डॉ. रीना श्रीवास्तव।
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अभिभावक बोले, बच्चे घर से कर लेंगे पढ़ाई, प्रधानाचार्य ने कर दिया मना: डॉ. रीना श्रीवास्तव
शहर की जानी-मानी स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ व बीआरडी मेडिकल कॉलेज की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. रीना श्रीवास्तव भी मेडिकल कॉलेज के पहले बैच की छात्रा रही हैं। बताती है कि पहले बैच में 48 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था। इनमें 12 विद्यार्थी ऐसे थे, जो गोरखपुर शहर के रहने वाले थे। सभी अभिभावकों ने एक हॉस्टल होने की वजह से तय किया कि बच्चे घर से ही क्लास कर लेंगे। इस पर उस वक्त पहले प्रधानाचार्य रहे डॉ. प्यारे लाल शुक्ला और पहले वार्डन डॉ. प्रभाकर सेठ ने अभिभावकों को इस फैसले को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की संख्या कम है, ऐसे में अगर सभी एक साथ नहीं रहेंगे तो पढ़ाई का माहौल अच्छा नहीं रहेगा। इसके बाद हम लोगों ने हॉस्टल में रहकर पढ़ाई की। हॉस्टल केवल रहने के लिए था। क्लास के लिए असुरन रिक्शे से आना पड़ता था। उसी पढ़ाई की देन है कि बीआरडी में नौकरी भी की और बच्चों को पढ़ाया।