गोरखपुर खाद कारखाना।
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काफी छोटा होगा यूरिया का आकार, मिट्टी में तुरंत घुल जाएगा
एचयूआरएल के अधिकारियों के मुताबिक, यूरिया के आकार को लेकर देश में जो मानक तय हैं, उसके मुताबिक, यूरिया के दाने 0.3 एमएम से अधिक नहीं होने चाहिए। गोरखपुर खाद कारखाने का प्रिलिंग टावर दुनिया के खाद कारखानों की तुलना में सबसे ऊंचा होने की वजह से यहां 0.2 एमएम के दाने बनेंगे। दानों का आकार छोटा होने से मिट्टी में पड़ते ही तुरंत घुल जाएंगे, जिसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा।