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Good News: 25 लाख आबादी के लिए महायोजना तैयार, दोगुना होगा गोरखपुर शहर का विस्तार

Thu, 25 Aug 2022 10:09 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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जीडीए बोर्ड की बैठक में बोलते प्रेम रंजन सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
मेट्रोपोलिटन शहर की तर्ज पर 25 लाख आबादी को ध्यान में रखकर गोरक्षनगरी के सुनियोजित विकास के लिए तैयार नई महायोजना के प्रारूप को गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) बोर्ड ने अपनी स्वीकृति दे दी है। पिछली महायोजना-2021 में जहां आवासीय, वाणिज्यिक और औद्योगिक समेत सभी तरह के भू उपयोग को मिलाकर कुल नौ हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल को शामिल किया गया था, वहीं इस बार सीमा विस्तार के बाद प्राधिकरण ने दोगुने से अधिक क्षेत्रफल पर विकास का खाका खींचा है।

 
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गोरखपुर शहर। - फोटो : राजेश कुमार
नई महायोजना में कुल 20 हजार 336 हेक्टेयर क्षेत्रफल को शामिल किया गया है। महायोजना के लागू होने के बाद इन्हीं प्रस्तावों के मुताबिक निर्माण हो सकेगा। करीब साल भर के इंतजार के बाद बुधवार को प्राधिकरण सभागार में हुई बोर्ड की बैठक में महायोजना-2031 के प्रारूप को स्वीकृति मिली। यह पहला मौका है जब महायोजना 10 साल के लिए बनाई गई है। पहले 20 साल की महायोजना होती थी।

एक सप्ताह के भीतर महायोजना को प्राधिकरण की वेबसाइट पर अपलोड कर लोगों से आपत्तियां एवं सुझाव मांगा जाएगा। इसके लिए एक महीने का समय दिया जाएगा। तार्किक आपत्तियों और सुझाव पर महायोजना में परिवर्तन भी हो सकता है। इसके बाद प्राधिकरण, प्रारूप को फाइनल कर अंतिम प्रकाशन के लिए शासन को भेज देगा, जिसके बाद इसे वहीं से लागू कर दिया जाएगा।

नई महायोजना में शहर से सटे सभी इलाकों में बड़ी पैमाने पर कृषि एवं अन्य उपयोग की जमीनों का भू-प्रयोग बदलकर आवासीय कर दिया गया है। इससे आमजन को घर बनवाने के लिए जमीन के पर्याप्त विकल्प मिल सकेंगे।

 
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जीडीए बोर्ड की बैठक। - फोटो : अमर उजाला।
बैठक के बाद महायोजना को तैयार करने वाले कंसलटेंट गुजरात निवासी गोपालदास प्राणदास शाह व नगर नियोजक हितेश ने पत्रकार वार्ता में बताया कि इसमें आमजन की सुविधा का ज्यादा से ज्यादा ख्याल रखा गया है। उन्होंने बताया कि महायोजना को 125 जनसंख्या घनत्व के आधार पर तैयार किया गया है। इसे तैयार करते समय अवैध निर्माण का अध्ययन भी किया गया। विभिन्न वर्ग के लोगों का सुझाव लेने के लिए पांच बार कंसलटेंसी बैठकें की गई हैं। पुरानी महायोजना में जो समस्या थी, उसे दूर करने का प्रयास भी किया गया है।

 

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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
हाईवे-रिंग रोड किनारे बनेंगे स्कूल-अस्पताल, होटल
महायोजना में शहर के आसपास के क्षेत्रों खासकर हाईवे और रिंग रोड के किनारे विकास की ज्यादा संभावना तलाशी गई है। कालेसर-जंगल कौड़िया-जगदीशपुर-कालेसर रिंग रोड हो या देवरिया, सोनौली आदि हाईवे, दोनों ओर विकास की पर्याप्त संभावनाएं रहेंगी। हर हाईवे- रिंग रोड के दोनों ओर 300 मीटर तक वाणिज्यिक इस्तेमाल के लिए भूमि सुरक्षित की गई है। हाईवे से 30-30 मीटर की चौड़ाई में बफर जोन बनाया गया है, ताकि भविष्य में सड़क को चौड़ा करने  में दिक्कत न हो। इस 30 मीटर के बाद दोनों ओर 18-18 मीटर चौड़ी सड़क होगी। सड़क के बाद दोनों ओर 282 मीटर दूरी में हाइवे फैसिलिटी जोन होगा। यहां स्कूल, अस्पताल, लॉजिस्टिक पार्क, वेयर हाउस, पेट्रोल पंप, होटल- मोटल, रिसार्ट, पेट्रोल पंप, स्कूल, कॉलेज और मैरेज हाल आदि बनवाए जा सकेंगे। इस क्षेत्र में आवासीय निर्माण नहीं हो सकेगा।

