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पुण्यतिथि विशेष: यहां बीता था फिराक गोरखपुरी का बचपन, तस्वीरों में देखें कैसे खंडहर बनी निशानी

Wed, 03 Mar 2021 08:06 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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खंडहर बनीं फिराक गोरखपुरी की निशानी - फोटो : अमर उजाला।
मशहूर शायर रघुपति सहाय उर्फ फिराक गोरखपुरी का बुधवार को पुण्य तिथि मनाया जा रहा है। फिराक का बचपन उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के सहजनवां तहसील के अड़ीलापार गांव में गुजरा था। अब शासन- प्रशासन की उपेक्षा के कारण खंडहर बना मकान फिराक साहब की निशानी बयां कर रही है। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें इनकी कहानी...
 
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Firaq Gorakhpuri - फोटो : अमर उजाला।
फिराक साहब का जन्म 28 अगस्त 1896 को बनवारपार में हुआ था, लेकिन बचपन सहजनवां तहसील के अड़ीलापार गांव के इसी घर में गुजरा था। यहां उनकी नानी रहतीं थीं। जिन्हें कोई संतान नहीं थी। इनके पिता को नेवासा मिला हुआ था। इनके पिता मुंशी गोरख प्रसाद गोरखपुर के एक प्रतिष्ठित वकील थे। वह प्रतिदिन अड़ीलापार खरैला, कालेसर होकर इक्का से गोरखपुर आते-जाते थे।

 
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फिराक गोरखपुरी के नाम पर बना पुस्कालय। - फोटो : अमर उजाला।
स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के बाद 29 जून 1914 को अड़ीलापार गांव से करीब 6 किलोमीटर की दूरी पर बेलवाडाडी गांव में जमींदार बिंदेश्वरी प्रसाद की बेटी किशोरा देवी के साथ फिराक साहब का विवाह हुआ था। बड़े ही धूमधाम से बरात तेनुअन तिनहरा एवं कैली होते हुए बेलवाडाडी गई थी।

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जमींदार बिंदेश्वरी प्रसाद का बेलवाडाडी गांव। - फोटो : अमर उजाला।
बरातियों को पानी पीने के लिए दोनों गांव के बीच में करीब तीन कुएं खोदे गए थे। जिसमें एक कुआं तिनहरा गांव में आज भी मौजूद है। अफसोस कि ऐसे शख्स जिनके शायरी की गूंज पूरी दुनिया में रही है। जिनका बचपन और विवाह जहां से हुआ था, आज खंडहर के रूप में पहचान बन कर रह गई है।
 
 
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फिराक साहब की पुश्तैनी मकान गिरा। - फोटो : अमर उजाला।
ढह गया पुश्तैनी खपरैल के मकान का कुछ हिस्सा
फिराक साहब का पुश्तैनी खपरैल का मकान देखरेख के अभाव में पूरी तरह से जर्जर हाल में पहुंच चुका है। बारिश की वजह से कुछ दिन पहले फिराक साहब के मकान का कुछ हिस्सा ढह गया, लेकिन आज तक किसी भी जनप्रतिनिधि या अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लेने तक की जहमत नहीं उठाई। इस बात को लेकर बनवारपार के लोगों के साथ ही साहित्य व शायरी में रुचि रखने वालों में बेहद आक्रोश है।
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