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लॉकडाउन में बदली इन खास लोगों की आदतें, जानें अब कैसे निपटा रहे कामकाज

Tue, 14 Apr 2020 06:47 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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Gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना वायरस की चुनौती और लॉकडाउन के बीच विधायकों की दिनचर्या बदल गई है। जो विधायक जनता से घिरे रहते थे, वे अब सामाजिक दूरी बनाकर कामकाज निपटा रहे हैं। क्षेत्र में जाते जरूर हैं, लेकिन फोकस समस्या के समाधान पर रहता है।

भीड़ जुटाने और भाषण देने की आदत बदल गई है। वे कहते हैं कि भीषण संकट में समय खूब मिला है। क्षेत्रवासियों की समस्या का निपटारा पहली प्राथमिकता होती है पर परिवार भी खुश है। परिवार 21 दिन के इस लॉकडाउन को गोल्डन पीरियड मान रहा है।
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देवेंद्र प्रताप सिंह, एमएलसी - फोटो : अमर उजाला।
देवेंद्र प्रताप सिंह, एमएलसी बताते हैं कि लॉकडाउन से पहले क्षेत्र के 17 जिलों में आना-जाना और समस्याओं को सुनना होता था, लेकिन लॉकडाउन के बाद जिलों की सीमाएं सील हो गई हैं। भीड़ जुटाना या फिर भाषण देना बीते दिनों की बात हो चुकी है।  

अब मोबाइल फोन से ही राजनीतिक गतिविधियों का संचालन करते हैं। क्षेत्र में राशन, भोजन और दवाइयों का संकट न हो, इसलिए जिलाधिकारियों से लगातार संपर्क में रहते हैं। उनका कहना है कि कोरोना वायरस की चुनौतियों के बीच समय ही समय है।

रोजाना तड़के साढ़े तीन बजे उठ जाते हैं, फिर एक घंटे योग करते हैं। लंबे समय बाद गो-सेवा करने का मौका मिला है। पूजा-पाठ भी कर रहे हैं। राजनीतिक गतिविधियों को निपटाने में पत्नी का विशेष सहयोग मिलता है।
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डॉ आरएमडी अग्रवाल, विधायक गोरखपुर नगर - फोटो : अमर उजाला।
नगर क्षेत्र से भाजपा विधायक डॉ आरएमडी अग्रवाल की दिनचर्या में कोई खास बदलाव नहीं आया है। सामाजिक दूरी और लॉकडाउन के नियमों का पालन करते हुए वह क्षेत्र में भी जा रहे हैं। जरूरतमंदों तक राशन, भोजन पहुंचे, यह सुनिश्चित कराने में लगे हैं।

सभासदों के माध्यम से क्षेत्र में स्वच्छता किट पहुंचाया है। वह बच्चों के अच्छे डॉक्टर भी हैं। लिहाजा, ऑनलाइन परामर्श भी दे रहे हैं। जो कोई व्हाट्स एप या फिर फेसबुक से बच्चे में बीमारी का लक्षण बताकर सलाह मांगता है, वह सहज ही दवा लिखकर भेज देते हैं।

कांशीराम कॉलोनी से भोजन न मिलने का फोन आया तो वह ज्वाइंट मजिस्ट्रेट को फोन करके मौके पर पहुंच गए।  रामजानकी नगर, सुड़िया कुआं से कोटेदारों द्वारा ज्यादा पैसा वसूली की सूचना मिली तो खुद पहुंच गए। पैसा वापस भी कराया। उनका कहना है कि कोरोना वायरस की चुनौती से खूब समय मिला है।

घर, परिवार के साथ ही जनहित का काम में लगा हूं। पहले जगह-जगह पहुंच जाता था, लेकिन अब ज्यादातर मामलों का निपटारा फोन या फिर अफसरों के जरिए करना पड़ रहा है। पत्नी रागिनी अग्रवाल और बेटी डॉक्टर अदिति अग्रवाल का सहयोग भी मिल रहा है। 

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फतेहबहादुर सिंह, विधायक कैंपियरगंज - फोटो : अमर उजाला।
जब से लॉकडाउन हुआ है, तब से पूर्व मंत्री व भाजपा विधायक अपने विधानसभा क्षेत्र कैंपियरगंज में हैं। रोजाना सुबह पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष व पत्नी साधना सिंह के साथ मिलकर किचन गार्डेनिंग करते हैं। पौधों को पानी देते हैं, फिर योग, सूर्य नमस्कार का नंबर आता है। जिम भी करते हैं।

