गोरखपुर महोत्सव
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सूरज मिश्रा ब्यास ने ‘नाथों के नाथ हईं बाबा गोरखनाथ’, विजय शंकर विश्वकर्मा ने ‘हवे खिचड़ी के मेला मशहूर भाईजी’, सुनाकर माहौल में भक्ति की मिठास घोली। मनोज मधुर ने ‘परदेशिया के बिना रहलो न जाला’ गीत प्रस्तुत किया। सुशीला उपाध्याय ने ‘खोली के केवड़िया धनिया झांकेली दुवरिया’, बृजबिहारी दुबे ने ‘जहां गंगा जमुना के निर्मल धार’ गीत के माध्यम से उपस्थित दर्ज कराई।
पिंटू प्रतिम ने ‘पियवा गइले कलकत्ता’, रंजना श्रीवास्तव ने ‘का सखी आपन बताई, बलम अंग्रेजी बोले’ गीत से दर्शकों को मुग्ध कर दिया। रंजना राय ने ‘रंगी सारी गुलाबी चुनरिया’ गीत सुनाया। इस दौरान प्रतिभागियों को महोत्सव समिति की ओर से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम के आयोजन में लोक गायक राकेश श्रीवास्तव, हरि प्रसाद सिंह, शरदमणि, डॉ. मनोज गौतम, त्रिपुरारी मिश्रा, उत्तम मिश्रा, सुबोध श्रीवास्तव, अखिलेश मिश्रा आदि की महत्वपूर्ण भूमिका रही।