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कोरोना को धूल चटा, फिर जिंदगी की फील्ड पर उतरेगी टीम, अंतरराष्ट्रीय खेल दिवस पर खास संदेश दे रहे खिलाड़ी

Mon, 06 Apr 2020 03:08 PM IST
vivek shukla डिजिटल न्यूज डेस्क, गोरखपुर
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अपने घरों व हॉस्टल में प्रैक्टिस करते खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला
कोरोना महामारी ने खेलों की दुनिया को रोक दिया है। अक्सर फील्ड में घंटों कभी फिजिकल तो कभी गेम में नजर आने वाले ये खिलाड़ी लॉकडाउन की वजह से अपने-अपने घरों या हॉस्टल में रहकर अकेले प्रैक्टिस कर रहे हैं। इनका मानना है कि स्पोर्ट्स का मतलब स्वस्थ मन और तन होता है। जो स्वस्थ होते हैं वहीं खेल पाते हैं। कोरोना के खिलाफ जीवन की वैश्विक लड़ाई में हमें टीम इंडिया के रूप में भारत को विजयी बनाना है।

सामूहिक प्रयासों से ही लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। इस अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट्स डे पर हम सभी को शपथ लेने की जरूरत है कि हम कोरोना महामारी पर जीत हासिल करेंगे। सभी लोग लॉकडाउन के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग, हाथों की सफाई पर ध्यान देंगे। कोरोना को हराकर एक बार फिर जिंदगी की फील्ड पर उतरेंगे और देश के साथ अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को पूरा करेंगे।
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सीनियर हॉकी खिलाड़ी प्रीति दुबे। - फोटो : अमर उजाला
सामाजिक दूरी की लक्ष्मण रेखा को न करें पार
सीनियर हॉकी खिलाड़ी प्रीति दुबे कहती हैं- हमें सामाजिक दूरी की लक्ष्मण रेखा का पालन आवश्यक रूप से करना है। कोरोना की चेन को तोड़ने का यह एकमात्र विकल्प है। जिस तरह हॉकी के मैच में टीम वर्क होता है। वैसी है जिंदगी के मैच में भी टीम वर्क जरूरी है। घर पर रह कर ही प्रैक्टिस कर रही हूं। ये मेरा आत्मबल बढ़ाता है।
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सीनियर हैंडबाल खिलाड़ी मंजूला पाठक। - फोटो : अमर उजाला
कोरोना वारियर्स का हौसला बढ़ाएं, भागे नहीं
सीनियर हैंडबाल खिलाड़ी मंजूला पाठक का कहना है- एक घातक बीमारी से हमारा देश जूझ रहा है। हम लोग घरों में खुद को सुरक्षित रखकर अपना बचाव कर सकते हैं। मगर जरा उन डॉक्टर, पुलिस, जिला प्रशासन और मीडिया के साथियों के बारे में सोचिए जो विषम परिस्थितियों में भी आम जनता की भलाई के लिए काम कर रहे हैं। इनकी मदद करें और हौसला बढ़ाएं।

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सीनियर हॉकी खिलाड़ी दिवाकर राम। - फोटो : अमर उजाला
आम जनता भी व्यवस्था बनाए रखने में करे सहयोग
सीनियर हॉकी खिलाड़ी दिवाकर राम कहते हैं- लोगों की सुरक्षा के लिए ही उन्हें एकांत में रखा जा रहा है। सरकार दवा से लेकर रहने खाने की व्यवस्था कर रही है। ऐसे में आम जनता की भी ये जिम्मेदारी बनती है कि वो व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करे। अनजाने में आप अपने साथ, फिर परिवार और बाद में समाज के लिए खतरा बन जाएंगे। सही समय पर इलाज होने से कोरोना के दुष्प्रभाव को कम किया जा सकता है।

 
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पहलवान वैष्णवी सिंह। - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं
पहलवान वैष्णवी सिंह का कहना है कि- 130 करोड़ की आबादी वाले देश को कोरोना के खिलाफ लड़ाई के लिए लॉकडाउन के अलावा कोई विकल्प नहीं था। इसका एक सकारात्मक पहलू भी है। भागदौड़ की जिंदगी में परिवार के साथ समय बिताने का मौका नहीं मिलता था। पूरे परिवार के साथ इन पलों का आनंद ले रही हूं। घर की छत पर दो घंटे सुबह और शाम को कसरत करती हूं।


 
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राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी सीमा कन्नौजिया। - फोटो : अमर उजाला
अमेरिका को भी घुटने पर लाया कोरोना
राष्ट्रीय ताइक्वांडो खिलाड़ी सीमा कन्नौजिया कहती हैं- लॉकडाउन अपने खुद के बचने के लिए है। आपको अपने को बचाना है, अपने परिवार को बचाना है। कोरोना महामारी ने दुनिया के ताकतवर देश अमेरिका को भी घुटने पर ला दिया है। जो साधन और सुविधा के मामले में हमसे कहीं आगे हैं। मानवता के लिए पीएम की अपील का समर्थन करें। घरों में रहे खुद को स्वस्थ रखने के लिए योग की मदद लें। प्रतिरोधक क्षमता मजबूत बनाएं।
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