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गोरखपुर: बीआरडी में था हॉस्टल, राजकीय पॉलीटेक्निक में चलती थी क्लास

Tue, 01 Nov 2022 10:43 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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BRD - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज का इतिहास काफी गौरवशाली रहा है। 1972 में एक हॉस्टल से शुरू हुए बीआरडी का सफर आज 1,800 बेड तक पहुंच गया है। इतिहास की बात करें तो बीआरडी की शुरुआत गौतम छात्रावास से शुरू हुई थी। इसी छात्रावास में छात्र-छात्राएं और शिक्षक सभी रहते थे। एक छोटे से कमरे में प्रधानाचार्य का कार्यालय था। क्लास के लिए छात्र-छात्राओं को असुरन के राजकीय पॉलीटेक्निक में आना पड़ता था।

छात्र तो उस दौर में साइकिल से आ जाते थे, लेकिन छात्राओं का काफी मुश्किलें होती थीं। वे रिक्शा करके किसी तरह क्लास करने आती थीं। स्वर्ण जयंती के मौके पर बीआरडी मेडिकल कॉलेज के इतिहास के संबंध में जब प्रथम बैच के डॉक्टरों से वार्ता की गई तो उन्होंने अपनी यादें साझा कीं। पेश है बातचीत के अंश...

 
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डॉ. महेंद्र अग्रवाल। - फोटो : अमर उजाला।
सुबह साइकिल से आते थे क्लास करने : डॉ. महेंद्र अग्रवाल
शहर के जाने-माने हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. महेंद्र अग्रवाल बीआरडी मेडिकल कॉलेज के पहले बैच में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों में से एक हैं। डॉ. अग्रवाल ने बताया कि बीआरडी मेडिकल कॉलेज का सफर एक हॉस्टल से शुरू हुआ था। 50 विद्यार्थियों के बैच में 48 ने प्रवेश लिया था। उस दौर में मेडिकल कॉलेज रोड पर कोई भी साधन उपलब्ध नहीं था जिससे आवागमन हो सके। सभी छात्रों ने किसी तरह साइकिल की व्यवस्था कर रखी थी। उसी साइकिल से सुबह हॉस्टल से निकलकर असुरन के राजकीय पॉलीटेक्निक में क्लास के लिए आते थे। सुबह हल्का नाश्ता तो मिल जाता था। लेकिन, दोपहर के वक्त हॉस्टल का कर्मी पूड़ी-सब्जी लेकर आता था। बरसात के समय ज्यादा दिक्कत होती थी। पूरा रास्ता बरसात में पानी से भर जाता था। लेकिन, वे दिन यादगार हैं। सीमित संसाधन में हम लोगों ने पढ़ाई की। बीआरडी की देन है कि आज इस मुकाम पर खड़ा हूं।
 
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डॉ. रीना श्रीवास्तव। - फोटो : अमर उजाला।
अभिभावक बोले, बच्चे घर से कर लेंगे पढ़ाई, प्रधानाचार्य ने कर दिया मना: डॉ. रीना श्रीवास्तव
शहर की जानी-मानी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व बीआरडी मेडिकल कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रीना श्रीवास्तव भी मेडिकल कॉलेज के पहले बैच की छात्रा रही हैं। बताती है कि पहले बैच में 48 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। इनमें 12 विद्यार्थी ऐसे थे, जो गोरखपुर शहर के रहने वाले थे। सभी अभिभावकों ने एक हॉस्टल होने की वजह से तय किया कि बच्चे घर से ही क्लास कर लेंगे। इस पर उस वक्त पहले प्रधानाचार्य रहे डॉ. प्यारे लाल शुक्ला और पहले वार्डन डॉ. प्रभाकर सेठ ने अभिभावकों को इस फैसले को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की संख्या कम है, ऐसे में अगर सभी एक साथ नहीं रहेंगे तो पढ़ाई का माहौल अच्छा नहीं रहेगा। इसके बाद हम लोगों ने हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। हॉस्टल केवल रहने के लिए था। क्लास के लिए असुरन रिक्शे से आना पड़ता था। उसी पढ़ाई की देन है कि बीआरडी में नौकरी भी की और बच्चों को पढ़ाया।  

 

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BRD medical college - फोटो : अमर उजाला
दो विभाग से हुई थी शुरुआत
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की 1972 में केवल दो विभागों से शुरुआत हुई थी। इन विभागों में फिजियोलॉजी और एनाटॉमी शामिल थे। पहले साल जब परीक्षाएं हुईं तो दूसरे साल बॉयोकेमिस्ट्री विभाग की शुरुआत की गई। इसके बाद धीरे-धीरे विभाग बढ़ते गए। इन सबके बीच 1973-74 में राजेंद्र हॉस्टल की शुरुआत हुई, जिसमें छात्राओं के रहने की व्यवस्था शुरू हुई।

 
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : सोशल मीडिया।
मुख्यमंत्री होंगे स्वर्ण जयंती समारोह के मुख्य अतिथि
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के स्वर्ण जयंती समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आने की सहमति दे दी है। इसके बाद प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार, डीएम कृष्णा करूणेश, एसएसपी गौरव ग्रोवर ने शनिवार को कैंपस में पहुंचकर आयोजन स्थल का निरीक्षण किया। स्वर्ण जयंती समारोह आयोजन समिति के सचिव प्रो. अमित मिश्रा ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय से मुख्यमंत्री के आने की हरी झंडी मिल गई है। समारोह में उपमुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक, प्रमुख सचिव चिकित्सा शिक्षा आलोक कुमार भी शामिल हो सकते हैं। कार्यक्रम में बीआरडी से पढ़े करीब 1,000 डॉक्टर शामिल होंगे। समारोह आगामी पांच नवंबर को आयोजित होगा। इस मौके पर बीआरडी पर बनी एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाएगी। इसके साथ ही वर्ष 1997 बैच का रजत जयंती समारोह भी मनाया जाएगा।
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