आने जाने में ज्यादा सतर्क रहना पड़ रहा है।

कस्टम हाउस एजेंट विनायक चंद तिवारी ने कहा कि ऐसा पहली बार हो रहा है कि नए साल पर नेपाल जाने को नहीं मिलेगा। हालात ऐसे हैं कि नेपाल सीमा कब खुलेगी कोई ठिकाना नहीं है। इस बार तो बाबा केदारनाथ के दर्शन कर उत्तरखंड के पर्यटन स्थलों पर भ्रमण होगा।

नौतनवां कस्बे के पवन कुमार ने बताया कि नया साल इस कुल्लू मनाली में मनाने के लिए। दोस्तों के साथ इस बार रवाना हो रहा हूं। सीमा खुली रहती तो काठमांडू जाने को मिलता। लेकिन इस बार कोरोना से बहुत कुछ बदल गया है।

 

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मोतिहारी में भारत और नेपाल की सीमा - फोटो : Social media
कोरोना में चौपट हुआ नेपाल का पर्यटन कारोबार
भारत नेपाल मैत्री समाज एवं पर्यटन अध्यक्ष श्रीचंद गुप्ता ने बताया कि पर्यटकों की संख्या वर्ष 2018 के दौरान 37.2 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 526,705 हो गई थी। वर्ष 2019 में पर्यटकों की संख्या 5 प्रतिशत की गिरावट के साथ कुल 500,277 रही। 2019 में पर्यटकों के ठहरने की औसत अवधि 11.96 दिन थी, जो घट कर कैलेंडर वर्ष 2019 में 11.78 दिन रह गई। वर्ष 2020 में पर्यटकों की संख्या में 40 प्रतिशत की वृद्धि के साथ जनवरी फरवरी के शुरुआती समय मे पर्यटको के आगमन में तेजी आई थी। लेकिन कोरोना महामारी से सब चौपट हो गया।
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Nepal - फोटो : Pixa
नेपाल के बाजारों में रौनक नहीं
सोटो नेपाल ट्रेवल्स रूपनदेही के अध्यक्ष संजय बजमया ने बताया कि होटल का कारोबार ठप है। इन दिनों में होटल व्यवसाय से जुड़े हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्र प्रकाश श्रेष्ठ ने बताया कि इस बार पर्यटन उद्योग कोरोना की भेंट चढ़ गया। रूपनदेही जिले में 210 होटल एंड लाज के साथ 100 से अधिक रेस्टोरेंट हैं। भैरहवां, पोखरा और काठमांडू का होटल पूरी तरह भारतीय पर्यटकों पर निर्भर हैं। लेकिन इस बार तो कारोबार चौपट हो गया। थाई बुद्ध बिहार सोनौली के प्रबंधक राजेश शुक्ला ने बताया कि नेपाल के लिए बुकिंग बंद है। बनारस और बौद्ध गया से सीधे नेपाल लुम्बिनी की बुकिंग शून्य है। पिछले साल दिसंबर माह में प्रतिदिन 30 से 40 बस विदेशी पर्यटक नेपाल जाते थे।
 
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