दुनिया भर में धार्मिक पुस्तकों के लिए प्रसिद्ध गीता प्रेस से अब तक लगभग 72 करोड़ से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन हो चुका है। इन पुस्तकों में सर्वाधिक संख्या 15 करोड़ 60 लाख श्रीमद्भागवत गीता की है। इसके अलावा रामचरित मानस, पुराणों, हनुमान चालीसा, दुर्गा सप्तशती, सुंदरकांड की भी संख्या करोड़ों में है।
वर्ष 1921 के आसपास जयदयाल गोयंदका ने कोलकाता में गोविंद भवन ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसी ट्रस्ट के तहत वहीं से वह गीता का प्रकाशन कराते थे। पुस्तक में कोई त्रुटि न हो इसके लिए प्रेस को कई बार संशोधन करना पड़ता था। प्रेस मालिक ने एक दिन कहा कि इतनी शुद्ध गीता प्रकाशित करवानी है तो अपना प्रेस लगा लीजिए। गोयंदका ने इस कार्य के लिए गोरखपुर को चुना। 1923 में उर्दू बाजार में दस रुपये महीने के किराए पर एक कमरा लिया गया और वहीं से शुरू हुआ गीता का प्रकाशन। धीरे-धीरे गीताप्रेस का निर्माण हुआ और इसकी वजह से पूरे विश्व में गोरखपुर को एक अलग पहचान मिली।
15 भाषाओं में होता है पुस्तकों का प्रकाशन
गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधन लालमणि तिवारी ने बताया कि गीताप्रेस से 15 भाषाओं में पुस्तकों का प्रकाशन होता है। इनमें हिंदी, संस्कृत, बंगला, मराठी, गुजराती, तमिल, कन्नड़, असमिया, उड़िया, उर्दू, तेलगू, मलयालम, पंजाबी, अंग्रेजी, नेपाल भाषाएं शामिल हैं।