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लॉकडाउन के 54 दिनों में शहर का कुछ ऐसा रहा हाल, ठहरे, चले अब दौड़ने की उम्मीद

Sun, 17 May 2020 05:02 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना के दस्तक के साथ 22 मार्च से शुरू हुए लॉकडाउन में ठप हो गई जिंदगी की गाड़ी, लॉकडाउन 2.0-3.0 से होते हुए 18 मई को शुरू होने वाले चौथे चरण के लॉकडाउन में गति पकड़ने लगेगी। महीनों से घरों में कैद कई लोगों को यह सोचकर ही रोमांच होने लगा है कि शायद अब नियंत्रणों के बीच ही सही जिंदगी की अब गाड़ी पटरी पर तो आएगी।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला
देश में कोरोना की दस्तक के साथ ही शुरू हुए लॉकडाउन के पहले चरण के 21 दिन तक जिंदगी ठप सी हो गई थी। स्कूल, दफ्तर, मॉल, बाजार, पार्क, सड़कें सब सूने पड़ गए। कोरोना से बचाव में लगे सरकारी तंत्र और कुछ निरंकुश लोगों को छोड़ दें तो कोई घर की दहलीज तक नहीं लांघ सका।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के दूसरे चरण (19 दिन) में सरकारी दफ्तर खुल गए। विकास परियोजनाएं शुरू हुईं तो आम आदमी की उम्मीदें भी जगीं। तीसरे चरण (14 दिन) में आम आदमी के लिए कई जरूरी सेवाओं से जुड़ी छूट मिली तो जिंदगी थोड़ी सामान्य होने लगी। निराशा टूटी। उम्मीदें जगीं। लोग सड़कों पर निकले। उद्योग-धंधे, कल-कारखानों की चिमनियों से कई दिन बाद धुआं निकला।

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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
उम्मीद है कि अब 18 मई से चौथे चरण में कुछ नियंत्रणों के बीच जिंदगी की गाड़ी गति पकड़ने लगेगी। केंद्र और प्रदेश सरकार की तरफ से इसके संकेत भी मिल चुके हैं। माना जा रहा अब रोजमर्रा की जिंदगी न केवल पटरी पर आ जाएगी, बल्कि इसे गति भी मिलेगी।

सरकार के साथ ही लोग भी अब यह मान चुके हैं कि जीवनशैली में बदलाव लाना जरूरी है, ताकि हाथ पर हाथ धरे बैठे रहने के बजाए कोरोना संकट के बीच ही जिंदगी को रफ्तार दी जा सके।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला
चौखट तक पहुंची सुविधाएं, हर जरूरतमंद की मिटी भूख  
प्रशासनिक मशीनरी की ठोस रणनीति ने लॉकडाउन के बीच तमाम तरह की दुश्वारियों का सामना कर रहे लोगों को राहत दी। सब्जी, दूध या फिर राशन सामग्री। हर सुविधा लोगों के घरों की दहलीज तक पहुंची। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट गौरव सिंह सोगरवाल की पहल पर जिले में शुरू हुए ऑनलाइन होम डिलीवरी पोर्टल दूसरे जिलों के लिए भी नजीर बने। पीएमओ और उप्र शासन ने भी ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के इस प्रयास को सराहा।
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जीडीए
जीडीए: पीएम आवासों का आवंटन शुरू, स्टेडियम लटका
20 अप्रैल को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) का ताला खुला तो प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवासों के आवंटन की धनराशि जमा करने की प्रक्रिया शुरू हुई तो पत्रकारपुरम के आवासों के आवंटन की भी प्रक्रिया चल पड़ी है।

हालांकि लॉकडाउन से शासन और प्राधिकरण की कई परियोजनाएं लटक भी गईं। खोराबार में सेटेलाइट टाउनशिप और मानबेला में इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम की कवायद अभी कागजों तक ही सिमटी रह गई है।
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खाद कारखाना - फोटो : अमर उजाला
खाद कारखाना: बड़ी मशीनें पहुंची, काम में तेजी
एक महीने काम बंद रहने की वजह से एचयूआरएल द्वारा बनाए जा रहे खाद कारखाने का काम थोड़ा प्रभावित जरूर हुआ मगर छूट मिलने के बाद फिर से निर्माण कार्य ने रफ्तार पकड़ ली है। ज्यादातर बड़ी मशीनें कारखाना परिसर में पहुंच चुकी है।

