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मनीष गुप्ता हत्याकांड: एसआईटी ने दागे 200 सवाल, उलझ गए हत्यारोपी, बोलते रहे- हम बेगुनाह

Mon, 11 Oct 2021 02:35 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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मनीष गुप्ता हत्याकांड। - फोटो : अमर उजाला।
कारोबारी मनीष गुप्ता की मौत के मामले में पकड़े गए मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और चौकी इंचार्ज रहे अक्षय मिश्रा से एसआईटी ने करीब 200 सवाल पूछे। कई सवालों पर आरोपी उलझ गए, लेकिन खुद को बेगुनाह बताते रहे। शाम पांच बजे से लेकर देर रात 11:25 बजे तक की गई पूछताछ में एसआईटी ने बयान दर्ज किए। आरोपियों ने एसआईटी के अधिकतर सवालों का जवाब दिया है, लेकिन होटल के कमरे की सफाई और मेडिकल कॉलेज में दो पर्चे बनवाने व मानसी से मेडिकल कॉलेज ले जाने में हुई देरी जैसे कई सवालों पर चुप्पी साध ली। जीडी में दर्ज झूठ के सवाल पर भी आरोपी अचकचा गए और सही जवाब नहीं दे पाए।

जानकारी के मुताबिक, एसआईटी ने पुलिस अफसरों को दिए गए झूठे बयान के बारे में भी जेएन सिंह व अक्षय मिश्रा से पूछताछ की है। इस पर दोनों ने बताया कि दशहरा के मद्देनजर जांच के लिए गए थे। एक ही कमरे में तीन अलग-अलग पते वाले लोगों के ठहरे होने पर शक हो गया था। इस कारण पूछताछ के लिए अंदर चले गए। दोनों आरोपियों को साथ में बैठाकर पूछताछ कर रही एसआईटी ने देरी की वजह भी पूछी।
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हत्यारोपी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा व मनीष की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला।
इस पर दोनों पहले तो समय से जाने की बात कहे और फिर बताए कि सड़क निर्माण की वजह से जाम लगा था, जिस वजह से थोड़ी देरी हो गई। यह भी बताए कि अगर उनका मकसद मनीष की हत्या करना होता तो मानसी अस्पताल लेकर क्यों जाते? आरोपियों ने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि मनीष शराब के नशे में था और एक परिचित से बातचीत के दौरान जब उससे आईडी मांगी तो वह लड़खड़ा कर गिर गया। इसी वजह से उसे गंभीर चोट आई थी। चोट लगने पर उसे पुलिस ने बचाने के लिए जो हो सकता था वह किया था। मनीष को बेहतर इलाज के लिए मानसी अस्पताल ले गए थे। फिर मेडिकल कॉलेज भी लेकर गए थे, मगर उसकी मौत हो गई। जांच कर रही एसआईटी ने आरोपियों का एक-एक बयान दर्ज कर लिया है। हर सवाल का जवाब जानने की कोशिश आरोपियों से की गई है।
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रामगढ़ताल थाने के बाहर तैनात पुलिस। - फोटो : अमर उजाला।
थाने के बाहर लगा दी थी भारी फोर्स-पीएसी
रामगढ़ताल थाने के बाहर मीडिया और आम लोगों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए भारी फोर्स की तैनाती कर दी गई थी। रात बढ़ने के साथ ही फोर्स भी बढ़ती रही। पुलिस लाइंस से अतिरिक्त फोर्स मंगाने के साथ ही पीएसी बल भी तैनात किया गया था। मकसद यही था कि भीड़ के बीच आरोपित पुलिस वालों को कोर्ट या जांच को कहीं ले जाना हो तो आम लोग आक्रामक न होने पाएं।
 

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मनीष गुप्ता हत्याकांड के आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूछताछ करने जाती एसआईटी। - फोटो : अमर उजाला।
बंद कर दी गई थी थाने की लाइट
रामगढ़ताल थाने के जिस कमरे में पूछताछ हो रही थी उसकी लाइट बंद कर दी गई थी। हालांकि अंधेरे में भी कमरे के अंदर की गतिविधि नजर आ रही थी। कुछ देर के लिए तो बाहर की भी लाइट बंद कर दी गई थी, जिससे कई सवाल उठने लगे थे।  
 
...फिर की गई अलग-अलग पूछताछ
आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और अक्षय मिश्रा से एक साथ पूछताछ करने के बाद एसआईटी ने दोनों को अलग-अलग कर पूछताछ की है। दोनों के दिए गए जवाब का एसआईटी मिलान कर रही है। अलग-अलग करने के बाद बोले गए झूठ पर एसआईटी ने सवाल किया है।
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इस वजह से रात में पेशी
अधिवक्ताओं के बीच आक्रोश होने की आशंका और रिमांड पाने की चाह में अफसरों ने रविवार रात ही आरोपितों को कोर्ट में पेश करने का फैसला किया। अफसरों ने अनुरोध कर विशेष न्यायालय में पेश करने की अनुमति मांगी थी। थाने में ही मेडिकल कराने के बाद सीधे कोर्ट के लिए रात में लेकर पुलिस टीम चली गई।
 
कुछ इस तरह चला घटनाक्रम
  • शाम 5 बजे : इंस्पेक्टर राणा देवेंद्र की टीम ने अमर उजाला तिराहा से आरोपित दो पुलिस वालों को दबोच लिया।
  • शाम 5:10 बजे : गिरफ्तार करने वाली टीम आरोपितों को लेकर रामगढ़ताल थाने पहुंची।
  • शाम 5:15 बजे : एसएसपी ने जांच कर रही एसआईटी कानपुर को पकड़े जाने की सूचना दी।
  • शाम 6 बजे : एसआईटी के सदस्य रामगढ़ताल थाने पहुंचे और पूछताछ शुरू की।
  • शाम 6:55 बजे : एसआईटी के प्रभारी आनंद प्रकाश भी रामगढ़ताल थाने पहुंचे।
  • रात 11:25 बजे : कस्टडी के बीच में आरोपितों को स्पेशल कोर्ट में पेश करने को ले गई पुलिस।
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