 
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गोरखपुर शहर। - फोटो : अमर उजाला।
जाम से निजात के लिए शहर से बाहर होंगी मंडी, वेयर हाउस
महायोजना में शहर को जाम से मुक्ति दिलाने के साथ ही यातायात व्यवस्था और दुरुस्त करने के लिए भी योजना बनाई गई है। सभी चौराहों, प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक लोड के अध्ययन के बाद महायोजना में  ट्रांसपोर्टनगर, वेयर हाउस, मंडी, शैक्षणिक एवं मेडिकल संस्थाओं को शहर के बाहर शिफ्ट करने का निर्णय किया गया है। इसके लिए महराजगंज रोड, सोनौली रोड, कुशीनगर रोड व देवरिया रोड के आस-पास जगह चिह्नित की गई है। शहर के हर प्रवेश द्वार पर बस अड्डे के लिए भी जगह सुनिश्चित की गई है।

 
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गोरखपुर शहर। - फोटो : राजेश कुमार
देवरिया-कुशीनगर रोड के बीच बसेगा नया गोरखपुर
महायोजना में नया गोरखपुर बसाने की योजना का भी पूरा ध्यान रखा गया है। देवरिया एवं कुशीनगर रोड के बीच फोरलेन बाईपास से सटे करीब 1800 हेक्टेयर क्षेत्रफल पर नया गोरखपुर बसाया जाएगा।  कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट एवं गोरखपुर एयरपोर्ट से जुड़े होने की वजह से नया गोरखपुर के लिए इस जगह को सबसे मुफीद पाया गया।

 
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वन क्षेत्र - फोटो : सोशल मीडिया
वन क्षेत्र के 100 मीटर दायरे में ग्रीन जोन, नालों के किनारे बफर जोन
महायोजना में वन क्षेत्र और जलभराव की समस्या के मद्देनजर बड़े नालों का भी ध्यान रखा गया है। वन विभाग के सुझावों के बाद वन क्षेत्र के चारों ओर 100 मीटर की परिधि को ग्रीन जोन रखने का प्रस्ताव रखा गया है।  कुसम्ही जंगल, पिपराइच रोड पर स्थित जंगल एवं अन्य स्थानों पर यह स्थिति नजर आएगी। तुर्रा नाला को भी वन विभाग ने अपने क्षेत्र में माना है इसलिए इस नाले से 100 मीटर का दायरा लिया जाएगा। यही नहीं इस क्षेत्र में यदि किसी की निजी जमीन होगी तो वह भी उसका इस्तेमाल हरियाली से जुड़े कार्यों में ही कर सकेगा।  

 

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गोड़धोइया नाला। - फोटो : अमर उजाला।
एयरफोर्स के 100 मीटर दायरे में पहले से ही नो कंस्स्ट्रक्शन जोन है। हालांकि वन क्षेत्र को लेकर शामिल किए गए प्रस्ताव पर भी लोग आपत्ति दे सकते हैं। आपत्तियों के निस्तारण के लिए गठित होने वाली कमेटी की रिपोर्ट के बाद इसमें बदलाव भी हो सकता है। इसी तरह प्राकृतिक नालों के दोनों ओर 15 मीटर का होगा बफर जोन बनाया गया है।  महायोजना में गोड़धोइया नाला, रामगढ़ताल नाला जैसे बड़े प्राकृतिक नालों के दोनों ओर 15-15 मीटर तक बफर जोन रखने का प्रस्ताव शामिल किया गया है। रामगढ़ताल से निकलकर तरकुलानी रेगुलेटर में मिलने वाले रामगढ़ताल नाला के दोनों ओर प्लाटिंग  हो रही थी, जिसे जीडीए ने पहले ही रोक दिया है। यहां कोई निर्माण नहीं हो सकेगा।

 

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सांकेतिक। - फोटो : amar ujala
खुला क्षेत्र का भू-उपयोग नहीं बदलेगा, 100 कॉलोनियां होंगी नियमित
नई महायोजना में शामिल प्रस्ताव के मुताबिक भू उपयोग परिवर्तित करने से करीब 100 कालोनियों के नियमित होने का रास्ता खुल गया है। हालांकि ग्रीन लैंड में बसी रामजानकीनगर जैसी कालोनियों को नियमित करने का प्रस्ताव शामिल नहीं किया गया है। ग्रीन लैंड एवं खुला क्षेत्र के भू- उपयोग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।  ग्रीन लैंड पर बसी कालोनियों के लोग भी आपत्ति दाखिल कर कालोनी को नियमित कराने की अपील कर सकते हैं। उनकी आपत्तियों के बाद नियमित होने की संभावना बनी रहेगी।