एचयूआरएल के मुताबिक दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा, जबकि फरवरी 2021 में खाद बननी शुरू हो जाएगी। उधर, लॉकडाउन के बीच ही कारखाने का निर्माण कार्य फिर से शुरू हुआ तो 700 से अधिक स्थानीय मजदूरों को काम भी मिला।

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Gorakhpur airport - फोटो : अमर उजाला
एयरपोर्ट: अब अगले साल ही तैयार हो सकेगा नया टर्मिनल
लॉकडाउन शुरू होने के साथ ही गोरखपुर से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद, कोलकाता और प्रयागराज के लिए होने वाली सभी सात उड़ानें भी बंद हो गईं तो वहीं तीन मंजिले नए टर्मिनल को लेकर चल रही कवायद भी ठप हो गई। करीब 23 करोड़ से प्रस्तावित अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त इस टर्मिनल की अभी टेंडर प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो सकी। टर्मिनल के निर्माण में एक साल लगेंगे।

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प्रतीकात्मक फोटो।
स्मार्ट तरीके से शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई
लॉकडाउन में स्कूल, कालेजों और विश्वविद्यालयों में ई-पाठशाला की शुरुआत हुई है। शिक्षा जगत में यह एक नए युग का आरंभ माना जा रहा है। पहले चरण से यूपी बोर्ड, सीबीएसई और आईसीएसई के साथ परिषदीय विद्यालयों में भी ऑनलाइन पढ़ाई की शुरूआत हुई।

व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के नंबर को जोड़ा गया, फिर शिक्षकों की ओर से रोजाना उन्हें अध्ययन सामग्री और होमवर्क प्रदान किया गया। वीडियो और ऑडियो के माध्यम से टॉपिक को भी समझाया जा रहा है।

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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला
दो चरणों में शुरू हुआ राशन वितरण
कोई जरूरतमंद भूखा न रहे, इसके लिए सरकार ने दो चरणों में जिला पूर्ति विभाग को राशन वितरण का जिम्मा दिया। अंत्योदय कार्ड धारकों को निशुल्क तो पात्र गृहस्थी कार्ड धारकों को किफायती दरों पर राशन मुहैया कराया गया। ऐसे लाभार्थियों की संख्या जिले में 7.80 हजार के पास रही।

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उज्ज्वला योजना
तीन सिलिंडर देने के एलान से मिली राहत
उज्ज्वला के ढाई लाख लाभार्थियों के खाते में सरकार की ओर से सिलिंडर रिफिलिंग की धनराशि भेजी गई। अप्रैल, मई और जून तक लाभार्थियों के खाते में रकम भेजी जाएगी। पैसे खाते में आने के बाद लाभार्थी को सिलिंडर बुक करना होता है। जिसके बाद एजेंसी की ओर से सिलिंडर घर तक पहुंचाया जाता है।

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कमिश्नर जयंत नार्लिकर। - फोटो : अमर उजाला
कमिश्नर जयंत नार्लिकर ने बताया कि मंडल के सभी लोगों के स्वास्थ्य के साथ ही विकास परियोजनाओं और बाकी बचे उद्योगों को शुरू कराना हमारी प्राथमिकता है। मंडल में 14 हजार से अधिक उद्योग शुरू हो चुके हैं। लोगों को भी अपनी जीवनशैली में बदलाव लाना होगा। जब तक कोरोना से बचाव की वैक्सीन नहीं बन जाती, हमें सतर्कता बरतनी होगी।

सतर्कता से ही इस बीमारी के बीच हम आगे बढ़ सकेंगे। कार्य स्थल पर सोशल डिस्टेंसिंग, मास्क और सैनिटाइजर का इस्तेमाल अनिवार्य रुप से करना होगा। काफी छूट मिली है। शासन के निर्देशानुसार आगे और भी छूट के प्रावधान किए जाएंगे।
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gorakhpur news - फोटो : अमर उजाला।
50 दिन बचे रहे, तीन दिन में बदली तस्वीर
लॉकडाउन के 50 दिन तक गोरखपुर में कोरोना संक्रमण नियंत्रित था। लॉकडाउन के दूसरे चरण के अंत तक जिले में केवल तीन कोरोना पॉजिटिव थे, लेकिन महज तीन दिनों के अंदर प्रवासियों ने प्रशासन और स्वास्थ्य महकमे की नींद उड़ा दी। लॉकडाउन के 53 दिन पूरे होने पर मरीजों की संख्या 14 तक पहुंच गई है।
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