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गोरखपुर: यूपी पर्यटन के मानचित्र में जगह न मिलने से शहरवासी अचंभित, बोले- 'पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बहुत कुछ है'

Fri, 04 Jun 2021 02:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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गोरखपुर पर्यटन स्थल - फोटो : अमर उजाला।
धार्मिक, सांस्कृतिक, एतिहासिक धरोहरों से समृद्ध होने के बावजूद गोरखपुर जिले को प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में जगह नहीं मिलना शहर वासियों को अचंभा लगता है। इन लोगों का कहना है कि देश का सबसे लंबा प्लेटफार्म होने का रिकॉर्ड रखने वाले गोरखपुर जिले में देशी विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए बहुत कुछ है। जरूरत है कि उन्हें उचित प्लेटफार्म पर प्रदर्शित किया जाए।

जिले के दर्शनीय स्थलों को फोटो गैलरी में नहीं मिली जगह
उत्तर प्रदेश पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर विभिन्न जिलों के दर्शनीय स्थल, प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम प्राकृतिक स्थल, एतिहासिक स्थलों की फोटो गैलरी है। विश्व प्रसिद्ध गीता प्रेस, बौद्ध संग्रहालय, रामगढ़ ताल, चिलुआताल, गोरखनाथ मंदिर, हजरत रौशन अली शाह की दरगाह, सोने चांदी की ताजिया किसी के भी चित्र नहीं हैं।
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सर्वेश दुबे - फोटो : अमर उजाला।
पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत के जानकार सर्वेश दुबे कहते हैं कि गोरखनाथ मंदिर नाथ संप्रदाय का मुख्य केंद्र है। देश का शायद ही कोई ऐसा शहर हो जहां नाथ संप्रदाय के अनुयायी न हों। यह मंदिर विदेशों में भी आस्था का केंद्र है। संत कबीर के कारण जिस तरह मगहर और कुशीनगर की पहचान है, गुरु गोरक्षनाथ के कारण विश्व में गोरखपुर की पहचान है।  
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समाजसेवी मनोज सिंह - फोटो : अमर उजाला।
समाजसेवी मनोज सिंह कहते हैं कि गोरखपुर फिराक गोरखपुरी, मुंशी प्रेमचंद जैसे साहित्यकारों की कर्मस्थली रहा है तो राम प्रसाद, प्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्लाह खां की शहादत का गवाह भी रहा है। असहयोग आंदोलन के दौरान पुलिस थाना जहां जलाया गया था वह विश्व प्रसिद्ध चौरीचौरा भी यहीं स्थित है।  गीता प्रेस भी है। यदि प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर इनको जगह नहीं दी गई तो यह दुर्भाग्यपूर्ण है।

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सुनीशा श्रीवास्तव - फोटो : अमर उजाला।
सामाजिक-सांस्कृतिक मामलों की जानकार सुनीशा श्रीवास्तव कहती हैं कि जिले में गोरखनाथ मंदिर, बौद्ध संग्रहालय, रेलवे संग्रहालय, चिलुआ ताल, रामगढ़ ताल, तारामंडल जैसे अनेक दर्शनीय स्थल हैं। यदि पयर्टन विभाग इन दर्शनीय स्थलों की फोटो गैलरी भी अपनी वेबसाइट पर प्रदर्शित करे तो यहां पर्यटन उद्योग को बढ़वा मिल सकता है। उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि एतिहासिक-सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहरों के बावजूद गोरखपुर को पयर्टन मानचित्र पर स्थान नहीं दिया गया है।
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मुमताज खान मुमताज खान - फोटो : अमर उजाला।
एतिहासिक-सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने वाली संस्था इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड हेरिटेज (इंटेक) गोरखपुर के सह संयोजक मुमताज खान कहते हैं कि हजरत रौशन अली शाह, उनके इमामबाड़े में सोने चांदी की ताजिया, मुबारक खां शहीद दरगाह, गीता वाटिका जैसी विश्व प्रसिद्ध स्थलों के बावजूद जिले में पर्यटन गतिविधियां न के बराबर हैं। बताते हैं कि भूतपूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह ने गोरखपुर को विश्व के मानचित्र पर अंकित करने का संकल्प लिया था। वर्तमान में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस दिशा में गंभीर प्रयास कर रहे हैं। यदि पर्यटन विभाग भी लालफीताशाही रवैया छोड़ कर वेबसाइट पर प्लेस ऑफ इंटरेस्ट में गोरखपुर को भी शामिल कर ले तो जिले में पर्यटन सेक्टर तेजी से विकसित हो सकता है।
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