सूत्रों के मुताबिक, खाता खुलवाने वाले युवकों को 10 से 15 हजार रुपये देकर धंधेबाजा अपना रैकेट संचालित कर रहे हैं। खाता खोले जाने और उसमें रुपये आने के बीच इन युवाओं को लुभाने के लिए ये धंधेबाज उन्हें साथ लेकर नेपाल या उत्तराखंड घूमने चले जाते हैं। रुपये आते ही इनके खातों से निकासी कर लेते हैं। इनके इस अपराध के तरीकों पर केंद्रीय एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
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व्हाट्सएप पर युवाओं को बैंक खाते खोले जाने के लिए झांसा दे रहे धंधेबाज
- फोटो : स्त्रोत- सोशल मीडिया
ऑनलाइन ट्रेडिंग में धंधेबाजों ने तगड़ी सेंध लगा दी है। वे कम उम्र खासकर बेरोजगार युवाओं को लालच देकर लोगों को तो झटका दे ही रहे हैं, सरकार के राजस्व को तगड़ा चूना लगा रहे हैं। धंधेबाज, बेरोजगार युवाओं के खाते बैंक में खुलवा रहे हैं और इसमें हवाला के साथ काले धन को मंगवाकर मोटी कमाई कर रहे हैं।
बदले में इन्हें कमीशन दे देते हैं, जिससे वे भी खुश रहते हैं। बीते दिनों दिल्ली पुलिस ने सहजनवां इलाके में दो युवकों को गिरफ्तार कर निवेश के नाम पर करोड़ों की ठगी का पर्दाफाश भी किया है। आरोपियों ने 30 दिनों के भीतर 105 अलग-अलग स्थानों से लगभग 11 करोड़ रुपये की लेनदेन की थी।
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न करें ये गलतियां, वरना बंद हो सकता है बैंक खाता
- फोटो : istock
सूत्रों के मुताबिक, खाता खुलवाने वाले युवकों को 10 से 15 हजार रुपये देकर धंधेबाजा अपना रैकेट संचालित कर रहे हैं। खाता खोले जाने और उसमें रुपये आने के बीच इन युवाओं को लुभाने के लिए ये धंधेबाज उन्हें साथ लेकर नेपाल या उत्तराखंड घूमने चले जाते हैं। रुपये आते ही इनके खातों से निकासी कर लेते हैं। इनके इस अपराध के तरीकों पर केंद्रीय एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पता चला कि नेटवर्क से जुड़े युवाओं के खाते सिर्फ निजी बैंकों में ही खुलवाए जाते हैं। खाता खोले जाने के बाद इनके आधार और पैन के सहारे केवाईसी करवा दी जाती है।
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गलत करीकेसे बैंक खातों का संचालन ले लेते हैं
- फोटो : istock
खाता खोले जाने में असली दस्तावेजों का ही इस्तेमाल किया जाता है। जिस बैंक में खाता खुलवाया जाता है, उसके ऑनलाइन बैकिंग एप को धंधेबाज अपने मोबाइल फोन में डाउनलोड कर लेते हैं। इसमें बैंक से मिले किट के आधार पर डिटेल एप में भरने के बाद लॉगिन कर लेते हैं। इसके बाद ऐसे ही फर्जी आधार कार्ड से फर्जी मोबाइल नंबर निकाल लेते हैं।
यह भी पता चला कि बैंकिंग एप से उस खाते में जाकर असली खाताधारक के मोबाइल नंबर को हटाकर वहां अपना फर्जी मोबाइल नंबर फीड कर देते हैं। इससे खाते में आने-जाने वाले रुपयों की पूरी ऑनलाइन डिटेल उनके पास पहुंच जाती है। फिर खातों को प्रयोग शुरू हो जाता है।
