गोरखपुर ग्रामीण की टूटी सड़कें।
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दरअसल, गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों से डंपर से मिट्टी व गिट्टी ढोई गई। वहीं, बेलघाट से नौसड़ तक हो रहे एक्सप्रेसवे के निर्माण के लिए भी डंपर से मिट्टी-गिट्टी व बालू ढोई गई है। जानकार बताते हैं कि जिन डंपरों से मिट्टी जा रही थी उस पर 40 से 50 टन वजन होता था। जबकि ग्रामीण क्षेत्र की सड़कों की क्षमता 10 से 12 टन का वजन बर्दास्त करने की होती है। इस तरह लगातार ओवरलोड डंपर चलने से ग्रामीण क्षेत्र की सड़कें ध्वस्त हो गई हैं।
गोरखपुर-वाराणसी फोरलेन के निर्माण की जिम्मेदारी एनएचएआई के जिम्मे है और एक्सप्रेसवे के निर्माण की जिम्मेदारी यूपीडा के पास है। इन्हीं संस्थाओं पर ग्रामीण सड़कों को खराब करने का आरोप है। इसलिए इन्हीं को इनकी मरम्मत करानी है, लेकिन ये इस तरफ ध्यान नहीं दे रही हैं। संवाद