क्षेत्र में राशन, भोजन का संकट न हो, इसपर निगाह रखते हैं। उनका कहना है कि सामाजिक दूरी का अनुपालन करके 22 गांवों में गया और राशन बांटा है। विधानसभा क्षेत्र का कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे, यही कोशिश है। बाहर से आने वाले जो लोग क्वारंटीन में रखे गए हैं, उनसे भी मिलना होता है।

परिवार को ज्यादा समय देने के सवाल पर विधायक जोर से हंसते हैं, फिर कहते हैं सही बात पहली बार ऐसा मौका मिला है। सार्वजनिक जीवन में सबसे ज्यादा समय जनता के लिए होता है।

जब कोरोना का संकट नहीं था तो सुबह निकलते थे, फिर देर रात आना होता था। बाहर भी जाना पड़ता था। अब ऐसा नहीं है। क्षेत्र से सीधे घर। पहला ऐसा मौका है, जब पत्नी, बेटे विविश्वान सिंह और ज्योतिरादित्य सिंह के साथ क्वालिटी टाइम बिताया है।
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संगीता यादव, विधायक चौरीचौरा - फोटो : अमर उजाला।
चौरीचौरा से भाजपा विधायक संगीता यादव इस समय फोन पर ज्यादा समय बिताती हैं। उनका कहना है कि सामाजिक दूरी और लॉकडाउन का ख्याल रखना है। लिहाजा, फोन बड़ा सहारा है। कर्नाटक, आंध्र प्रदेश सहित कई शहरों में गोरखपुर के लोग फंसे हैं।

फेसबुक से जो लोग मोबाइल नंबर लेकर फोन करते हैं, उनकी मदद पहली प्राथमिकता रहती है। पति अजय कुमार इनकम टैक्स में ज्वाइंट कमिश्नर हैं। कुछ मदद उनके जरिए कर देती हूं। जो बचता है, उसमें यूपी के बड़े अफसरों से मदद लेती हूं।

क्षेत्र में कोई भूखा न रहे, इसपर खास निगाह है। क्षेत्र की सभी आशा बहू, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, लेखपाल और अस्पताल स्टाफ से बात की है।  लंबे समय बाद कुछ समय मिला है। अब बेटे अमिष अरिंदम और बहन की बेटी एलिजबा को भी पढ़ा रही हूं। अक्षयपात्र, व्यापारियों और सामाजिक संगठनों की मदद से जरूरतमंदों तक भोजन, राशन पहुंचाया जा रहा है।
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महेंद्रपाल सिंह, विधायक पिपराइच - फोटो : अमर उजाला।
पिपराइच से विधायक महेंद्रपाल का फोन सुबह से घनघनाने लगता है। कहीं राशन तो कहीं भोजन की कमी रहती है, फिर दूसरे शहरों में फंसे लोग भी मदद मांग रहे हैं। विधायक कहते हैं कि कोरोना वायरस ने कठिनाई बढ़ा दी है। जीवन थम से गया है।

विधायक का काम क्षेत्र में जाना और जनता की समस्या का समाधान कराना है, लेकिन सामाजिक दूरी ने इस सोच को बदल दी है। अब फोन ही मदद का सहारा है। लॉकडाउन से समय मिला तो पत्नी प्रेमलता सिंह और बेटा अभिषेक सिंह भी खुश हैं।

सब मिलकर रामायण और महाभारत भी देखते हैं। योग भी हो जा रहा है। पहले टीवी देखते या फिर के लिए समय नहीं मिलता था। घर पर ही दफ्तर बना रखा है। जो लोग आते हैं, उनकी सामाजिक दूरी बनाकर  मदद की जाती है। यह सिलसिला आगे भी चलेगा। 
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शीतल पांडेय, विधायक सहजनवां - फोटो : अमर उजाला।
सहजनवां से भाजपा विधायक शीतल पांडेय ने छात्रराजनीति भी की है। वह कहते हैं कि इस तरह का लॉकडाउन नहीं देखा है। पहली बार सामाजिक दूरी बीमारी से बचने का तरीका बताया गया। छोटे बेटे मानवेंद्र पांडेय की शादी 25 अप्रैल को होनी थी, जो टल गई है।

सामाजिक जिम्मेदारियां ऐसी हैं कि घर में नहीं बैठ सकते हैं। जनता की जो भी समस्या होती है, उसका निस्तारण करते हैं। भले ही फोन का ज्यादा सहारा लेना पड़ता है। क्षेत्र की जनता को राशन, भोजन और दवाइयां मिलें, इसकी रोज अपडेट ली जाती है। बेटे दिगंबर पांडेय की मदद से राशन सामग्री पहुंचाई जा रही है।

