भगवान विष्णु (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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यह है व्रत का महत्व
पंडित शरद चंद्र मिश्र बताते हैं कि इस एकादशी के दिन छह प्रकार से तिलों का इस्तेमाल किया जाता है। यही वजह है कि इसका नाम षटतिला एकादशी पड़ गया। तिल मिले जल से स्नान, तिल का उबटन, तिल का होम, तिल मिले जल का पान, तिल का भोजन और तिल का दान, इस प्रकार तिल का छह प्रकार से प्रयोग इस एकादशी के दिन होता है।