सहजनवां विधानसभा क्षेत्र से प्रदीप शुक्ल जीते।
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सहजनवां विधानसभा क्षेत्र: जातीय समीकरण पर भारी पड़े मोदी-योगी
सहजनवां विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण पर मोदी-योगी भारी पड़े। प्रधानमंत्री आवास, राशन से लेकर सुशासन तक के पक्ष में बयार बही। भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप शुक्ला ने त्रिकोणीय मुकाबले में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार यशपाल रावत को 43 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। प्रदीप शुक्ला को 1,05,320 वोट, सपा के यशपाल रावत को 62,177 वोट और बहुजन समाज पार्टी के सुुधीर सिंह को 43,798 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी को छोड़ कर कांग्रेस पार्टी से टिकट हासिल करने वाले मनोज यादव को मात्र 3,315 वोट ही मिले।
सहजनवां विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय लड़ाई रही। भाजपा के प्रदीप शुक्ला ने पहले चरण से जो बढ़त बनानी शुरू की, वह अंतिम चरण की गिनती तक कायम रही। दरअसल, इस विधानसभा में कुल वोटर 3,55,901 हैं। यहां ब्राह्मण, यादव व सैंथवार, क्षत्रिय वोटरों की संख्या निर्णायक भूमिका में है। यहां सैंथवार क्षत्रिय वोटरों की संख्या लगभग 40 हजार से अधिक है। यह वर्ग किसी भी दल के भाग्य को बदलने में निर्णायक भूमिका अदा करता है। इसी वजह से इस सीट पर कभी भी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में पुराने चेहरों पर भरोसा न जताते हुए, संगठन के क्षेत्रीय मंत्री प्रदीप शुक्ला को टिकट देकर मैदान में उतारा था। जबकि, प्रदीप को चुनाव लड़ने का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन संगठन में उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन बखूबी किया है। यशपाल रावत यहां की यादव बिरादरी में गहरी पैठ रखते हैं। इनके पिता स्व. शारदा रावत भी यहां से विधायक रह चुके हैं, जो क्षेत्र में काफी लोकप्रिय रहे।
भाजपा ने लगातार दूसरी बार हासिल की जीत
भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। सहजनवां विधानसभा का परिणाम हर चुनाव में बड़ा ही रोचक रहा है। यहां से कोई दल यह दावा नहीं कर सकता है कि उसका इस सीट पर लंबे समय से कब्जा रहा है। सहजनवां विधानसभा पर 2017 में भाजपा के शीतल पांडेय ने सपा के यशपाल रावत को 15,377 मतों से पराजित किया था। इस चुनाव में शीतल पांडेय 72,213 मत और यशपाल रावत को 56,836 मत मिले थे, जबकि बसपा उम्मीदवार देवनारायण उर्फ जीएम सिंह 54 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस विधानसभा सीट पर 2012 में बसपा के राजेंद्र उर्फ बृजेश सिंह का कब्जा रहा, जबकि 2007 में बसपा के जीएम सिंह विधायक चुने गए थे।