indo-nepal border
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नेपाली नागरिकों का कहना है कि अब तो गांव में कर्ज भी नहीं मिल रहा है। न व्यापार रहा, न ही कोई रोजगार देता है। ऐसे में भारत आना ही बेहतर है क्योंकि वहां तो रोजी रोटी का जुगाड़ हो ही जाएगा। भारत जाने के लिए सरहद पर पहुंचे हरिश्चंद्र, प्रमोद चौधरी, कृष्ण प्रसाद, गोपाल, सच्चिदानंद, प्रदीप आदि ने बताया कि कोरोनो महामारी की शुरुआत के बाद भारत में लॉकडाउन के कारण उद्योग धंधे बंद हो गए थे। ऐसे में नेपाल अपने घर आना पड़ा। वहीं अब भारत में सब कुछ समान्य हो गया है। फैक्ट्रियों में काम काज शुरू हो गया है। इस वजह से वहां जाकर फिर काम शुरू करने की इच्छा है। लेकिन सीमा सील होने के कारण जाने को नहीं मिल रहा है। नियम कानून के पेच में हम सभी को काम धंधा नहीं मिल पा रहा है। अब तो परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। घर आए करीब पांच माह हो गया, लेकिन हमें कोई पूछने वाला नहीं है। गांव में कोई ऋण नहीं दे रहा है और न कोई रोजगार के साधन दिख रहे हैं।