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बैंक के रुपयों का हेरफेर
- फोटो : istock
बैंककर्मियों भी होती है मिलीभगत
सूत्रों की मानें तो इस नेटवर्क में बैंककर्मियों की भी मिलीभगत होती है। दरअसल, बैंक का नियम है कि खाताधारक को ही बैंक का किट दिया जाता है, लेकिन सिर्फ मुनाफे के नाम पर जिनके खाते खोले जाते हैं, उन्हें किट की जानकारी ही नहीं होती। ऐसे में खाता खुलवाने के बाद बैंककर्मी ही धंधेबाजों को ये किट दे देते हैं। इस किट में एटीएम और उसका पासवर्ड होता है। इन पासवर्ड से ये बैंकों के रुपये निकाल लेते हैं।
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व्हाट्सएप ग्रुप संचालन करने वाला ब्रांच ऐसे ही खेल भेजता है, ऑनलाइन किया गया पंजीकरण
- फोटो : स्त्रोत- सूत्र
गेम्स के साथ निवेश के कई ग्रुप हो रहे संचालित
शहर में ऑनलाइन गेम्स और शेयर में निवेश के जरिये मुनाफा कमाने के लिए कई व्हाट्सएप ग्रुप संचालित होते हैं। अब धंधेबाजों ने अलग-अलग नंबर के व्हाट्सएप ग्रुप में मौजूद सट्टेबाजी में रुचि रखने वालों के नंबर जोड़ रखे हैं। महादेव एप की तरह अंबानी सट्टा बुक, रेड्डी अन्ना एप, एमडी 140 जैसे एक दर्जनभर से अधिक एप की आईडी का संचालन हो रहा है।
केवल 100 रुपये में पासवर्ड-आईडी लेकर ऑनलाइन सट्टेबाजी की जा रही है। सट्टेबाजी से जुड़े एक सूत्र ने बताया कि शहर में कई मोबाइल नंबरों पर महादेव सट्टा एप की आईडी बेची जा रही है। लीका क्लब, महादेव 30 ( 92383865..) महादेव ( 88882088..) सट्टा( 93732185..) नंबरों पर ऑनलाइन सट्टे की आईडी बेची जा रही है।
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साइबर ठगी
- फोटो : social media
दिल्ली जैसी ठगी हो चुकी है गोरखपुर में भी
ऑनलाइन ट्रेडिंग के बहाने मुनाफा कमाने का लालच देकर साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। राजघाट इलाके के हिंदी बाजार निवासी एक युवक को ट्रेडिंग के जाल में फंसाकर 9.50 लाख रुपये की जालसाजी का मामला सामने आया था। कपड़े के एक व्यापारी ने बताया कि उनके व्हाट्सएप नंबर को ऑस्क इन्वेस्टमेंट ग्रुप से जोड़ा गया। इसकी एडमिन प्रिया शर्मा थी।
उसकी बातों में आकर 16 अप्रैल 2025 को उसके दिए लिंक पर यूपीआई के माध्यम से 50,000 रुपये ट्रेडिंग के लिए भेज दिए। ये बढ़कर 54 हजार रुपये हो गए। उसी एप के माध्यम से उन्होंने चार हजार रुपये निकाले। इसके बाद 29 अप्रैल तक उनसे लगातार अलग-अलग दिनों में कुल 9.50 लाख रुपये जमा कराए गए। उन्होंने खुद और पत्नी के खाते से यह रकम भेजी थी। इसे निकालने के लिए उनसे 15 प्रतिशत और रुपये जमा करने के लिए कहा गया। तब उन्हें जालसाजी का अहसास हुआ।
साइबर अपराध पर टीमें काम कर रही हैं। अभी हाल में भी शहर के कुछ थानों से ऐसी शिकायत कर कार्रवाई कार्रवाई करवाने के बाद जेल भेजा गया था। बैंकों और खाताधारकों को भी ध्यान देना चाहिए। एक चूक उन्हें अपराधी बना सकती है:अभिनव त्यागी, एसपी सिटी