फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

शोध से खुलासा: कोरोना से जंग में गोरखपुरवासी देश में सबसे ज्यादा मजबूत, खूब मिली एंटीबॉडी

Fri, 02 Sep 2022 04:33 PM IST
vivek shukla संतोष सिंह, गोरखपुर।
विज्ञापन
1 of 5
COVID-19 antibody - फोटो : ANI
कोरोना वायरस से जंग में गोरखपुरवासी देश में सबसे ज्यादा मजबूत पाए गए हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के शोध से पता चला है कि देश में सर्वाधिक प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबॉडी) गोरखपुरवासियों की है। 18 वर्ष से अधिक उम्र के शहरी व ग्रामीणों में 88 फीसदी प्रतिरोधक क्षमता मिली है। वहीं, 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों में 90 फीसदी प्रतिरोधक क्षमता पाई गई, जो कि श्रेष्ठ मानी जाती है।

कोरोना वायरस की चुनौती से निपटने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एम्स गोरखपुर, एम्स भुवनेश्वर, जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च पांडिचेरी व गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज असम को शोध की जिम्मेदारी दी थी। एम्स गोरखपुर के डॉक्टरों की टीम ने अप्रैल से दिसंबर 2021 के बीच शहरी और ग्रामीण के 25-25 क्षेत्रों से 2000 लोगों के खून के नमूने जुटाए। इन नमूनों की तीन चरणों में जांच हुई, फिर रिपोर्ट बनाकर विश्व स्वास्थ्य संगठन व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी है। शोध के बाद जो नतीजे सामने आए, वे चौंकाने वाले हैं।

 
विज्ञापन

2 of 5
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTi
पता चला है कि जिन चार चिकित्सा संस्थानों को शोध की जिम्मेदारी दी गई थी, उन सबमें कोरोना के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता गोरखपुरवासियों में सबसे ज्यादा है। 18 वर्ष से कम उम्र के जिन लोगों ने वैक्सीन नहीं ली थी, उनमें भी 90 फीसदी प्रतिरोधक क्षमता पाई गई। खास बात यह है कि ऐसे लोगों को कोरोना संक्रमण भी नहीं हुआ था। बिना वैक्सीन व कोरोना संक्रमण के ही प्रतिरोधक क्षमता बनी पाई गई। इस नतीजे को देखकर एम्स की टीम हैरान है।  
विज्ञापन

3 of 5
एंटीबॉडी परीक्षण - फोटो : social media
अच्छी एंटीबॉडी की वजह तलाशनी बाकी
एम्स की टीम ने कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी की जांच जरूर की थी, लेकिन यह पता नहीं लगाया था कि अच्छी एंटीबॉडी बनने की वजह क्या है? इस दिशा में काम चल रहा है। शोध टीम से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि अच्छी एंटीबॉडी बनने की वजह अच्छा खान-पान भी हो सकता है। गोरखपुर में प्रदूषण की मात्रा बहुत ज्यादा नहीं है। ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की दिनचर्या अच्छी रहती है।

 

4 of 5
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
गोरखपुर में इन क्षेत्रों से लिए गए खून के नमूने
शहरी क्षेत्र
वार्ड नंबर तीन का एमएमएमयूटी, वार्ड नंबर एक के दिबिया, वार्ड नंबर छह के राप्तीनगर-चार, वार्ड नंबर सात के राप्तीनगर-एक, वार्ड नंबर 11 के हुमायूंपुर-एन, वार्ड नंबर 14 के झरना टोला, वार्ड नंबर 15 के मोहदद्दीपुर, वार्ड नंबर 20 की आवास विकास कॉलोनी, वार्ड नंबर 26 के निजामपुर, वार्ड नंबर 29 के लोहियानगर, वार्ड नंबर 39 के धर्मशाला, वार्ड नंबर 53 के काजीपुर खुर्द, वार्ड नंबर 57 के मोहद्दीपुर, वार्ड नंबर 61 के अलीनगर, वार्ड नंबर 36 के बिछिया रेलवे कॉलोनी, वार्ड नंबर 60 के रुस्तमपुर, वार्ड नंबर 46 के दाउदपुर, वार्ड नंबर 65 के बड़गो, वार्ड नंबर 21 के बेतियाहाता, वार्ड नंबर पांच के एयरफोर्स क्षेत्र, वार्ड नंबर 52 के मियांबाजार, वार्ड नंबर 67 के शेषपुर, वार्ड नंबर 34 के शाहपुर, वार्ड नंबर 28 के जंगल सालिकराम और वार्ड नंबर 13 के शिवपुर सहबाजगंज    

ग्रामीण क्षेत्र
खोराबार के शिवपुर, झंगहा, बेलवार, पियासी, गहिरा व लक्ष्मीपुर। खजनी के भक्ता, कैंपियरगंज के जनकपुर, बसंतपुर, पिपराइच के ऊनौला व हरपुर, सरदारनगर के करमहां व डुमरीखास, जंगलकौड़िया के जंगलकौड़िया, रामपुर, नयनसर व सरहरी, चरगांवा के मोहनापुर, जंगलधूषण, मानीराम, सहजनवां के डोमहर, उज्जिखोर, बैसिया व ब्रह्मपुर के बेलवा।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
गोरखपुर एम्स। इनसेंट में निदेशक डॉ सुरेखा किशोर। - फोटो : अमर उजाला
गोरखपुर एम्स कार्यकारी निदेशक डॉ सुरेखा किशोर ने कहा कि कोरोना के खिलाफ गोरखपुरवासियों में सर्वाधिक प्रतिरोधक क्षमता मिली है। 2000 लोगों के खून के नमूने लिए गए और तीन चरणों में जांच करके रिपोर्ट तैयार की गई। यह रिपोर्ट विश्व स्वास्थ्य संगठन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी जा चुकी है। 18 वर्ष से ज्यादा उम्र के जिन लोगों के खून के नमूने लिए गए थे, उनमें से कुछ को कोरोना हुआ था। कुछ लोगों ने वैक्सीन भी ली थी। लेकिन, 18 वर्ष से कम उम्र के लोगों ने न वैक्सीन ली थी और न ही उन्हें कोरोना संक्रमण हुआ था। इसके बावजूद प्रतिरोधक क्षमता जबरदस्त मिली है।

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें