फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देश-विदेश में प्रसिद्ध है 'रामकोला की भागवत' कथा, आज भी लोग मुहावरे में करते हैं इसका प्रयोग

Tue, 29 Dec 2020 03:31 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर।
विज्ञापन
1 of 5
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक रामकोला मंदिर है। रामकोला गांव से लेकर रामकोला धाम तक की कहानी बड़ी दिलचस्प है। सबसे प्रसिद्ध यहां की भागवत कथा रही, जो प्रदेश के लोगों के लिए रामकोला की पहचान बनी है। वहीं अनुसुइया मंदिर बनने के बाद रामकोला को रामकोला धाम के नाम से जाना जाने लगा। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...




 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
ये है रामकोला की कहानी
जब देश गुलाम था, उस समय रामकोला गांव था। रामकोला को टाउन एरिया का दर्जा 1958 में मिला। बताया जाता है कि जब प्रदेश में जमींदारी प्रथा थी, उस समय रामकोला के जमींदारों की जमींदारी दूर तक थी। कुछ सौ वर्ष पहले यहां के जमींदारों ने एक बार रामकोला में भागवत कथा का आयोजन किया था।

 
विज्ञापन

3 of 5
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
उसमें यहीं बगल के गांव मांडेराय के पुरोहित ने भागवत कथा शुरू की। बताते हैं कि जब कथा शुरू हुई तो शुरुआत के समय कुछ लोग सुनने नहीं आ पाए थे। देर से पहुंचे लोगों ने फिर से भागवत कथा कहने के लिए पंडित से कहा।

 

4 of 5
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
पंडित ने दोबारा कथा शुरू की। इसी प्रकार जो भी देर से आता था, वह कथा दोबारा शुरू से कहने के लिए बाध्य करता था। इस कारण आठ दिनों में समाप्त होने वाली भागवत कथा महीनों बीत जाने के बाद भी केवल शुरुआत ही होती रही।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
जमींदारों के इस रवैये से परेशान होकर पंडित भाग गए और जब उन्हें ढूंढा जाने लगा तो वे एक पेड़ पर चढ़कर कूद गए। इसी कारण उनकी मौत हो गई। उसके बाद यहां के जमींदारों ने उनके परिवार को दान में 700 एकड़ जमीन मांडेराय में दे दी। जहां अब भी उनकी बस्ती है। इस प्रकार रामकोला की भागवत कथा कभी समाप्त न होने वाली कथा हो गई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें