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STF की जांच में खुलासा: यूपी में पहले मंत्रियों तक पहुंचते थे वसूली के रुपये, इस तरह चलता था धंधा

Sun, 26 Jan 2020 11:20 PM IST
विजय जैन डिजिटल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोरखपुर
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ट्रक से खुलेआम वसूली करता सिपाही - फोटो : amar ujala
ओवरलोड ट्रकों से अवैध वसूली का भंडाफोड़ होने के बाद से ही आरटीओ महकमे में हड़कंप तो मचा ही है, राजनीति गलियारे में भी हलचल तेज हो गई है। एसटीएफ की पूछताछ में पता चला है कि पूर्व की सरकारों में मंत्री तक वसूली का हिस्सा पहुंचाया जाता था।

करीब 15 साल से यह खेल प्रदेश में चल रहा था और राजनीतिक संरक्षण की वजह से फलफूल रहा था। इस पर ना तो सरकार कार्रवाई को कहती थी और न ही अफसर कभी कोशिश करते थे।

जानकारी के मुताबिक गोरखपुर आने पर अफसर मधुबन होटल में ही ठहरा करते थे। यही नहीं होटल पर कोई कार्रवाई नहीं होने पाए, इसके लिए कई कमरों को मुफ्त में पुलिस और अन्य विभाग के अफसरों को दिया गया है।

पूर्व में एक सीओ भी इसी होटल में तीन महीने तक अपना ठिकाना बनाए थे और होटल में युगल के आने की सूचना पर उस समय के एसएसपी सत्यार्थ अनिरुद्ध पंकज के आदेश पर कार्रवाई की गई थी। इसके बाद ही सीओ की पोल खुल गई थी और एसएसपी ने कड़ी फटकार लगाने के साथ ही उनकी सर्किल भी बदल दी थी। वसूली की आड़ में होटल से कई अवैध धंधे भी संचालित होते हैं, एसटीएफ पर इसकी नजर पड़ गई है।
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अवैध वसूली मामला
डायरी की मदद से अफसरों की गर्दन दबोचेगी एसटीएफ
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपितों के पास से एक डायरी बरामद की है जिसमें करीब 18 जिले के आरटीओ अफसर व कर्मचारियों के नंबर व नाम लिखे हुए हैं। बताया जा रहा है कि इन्हीं अफसरों को रुपये पहुंचाए जाते थे। इनकी मदद से ही पूरा रैकेट चल रहा था।

अब यह डायरी एसटीएफ के हाथ लग गई है जिसके आधार पर जांच पड़ताल शुरू कर दी गई है। एसटीएफ सबकी सूची तैयार कर रहा है फिर इनके नाम भी मुकदमे में शामिल किया जाएगा।
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काली कमाई की जांच भी करेगी सरकार
आरोपितों के गिरफ्तारी के बाद से ही शासन में यह चर्चा तेज हो गई है कि काली कमाई से अर्जित संपत्ति की जांच की जाएगी। सरकार भ्रष्ट अफसरों को जबरन रिटायर भी कर सकती है।
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वसूली करता कर्मी - फोटो : file
यह हुई है बरामदगी
एक रेनॉल्ट डस्टर कार, एक स्कार्पियो, बारह मोबाइल, अवैध वसूली का 28 हजार 400 रुपये, 35 डायरी, रजिस्टर, जिसमें विभिन्न जनपदों के आरटीओ के विभाग के अधिकारी व कर्मचारियों के नाम व नंबर हैं, विभिन्न बैंकों के चेकबुक, एटीएम, विभिन्न गाड़ियों के आरसी की छायाप्रति, व कई ड्राइविंग लाइसेंस।
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इस तरह से रखते थे लेखा-जोखा
बिचौलिए सड़क पर वसूली का काम करते थे। रजिस्टर में ट्रक, डीसीएम, पिकप, ट्रेलर का महीना और सालवार हिसाब रखते थे। अवैध वसूली के बाद हर महीने एक व्यक्ति आरटीओ में जाकर अफसरों और कर्मचारियों को उसका हिस्सा देता था।

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पुलिस की वसूली - फोटो : self
प्राइवेट चालक व सिपाही भी करते थे वसूली
एसटीएफ की जांच में सामने आया है कि प्राइवेट चालक और आरटीओ के सिपाही खुद भी वसूली में शामिल होते थे। इतना ही नहीं खनन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी वसूली में शामिल हैं।
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इंट्री पर आरटीओ देता है कोड
जिन गाड़ियों की इंट्री अवैध तरीके से करानी होती है उसे एक विशेष कोड दिया जाता है। यह कोड गाड़ी के मार्का या डबल शून्य के आगे जिले का नंबर लिख दिया जाता है। पकड़े जाने पर चालक यही कोड बताकर छूट जाते हैं। यानी कि इसी कोड से अवैध वसूली करने वालों को खुद की गाड़ी की पहचान हो जाती थी। पहले आरटीओ इसी अवैध काम के लिए टोकन जारी होता था। यह टोकन आसपास के ढाबों पर बिकता था। गोरखपुर से वाराणसी के बीच सेंवई और गाजीपुर में टोकन खुलेआम दिया जाता था लेकिन सख्ती होने पर अफसरों अपने तरीके को बदल दिया।
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वसूली से खफा होकर ट्रांसपोर्टरों द्वारा हाईवे पर खड़े किए गए ट्रक।
इन जिलों में वसूली का अघोषित रेट
गोरखपुर : 2500
देवरिया : 2500
बलिया : 3000
गोंडा:  2000
चंदौली : 4000
वाराणसी : 4000
आजमगढ़ : 3000
मऊ         3500

नेटवर्क से जुड़े लोग नेपाल भागे  
आरटीओ वसूली रैकेट से जुड़े लोग शहर छोड़कर नेपाल भाग गए हैं। कई लोगों के मोबाइल स्विच ऑफ हो गए हैं। बताया जा रहा है कि बिचौलियों के तौर पर काम करने वाले दस से ज्यादा लोग हैं।
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