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जानिए कौन होता है दंडाधिकारी, जिसकी भूमिका में नजर आए सीएम योगी

Wed, 28 Oct 2020 08:59 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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कार्यक्रम में शामिल सीएम योगी आदित्यनाथ व संत समाज के लोग। - फोटो : अमर उजाला।
बीते दशहरे के दिन सीएम व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने दंडाधिकारी की भूमिका निभाई। इस दौरान पात्र देवता के रूप में गोरक्षपीठाधीश्वर की नाथ पंथ के योगेश्वरों द्वारा पूजा की जाती है। योगेश्वरों के विवाद को सुलझाने के लिए गोरक्षपीठाधीश्वर ने यह भूमिका निभाई। आइए जानते हैं कि कौन होता है दंडाधिकारी...
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सीएम योगी आदित्यनाथ हवन करते हुए। - फोटो : अमर उजाला।
रविवार को बतौर दंडाधिकारी सीएम योगी जो भी फैसला सुनाया, वह अंतिम व सर्वमान्य रहा। बाद में सभी योगेश्वरों को अंग वस्त्र व दक्षिणा देकर विदा किया गया। देश-दुनिया में नाथ पंथ के जितने भी अनुयायी हैं, उन सबके मुखिया गोरक्षपीठाधीश्वर होते हैं। अनुयायियों की जो भी समस्याएं होती हैं उनका समाधान गोरक्षपीठ यानी गोरखनाथ मंदिर में होता है।
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गोरक्षपीठाधीश्वर सीएम योगी आदित्यनाथ। (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला।
दशहरा के बाद जब पात्र देवता की पूजा होती है, तब अलग-अलग स्थानों से आए योगेश्वर जुटते हैं। यही रविवार की रात भी हुआ। गोरक्षपीठाधीश्वर ने दंडाधिकारी बनकर सबकी समस्याएं सुनीं। दंडाधिकारी के समक्ष वाराणसी से आए योगी रामनाथ, दिल्ली से आए योगी शांति नाथ, पीलीभीत के योगी शांतिनाथ, हरियाणा के योगी इंदरनाथ व झारखंड के योगी रुद्रनाथ सहित करीब 50 योगेश्वरों ने अपनी समस्याएं रखीं।

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माता रानी की पूजा करते सीएम योगी। - फोटो : अमर उजाला।
दंडाधिकारी ने एक-एक करके सबकी समस्याएं सुनीं, फिर फैसला सुनाया। जिन मामलों में तत्काल फैसला संभव नहीं था, उन मामलों के जल्द निराकरण का भरोसा भी दिलाया। मंदिर प्रबंधन के मुताबिक किसी योगेश्वर की ऐसी समस्या नहीं थी कि जिसमें नाथ पंथ से निष्कासन की नौबत आए। पात्र देवता की पूजा में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है।
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सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।
नाथ पंथ से निष्कासन है सबसे बड़ा दंड
जिस भी मठ के योगी को समस्या होती है तो वह उसे पात्र देवता यानी दंडाधिकारी के समक्ष रखते हैं। समस्या की समीक्षा की जाती है। जिसकी शिकायत होती है उसे समझाया जाता है। यदि शिकायत गंभीर है तो संबंधित को सजा के तौर पर नाथ पंथ से बाहर कर दिया जाता है। यह सबसे बड़ा दंड होता है। योगी की भाषा में इसे चिलम शाफी बंद करना कहते हैं। अगर निष्कासित व्यक्ति सुधर जाता है तो उसे दोबारा नाथ पंथ में जगह दी जाती है।
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