गोरखपुर के पीपीगंज क्षेत्र के भुईधरपुर गांव में कलावती हत्याकांड की गुत्थी सुलझने के बाद जो सच सामने आया, उसने सबको झकझोर दिया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपी खुशी ने बताया कि दादी कलावती की हत्या के बाद खून से सने अपने हाथ देख पहले तो वह सिहर उठी फिर उसे मां का चेहरा याद आ गया। उसे यह अहसास हुआ कि उसने अपनी मां के अपमान का बदला ले लिया।
दरअसल, 15 साल पहले जब खुशी तीन साल की थी तो परदेसी यादव ने उसकी मां उतरा से दूसरी शादी कर दोनों को घर लाया था। खुशी ने पुलिस की पूछताछ में बताया कि दादी कलावती लगातार उसे व उसकी मां को ताने देती थीं।
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दादी की हत्या( फाइल फोटो) की आरोपी बहु और पोती
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मां के प्रति अपमानजनक शब्द कहतीं और घर का माहौल बिगाड़ देती थीं। जब भी मां को रोते देखती थी, दिल टूट जाता था। कई बार खुद को संभालने की कोशिश की, पर जब बर्दाश्त के बाहर हो गया तो ठान लिया कि न वो (दादी कलावती) रहेंगी, न घर में फसाद होगा।
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हत्यारोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खुशी ने बताया कि वारदात के एक दिन पहले भी कलावती ने उसे व उसकी मां के चरित्र पर तरह-तरह के आरोप लगाए थे। तब उसका गुस्सा काबू से बाहर हो गया। कलावती की बातों से नाराज होकर उसने गड़ासे से हमला कर दिया। हत्या के बाद खून से सने अपने हाथों को देखकर वह सिहर उठी। फिर मां का चेहरा सामने आते ही उसे लगा कि उसने वर्षों के दुख से मुक्ति दिला दी है।
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हत्यारोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उधर, खुशी की मां उतरा यादव ने कबूल किया कि जब बेटी खून से लथपथ लौटी तो वह सहम गई थी। जिन हाथों में मेहंदी के सपने सजा रही थी, उसे खून से सना देखकर टूट गई। बेटी को इस कलंक से बचाने के लिए शव को ठिकाने लगाने में उसकी मदद की।
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खुलासा करने से पहले मौके पर पुलिस की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
खता घरवालों की, सजा पड़ोसी को...यातनाओं को याद कर सिहर जाता है राकेश
भुईधरपुर में कलावती हत्याकांड का पर्दाफाश भले ही हो चुका है, लेकिन जांच के दौरान पुलिस की ज्यादती ने पड़ोसी राकेश यादव को जिंदगीभर का दर्द दे दिया है। हत्या के रहस्य को सुलझाने में पुलिस ने पड़ोस के राकेश यादव को पकड़ लिया। पिता का आरोप है कि पुलिस ने पूछताछ के दौरान बेटे को बर्बर यातनाएं दीं। बेटा अब भी उन यातनाओं को याद कर सिहर उठता है।
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घटना का खुलासा करते हुए
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
राकेश यादव के पिता राजमन यादव के मुताबिक, बेटे को बार-बार थाने बुलाकर घंटों पूछताछ की गई। जब वह कुछ न बता सका तो पुलिसकर्मियों ने उसके साथ सख्ती की। बेटे के सिर, हाथ और पैरों पर चोट के निशान हैं। अब उसका इलाज करा रहे हैं।
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घटनास्थल पर शव मिलने पर जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में तंत्र-मंत्र और बली की आशंका को लेकर पुलिस तरह-तरह का शक कर रही थी। इसी शक में पुलिस बेटे को पकड़कर थाने ले गई। तमाम यातनाओं के बाद भी उसने जुर्म कबूल नहीं किया, क्योंकि वह निर्दोष था। उनका कहना है कि करीब तीन दिन तक पुलिस ने उसे थाने में बैठाए रखा।
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खुलासा करने से पहले मौके पर पुलिस की टीम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
पुलिस का नाम सुनकर लगता है डर
पीड़ित राकेश ने बताया- पुलिस का नाम सुनकर डर लगता है। मैंने ठान लिया है कि दोबारा कभी किसी मामले में थाने नहीं जाऊंगा। वहीं गांव के लोग भी पुलिस की इस कार्यशैली से नाराज हैं। इस घटना के बाद भुईधरपुर में चर्चा है कि हत्या का सच भले सामने आ गया हो, पर पुलिस की ज्यादती ने सबको डरा दिया है।
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gorakhpur murder
- फोटो : अमर उजाला
खुशी और उसकी मां ने हत्या के बाद खून के निशान मिटाने की कोशिश की। यहां तक कि गड़ासे को गोबर में छिपा दिया। जांच के दौरान मिले सबूतों ने मां-बेटी दोनों को बेनकाब कर दिया।-जितेंद्र श्रीवास्तव, एसपी नार्थ
एक्सपर्ट कमेंट: युवाओं में बढ़ रहा अवसाद घातक
बच्चों का मन बहुत कोमल होता है, कोमल मन पर लगातार आघात से अवसाद उत्पन्न होता है। अगर कोई लंबे समय से कटाक्ष करता आ रहा है तो उसके प्रति मन में हमेशा गलत भाव आते हैं। सही समय से इसका इलाज ना होने के कारण कुंठा हो जाती है। जब हार्मोनल विकास होता है, यह कुंठा और भी ज्यादा प्रबल हो जाती है और कही ना कही हिंसक प्रवृत्ति को जन्म देता है। जहां तक वारदात करने वाली लड़की की बात है तो वह भी लंबे समय से ऐसे अवसाद, कुंठा से गुजर रही थी। उसके भीतर भी कुंठा इस कदर बढ़ गई हो गई होगी कि वह अपना आपा खो बैठी होगी। डॉ. आकृति पांडेय, मनोवैज्ञानिक