छात्र राजनीति और मुख्य राजनीति में पहली बार ऐसा हुआ, जब ज्यादा समय परिवार के साथ बीत रहा है। रोजाना पत्नी दमयंती पांडेय, बेटे शिवेंद्र पांडेय, बहू नीलम पांडेय, यशोदा पांडेय और नाती-पोती यशिव, रुद्रांश, अर्णव और आराध्या के साथ बैठकर चर्चा करते हैं।

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विपिन सिंह, विधायक गोरखपुर ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर ग्रामीण विधायक विपिन सिंह बताते हैं कि शासन ने राशन, भोजन और आर्थिक सहयोग की जो व्यवस्था की है, उसका अनुपालन 100 फीसदी कराने में लगे हैं। जिला प्रशासन की अनुमति से राशन, भोजन भी बंटवा रहे हैं। उनका कहना है कि अब भीड़ जुटाना नहीं है। क्षेत्र में जाते ही भीड़ लग जाती है, इसलिए घर पर रहकर ही मोबाइल फोन से मदद को आगे बढ़ा रहे हैं।

रोजाना 60 कॉल करते हैं। जो समस्या आती है, उसका समाधान अफसरों से बात करके कराई जाती है। परिवार को समय देने का सवाल किया गया तो विधायक हंस पड़े। बोले- यकीन मानिए, ऐसा मौका पहली बार आया है। पिता व पूर्व विधायक अंबिका सिंह, मां जानकी देवी, पत्नी नीता सिंह, बेटी डॉ दृष्टि सिंह और इंजीनियरिंग कर रहा बेटा आदर्श सिंह साथ में हैं।

सब एक साथ खाना खाते हैं। पहले ऐसा नहीं होता था। सुबह निकलते थे तो देर रात घर आते थे। तब तक बच्चे सो जाते थे। परिवार के साथ बैठकर रामायण देखने का मौका पहले कब मिला था, याद नहीं है। अब रामायण देख रहे हैं।

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डॉ विमलेश पासवान, विधायक बांसगांव - फोटो : अमर उजाला।
बांसगांव विधानसभा क्षेत्र भाजपा विधायक डॉ विमलेश पासवान भी लॉकडाउन और सामाजिक दूरी का पालन कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों की समस्या का समाधान कर सकें, इसलिए घर पर ही एक अस्थायी कार्यालय बनाया है। यहीं से क्षेत्र में राशन, भोजन, दवा पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।

विधायक और उनकी पत्नी डॉ मोहिता आनंद पेशे से डॉक्टर हैं। सब कुछ बंद है तो घर पर एक साथ हैं। विधायक कहते हैं कि पहली बार घर, परिवार के साथ इस तरह का समय बिताया है। बेटियां गार्गी और ओजस्वी को फास्ट फूड पसंद था, लेकिन अब घर का खाना खा रहीं हैं।

बड़ी बेटी तो पत्नी के साथ किचन में भी हाथ आजमा रही हैं। ऑनलाइन पढ़ाई हो रही है। पेटिंग का शौक भी पूरा हो रहा है। परिवार के साथ रामायण, महाभारत देखने का अपना आनंद है। देर शाम आवासीय परिसर में ही पत्नी के साथ बैडमिंटन भी खेल लेते हैं। मां व पूर्व सांसद सुभावती पासवान भी साथ रहती हैं।
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विनय शंकर तिवारी, विधायक चिल्लूपार - फोटो : अमर उजाला।
चिल्लूपार से बसपा विधायक विनय शंकर तिवारी की क्षेत्रवासियों की समस्याओं पर निगाह है। जैसे ही दिक्कत की सूचना मिलती है, वैसे ही अफसर या फिर अपने सहयोगियों से बात करके समाधान कराते हैं। उनका कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय आपदा है।

सरकार, स्वास्थ्य विभाग ने जो तय किया है, उसका अनुपालन सभी को करना चाहिए। सामाजिक दूरी ही कोरोना से बचाव की सबसे बड़ी दवा है। क्षेत्र में जाना हो तो  व्यवस्था बिगड़ेगी। हर समस्या का समाधान अब घर पर ही बैठकर किया जा सकता है। पत्नी रीता तिवारी, बेटी डॉ कौशिकी तिवारी और बेटा कंदर्प शंकर तिवारी लखनऊ में हैं। संकट में विधायक की अपनी जिम्मेदारी होती है, इसलिए गोरखपुर में ही जमे हैं।
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