 

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जमीन। (सांकेतिक) - फोटो : amar ujala
1700 एकड़ विनियमितिकरण की जमीन पर फैसला नहीं
शहर की 1700 एकड़ विनियमितिकरण की जमीन से जुड़ी बड़ी समस्या पर फिलहाल कोई हल नहीं निकल सका। महायोजना के प्रारूप में इसपर कोई प्रस्ताव नहीं तैयार हो सका। तय हुआ है कि आपत्ति और सुझाव के बाद इस मामले में कोई निर्णय होगा।  विनियमितीकरण की जमीन पर न तो मानचित्र पास हो सकता है और न ही निर्माण कराया जा सकता है। जो भी निर्माण यहां होते हैं, अनियमित होते हैं। लोगों को बहुत उम्मीद थी कि महायोजना में इससे मुक्ति मिल जाएगी लेकिन महायोजना में इसे लोगों पर छोड़ दिया गया है।

 

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चिलुआताल। (फाइल) - फोटो : Shivharsh Dwivedi
चिलुआताल के चारो ओर 100 से 500 मीटर तक निर्माण पर रोक
रामगढ़ताल की ही तरह चिलुआताल का भी सुंदरीकरण होना है। इसके लिए इस ताल के चारों ओर मध्यवर्ती क्षेत्र यानी बफर जोन का प्रस्ताव दिया गया है। यह बफर जोन 100 मीटर से लेकर 500 मीटर तक होगा। यहां आवासीय निर्माण नहीं हो सकेगा। हालांकि पर्यटन की दृष्टि से इसे विकसित करने के लिए मनोरंजन से जुड़े काम हो सकेंगे। चिलुआताल को रिक्रिएशन सेंटर के रूप में विकसित किया जागएा। यहां वाटर पार्क, कॉटेज, वाटर स्पोर्ट्स आदि से जुड़ी गतिविधियों की अनुमति मिल सकेगी।

 

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Gorakhpur metro - फोटो : अमर उजाला
मेट्रो के दोनों तरफ बाजार स्ट्रीट का भी प्रावधान
महायोजना में मेट्रो परियोजना का भी पूरा ध्यान रखा गया है। मेट्रो रूट, उसके पिलर आदि को लेकर महायोजना में प्रावधान किया गया है। डिपो बनाने से लेकर अन्य सुविधाओं का भी ध्यान रखा गया है। साथ ही मेट्रो रूट के दोनों ओर बाजार स्ट्रीट का भू उपयोग दिया जाएगा, इससे यह क्षेत्र और विकसित हो सके। मेट्रो रूट के दोनों ओर वाणिज्यिक विकास हो सकेगा।

 

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सांकेतिक। - फोटो : ANI
24 मीटर चौड़ी सड़क के दोनों ओर मिश्रित मानचित्र
शहर में 24 मीटर या इससे चौड़ी सड़क के दोनों ओर वाणिज्यिक गतिविधियों की अनुमति का भी महायोजना में प्रस्ताव है। देवरिया बाईपास व अन्य सड़कों पर इसका फायदा मिलेगा। तारामंडल क्षेत्र में ज्यादातर घरों में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं। मिश्रित मानचित्र स्वीकृत कराकर वे अब इसे नियमित करा सकेंगे। हालांकि लोगों की आपत्तियों पर इसमें कुछ बदलाव भी हो सकता है।

महायोजना में भू- उपयोग की स्थिति-

भू-उपयोग                       क्षेत्रफल (हेक्टेयर में)      प्रतिशत
आवासीय-                   9998.51                      49.16
वाणिज्यिक-                 761.65                        3.74
कार्यालय-                    352.94                        1.73
पब्लिक-                      1406.81                      6.91
औद्योगिक-                  788.40                       3.87
यातायात एवं परिवहन-  2979.64                     14.65
पार्क, खुला क्षेत्र, ग्रीन बेल्ट- 4048.48             19.90
कुल                               - 20336.43              100                  

 
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जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
जीडीए उपाध्यक्ष प्रेम रंजन सिंह ने कहा कि नई महायोजना 2031 के प्रारूप को जीडीए बोर्ड में रखा गया था। बोर्ड ने प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की स्वीकृति दे दी है। जल्द ही इसे जीडीए की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया जाएगा। इसे देखकर कोई भी आपत्ति व सुझाव दे सकेगा। इसके लिए एक महीने का समय तय किया गया है। इसके बाद महायोजना को फाइनल कर अंतिम प्रकाशन के लिए शासन को भेजा जाएगा। 
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