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पांच महीने के कोरोना काल में इतना बदल गया महराजगंज, तस्वीरें देखकर नहीं होगा यकीन

Wed, 26 Aug 2020 08:50 AM IST
vivek shukla संजय कुमार पांडेय, महराजगंज।
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Indo nepal border - फोटो : अमर उजाला।
पांच माह के कोरोना काल में महराजगंज जिले में बहुत कुछ बदल गया है। विपरित हालात में लोगों ने लड़ना सीखा। वहीं प्रशासन की ओर से संसाधनों को मजबूत कर लोगों को सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया। 23 मार्च को लॉकडाउन हुआ तो सब कुछ ठहर गया। जिंदगी घरो में कैंद होकर रह गई। इसके बाद विपरित हालात से जूझते हुए लोगों का जनजीवन सामान्य हुआ। लेकिन इतने अंतराल में रहन-सहन, खान-पान, मिलने-जुलने, आने-जाने समेत अन्य दिनचर्या एकदम बदल गई।
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महराजगंज सक्सेना चौक। - फोटो : अमर उजाला।
अब बदला गया सक्सेना चौक का नजरा
महराजगंज शहर में 23 मार्च से पहले भीड़ हुआ करती थी। सक्सेना चौक पर दुकानों पर लोग ज्यादा दिखते थे। अक्सर यहां लोगों को जाम से जूझना पड़ता था। उपेंद्र जायसवाल कहते हैं कि अब तो सड़क पर ज्यादा भीड़ नहीं दिखती है। लोग जरूरत पड़ने पर ही बाहर निकलते हैं। कोरोना से दिनचर्या अब पूरी तरह से बदल गई है। मास्क लगाना और सैनिटाइजर का प्रयोग करना अब तो दिनचर्या में शामिल हो गया है।
 
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महराजगंज दुर्गा मंदिर। - फोटो : अमर उजाला।
दुर्गा मंदिर पर दूर से दर्शन करते श्रद्धालु
शहर का दुर्गा मंदिर कभी श्रद्धालुओं से गुलजार हुआ करता था। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां दुर्गा का दर्शन करने के लिए आते थे। लेकिन अब यहां श्रद्धालु दूर से ही पूजापाठ कर चले जाते हैं। मंदिर के बाहर बल्ली लगाकर घेरा गया है। अनूप टिवड़ेवाल ने बताया कि कोरोना काल से पहले मां का दर्शन करने के लिए मंदिर में अंदर प्रवेश करता था। लेकिन अब ऐसा नहीं है। दूर से दर्शन करना पड़ता है।

 

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महराजगंज जिला अस्पताल। - फोटो : अमर उजाला।
अस्तपाल की ओपीडी में नहीं दिखते मरीज
कोरोना से एक सबसे बड़ा बदलाव आया है। लॉकडाउन के पहले जहां अस्पताल की ओपीडी में भीड़ उमड़ती थी। वह भीड़ अब नहीं दिखती है। छोटी मोटी बीमारियों से लड़ने के लिए लोग अब स्वयं सक्षम हैं। घर पर घरेलू उपचार कर लोग अब स्वास्थ्य के प्रति ध्यान देने लगे हैं। व्यवसायी आत्माराम गुप्त कहते हैं कि पहले हल्की तबीयत खराब होती थी, तो लोग सीधे अस्पताल पहुंचते थे। अब वैसी बात नहीं है। अब तो गंभीर होने पर ही लोग डॉक्टर के पास जाते हैं।

 
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महराजगंज बस स्टैंड। - फोटो : अमर उजाला।
बस में बैठने के लिए नहीं रहती होड़
महराजगंज शहर के बस स्टेशन पर गुजरे वक्त में बस में बैठने के लिए होड़ लगी रहती थी। बसे भी यात्रियों से खचाखच भर जाती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं है। यहां भी ज्यादा बदलाव आया है। बस में बैठने के लिए अब लोग स्वयं ही दूरी बनाकर रहते हैं। स्टेशन प्रभारी केपी नायक ने बताया कि अब तो सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए बस को सैनिटाइज किया जाता है। स्टेशन पर यात्रियों के लिए आटोमेटिक सैनिटाइजर मशीन लगाया गया है। साथ ही छह रुपये में मास्क यात्रियों के लिए उपलब्ध है।

 
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महराजगंज स्टेडियम। - फोटो : अमर उजाला।
खिलाडियों से गुलजार रहता था स्टेडियम
लॉकडाउन से पहले स्टेडियम खिलाडियों से गुलजार रहता था। यहां खेल गतिविधियां होती रहती थी। सुबह शाम खिलाड़ी यहां अभ्यास करने आते थे। कोरोना के वजह से यहां रौनक नहीं है। स्टेडियम सुना रहता है। सिर्फ अधिकारी एवं कर्मचारी ही जरूरी कार्यो को निपटाने में लगे रहते हैं। ताइक्वांडो एक्सपर्ट अभिषेक विश्वकर्मा ने बताया कि अब ऑनलाइन अभ्यास कराने पर जोर है। सामूहिक रूप से कोई खेल गतिविधि नहीं हो रही है।

व्यवस्था को मजबूत करने का हुआ प्रयास-डीएम
जिलाधिकारी डॉ. उज्ज्वल कुमार ने कहा कि कोरोना काल में कम संसाधनो में बेहतर कार्य करने की सीख मिली। व्यवस्थाओं को मजबूत किया गया। 400 बेड का कोविड अस्पताल पुरैना में संचालित है। कोविड एल टू श्रेणी में महिला अस्पताल को रखा गया है। यहां 100 बेड है। 100 ऑक्सीजन बेड लगाने की प्रक्रिया चल रही है। कोविड के नियम का पालन करते हुए सभी जरूरी कार्य किए जा रहे हैं।
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