लॉकडाउन के दौरान सिर्फ बेसहारा गरीबों, मजदूरों की मदद के लिए ही लोग आगे नहीं आ रहे, बल्कि बेजुबान वन्य जीवों की रक्षा और उनके खाने के इंतजाम को लेकर भी कई लोग संजीदगी से जुड़े हैं। इनमें कुछ लोग रोजाना विनोद वन के हिरण और बंदरों के लिए खाने-पीने का इंतजाम कर रहे तो कुछ कुसम्ही जंगल में रहने वाले बंदरों को रोज खाने के लिए कुछ न कुछ लेकर जा रहे हैं।
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हेरिटेज फाउंडेशन से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता नरेंद्र मिश्र लगातार 15 दिन से कुसम्ही स्थित विनोद वन में रह रहे हिरण और बंदरों का ख्याल रख रहे हैं। उन्हें खाने के सामान के साथ ही पीने के पानी का भी प्रबंध करते हैं।
नरेंद्र कहते हैं कि बुढ़िया माता मंदिर और विनोद वन आने वाले पयर्टक एवं श्रद्धालु यहां के पक्षियों, बंदरों एवं विभिन्न प्रजाति के हिरणों के खाने-पीने का इंतजाम करते रहे हैं, मगर लॉकडाउन के कारण लोगों का घरों से निकलना प्रतिबंधित है। ऐसे में इन वन्यजीवों के लिए उन्होंने न केवल कुछ लोगों को प्रेरित किया, बल्कि नियमित रूप से स्वयं भी कुछ न कुछ खाद्य पदार्थ उपलब्ध करा रहे हैं।
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इसी तरह मोहद्दीपुर चार फाटक व्यापार मंडल समिति के डॉ. अशोक अग्रवाल, डॉ. एससी वर्मा, मोनू गुप्ता, रिंकू मिश्रा, चंदन सिंह, परमेश्वर साहनी, दीपक कुमार, बिट्टू तिवारी, रामप्रवेश चौहान भी बंदरों और हिरणों को पानी में भीगा हुआ चना खिलाने जाते हैं।
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पशुपालन विभाग ने निराश्रित गोवंश, स्वानों को खिलाया खाना
पशुपालन विभाग की तीन टीमों ने सोमवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर निराश्रित गोवंश और स्वानों को खाना खिलाया। इस दौरान टीम ने लोगों को भी जागरूक किया कि वे निराश्रित जानवरों के लिए अपने घरों के बाहर कुछ खाना एक तय स्थल पर रखें।
इसके अलावा छतों पर पक्षियों के लिए दाना और पानी रखें। मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि पशुपालन विभाग की टीमों ने जनसहयोग से बंदरों, कुत्तों, गोवंश आदि को भोजन कराया गया। सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक शहर की विभिन्न सड़कों पर यह अभियान संचालित किया जा रहा है।