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Ganga Dussehra 2020: दस तरह के पापों से मुक्ति दिलाती हैं मां गंगा, जानिए गंगा के जन्म की कहानी

Thu, 28 May 2020 11:53 AM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
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Ganga Dussehra 2020 - फोटो : अमर उजाला।
मां गंगा का अवतरण दिवस 'गंगा दशहरा' एक जून को मनाया जाएगा। ऐसी मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदी में स्नान करने से मनुष्य के 10 तरह के पाप समाप्त हो जाते हैं। इसके साथ ही इन दिन स्नान के उपरांत दान-पुण्य करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है।
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ज्योतिर्विद पंडित नरेंद्र उपाध्याय। - फोटो : अमर उजाला
ये रहेगी ग्रह और नक्षत्रों की स्थिती
पंडित नरेंद्र उपाध्याय ने बताया कि काशी से प्रकाशित पंचागों के अनुसार एक जून दिन सोमवार को सूर्योदय पांच बजकर 16 मिनट पर और दशमी तिथि का मान दिन में 11 बजकर 54 मिनट तक है। हस्त नक्षत्र सम्पूर्ण दिन, रात्रि 10 बजकर 50 मिनट पर्यन्त और सिद्धि योग दिन में 11 बजकर 19 मिनट तक।

चंद्रमा की स्थिति कन्या राशि यथा सूर्य वृष राशि पर स्थिति है। मान्यता है कि ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष के दशमी तिथि और हस्त नक्षत्र  में  मां गंगा का स्वर्ग लोक से पृथ्वी पर अवतरण हुआ था। इस वर्ष यह एक जून दिन सोमवार को है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी संवत्सर का मुख मानी जाती है। इस दिन गंगा नदी में स्नान, दान और उपवास का विशेष महत्त्व है।
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पंडित शरद मिश्रा। - फोटो : अमर उजाला
गंगा दशहरा के दिन क्या करें
पंडित शरद मिश्रा ने बताया कि यदि गंगा तट वासी हैं तो गंगा नदी में, अन्यथा समीप की पवित्र नदी, यदि यह भी संभव न हो तो घर पर ही गंगा जल में स्वच्छ जल मिलाकर स्नान करें। इसके बाद गंगा जी की विधिपूर्वक षोडशोपचार विधि से पूजन सम्पन्न करें।

यह पूजन नाम मंत्र से भी किया जा सकता है। ॐ गं गंगायै नमः-नाम मंत्र से भी पूजन सम्पन्न कर सकते हैं। इसके बाद गंगा जी को पृथ्वी पर अवतरित करने वाले भगीरथ जी का तथा हिमालय का भी पूजन करें। अंत में दस-दस मुट्ठी अनाज एवं अन्य वस्तुएं दस ब्राह्मणों को दान करें। इस दिन जल और सत्तू का दान करना चाहिए।

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ज्योतिर्विद पंडित बृजेश पांडेय। - फोटो : अमर उजाला
मां गंगा के अवतरण की कथा
पंडित बृजेश पांडे ने बताया कि पौराणिक कथा के अनुसार, मां गंगा को स्वर्गलोक से धरती पर राजा भागीरथ लेकर आए थे। इसके लिए उन्होंने कठोर तप किया था। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा ने भागीरथ की प्रार्थना स्वीकार की थी।

लेकिन गंगा माता ने भागीरथ से कहा था कि पृथ्वी पर अवतरण के समय उनके वेग को रोकने वाला कोई चाहिए अन्यथा वे धरती को चीरकर रसातल में चली जाएंगी और ऐसे में पृथ्वीवासी अपने पाप से मुक्त नहीं हो पाएंगे। तब भागीरथ ने मां गंगा की बात सुनकर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तपस्या की। भागीरथ की तपस्या से प्रसन्न होकर प्रभु शिव ने गंगा मां को अपनी जटाओं में धारण किया। जिसके बाद माता गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हो सका।
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पंडित प्रियरंजन त्रिपाठी। - फोटो : अमर उजाला।
ये दस पाप होते हैं नष्ट
पंडित प्रियरंजन त्रिपाठी के अनुसार गंगा में स्नान करने से 10 तरह के पाप नष्ट होते हैं। इनमें बिना अनुमति के दूसरे की वस्तु देना, हिंसा, पर स्त्री गमन, कटु वचन बोलना, झूठ बोलना, पीछे से बुराई या चुगली करना, निष्प्रयोजन बातें करना,  दूसरे की वस्तु को अन्याय पूर्ण ढंग से लेने का विचार रखना, दूसरे के अनिष्ट का चिंतन करना, नास्तिक बुद्धि रखना शामिल है।
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