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आसपास के जिलो से आते हैं श्रद्धालु
सावन माह में झूलोत्सव का आयोजन होता है। पांच दिन तक मंदिर परिसर में मेला चलता है। इस बीच जिले से ही नहीं गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, सिद्धार्थनगर, वाराणसी आदि जिलों से श्रद्धालु मेला देखने के लिए आते हैं। पांच दिनों तक रात्रि में प्रवचन व रेडियो, दूरदर्शन कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए जाते हैं।
अनुष्ठान के बाद हुई थी बारिश
बुजुर्ग बताते हैं कि वर्ष 1932 में क्षेत्र में बरसात न होने के कारण फसल सूख गई थी। क्षेत्र के लोग मठ के छठवें मठाधीश नारायण रामानुज दास के शरण में आए। उनकी विनती पर महंत ने भगवान के गर्भगृह के समक्ष अन्न जल त्याग कर अनुष्ठान पर बैठ गए। अनुष्ठान के तीसरे दिन बरसात हुई और कुछ दिन में चारों ओर हरियाली छा गई।
मुराद पूरी हुई तो कमरा बनवाया
करीब 100 वर्ष रहने घुघली क्षेत्र के भरवलिया निवासी भुलाई मिश्र ने यहां आकर भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना की। इसके बाद उनके घर पुत्र पैदा हुआ। उन्होंने मंदिर में ही एक कमरे का निर्माण करवाया था।