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Exclusive: राजधानी की आंखों से रोशन हो रही गोरक्षनगरी के लोगों की दुनिया, जानिए कैसे

Sat, 21 May 2022 01:27 PM IST
vivek shukla नीरज मिश्रा, गोरखपुर।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
प्रदेश की राजधानी लखनऊ और संगम नगरी प्रयागराज के दानदाताओं की आंखों से गोरक्षनगरी के लोगों की दुनिया रोशन हुई है। इन दोनों शहरों से ही बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग को कॉर्निया (पुतली) मिल रही है। इसकी मदद से 28 मरीजों की आंखों का ऑपरेशन किया गया। कॉर्निया प्रत्यारोपित करके दोबारा आंखों की रोशनी लाई गई।  

 
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eye - फोटो : social media
जानकारी के मुताबिक, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभाग में शासन की पहल पर 2018 में कॉर्निया बैंक खोला गया। इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री योगी ने किया था। इसके बाद पूर्वांचल के लोगों को उम्मीद जगी थी कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए अब परेशान होने की जरूरत नहीं होगी। लेकिन, ऐसा नहीं हो सका। चार सालों के अंदर केवल चार लोगों ने कॉर्निया दान किया है। जबकि, हर साल 100 से अधिक लोगों की आंखों की रोशनी खराब हो रही है। ज्यादातर लोग कॉर्निया प्रत्यारोपण का आवेदन करते हैं। मेडिकल कॉलेज में ही अब तक 250 से अधिक नेत्रहीनों ने आंखों के लिए पंजीकरण कराया है।

 
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eye liner - फोटो : सोशल मीडिया
मेडिकल कॉलेज प्रबंधन के पास जो रिकार्ड उपलब्ध है, उसके मुताबिक, अधिकांश प्रत्यारोपित कॉर्निया प्रयागराज मेडिकल कॉलेज और लखनऊ के किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से मिला है। इससे गोरखपुर, देवरिया, संतकबीरनगर, गोंडा, महराजगंज और बिहार के मरीजों के आंखों की रोशनी फिर आई है। ज्यादातर मरीजों की उम्र 25 से 50 वर्ष रही है।

 

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eye - फोटो : Social Media
नहीं निकाली जाती हैं आंखें
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ राम कुमार जायसवाल ने कहा कि लोगों को लगता है कि नेत्रदान के दौरान उनकी पूरी आंख निकाल दी जाती है। यह बिल्कुल गलत है। आमतौर पर केवल कॉर्निया, जो आंख की सबसे बाहरी परत होती है, उसे निकाला जाता है। आंखों के अन्य भाग, जिन्हें दान किया जा सकता है, उनमें अश्रु नलिका (टीयर डक्ट), एमनियोटिक मेंबरेन और पुतली शामिल हैं। कॉर्निया ही आंखों के अंदर प्रकाश पहुंचाती है, जिसकी वजह से लोग देख सकते हैं।

यह  लोग नहीं कर सकते हैं नेत्र दान
एड्स, हेपेटाइटिस सी, हेपेटाइटिस बी या किसी संचारी रोग ग्रस्त व्यक्ति, डूबने से मरने वाला व्यक्ति।

 
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eye - फोटो : सोशल मीडिया

छह घंटे के अंदर करना होता है नेत्र दान

डॉ राम कुमार जायसवाल ने बताया कि नेत्रदान करने वाले व्यक्ति की कॉर्निया निधन के छह घंटे के अंदर ही निकाली जा सकती है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज नेत्र रोग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. राम कुमार जायसवाल ने कहा कि नेत्रदान के लिए गोरखपुर जिले में डोनर नहीं मिल रहे हैं। यह गंभीर बात है। जबकि, 250 से अधिक नेत्रहीनों ने डेढ़ साल के अंदर कॉर्निया प्रत्यारोपण के लिए पंजीकरण कराया है। अब तक लखनऊ और प्रयागराज से सबसे अधिक कॉर्निया मंगाकर 28 लोगों की रोशनी लौटाई गई है।
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