गोरखनाथ खिचड़ी मेला।
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सूर्य को ऐसे दें अर्घ्य
ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, मकर संक्रांति पुण्यकाल में पवित्र नदियों में स्नान करके एक तांबे के लोटे में शुद्ध जल लेकर उसमें रोली, अक्षत, लाल पुष्प, तिल और गुड़ मिलाकर पूर्वा दिशा की ओर मुख करके खड़े हो जाएं, दोनों हाथों को ऊपर उठाकर सूर्यदेव को श्रद्धापूर्वक गायत्री मंत्र या ‘ॐ घृणि सूर्याय नम: श्री सूर्य नारायणाय अर्घ्यं समर्पयामि।’ मंत्र का जाप कर अर्घ्य दें।
तिल का है विशेष महत्व
ज्योतिषाचार्य मनीष मोहन के अनुसार, मकर संक्रांति में तिल का विशेष महत्व है। इस दिन पुण्यकाल में तिल के तेल की मालिश, तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल का हवन, तिल से तर्पण, श्वेत तिल युक्त वस्तुओं का दान और सेवन करने से पूर्व जन्म के पाप नष्ट हो जाते हैं। धर्म सिंधु के अनुसार, श्वेत तिल से देवताओं का और काले तिल से पितरों का तर्पण करना चाहिए। मकर संक्रांति के दिन भगवान शिव के मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए।