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यूपी उपचुनाव: देवरिया की जीत बताएगी, किस पार्टी की तरफ हैं 'पशुराम के वंशज'

Thu, 05 Nov 2020 09:05 AM IST
vivek shukla विनोद कुमार तिवारी, देवरिया।
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देवरिया उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के देवरिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान शांतिपूर्ण तो संपन्न हो गया, लेकिन मतदाताओं की खामोशी ने राजनीतिक दलों को बेचैन कर दिया है। मतदान के दिन भी चुनावी तस्वीर साफ नहीं हो सकी। ऐसे में प्रश्न यह है कि जीतेगा कौन, बूथ पर तो मतदाता मौन ही रहा। गौरतलब है कि सदर विधानसभा चुनाव के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशी ब्राह्मण हैं। यह सीट ब्राह्मण बहुल मानी जाती है। वहीं देवरिया को ब्राह्मण मतदाता के प्रभाव का इलाका कहा जाता है। ऐसे में यहां की जीत इस बात का रुझान दिखा सकती है कि यूपी में ब्राह्मण किसके साथ हैं?
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देवरिया उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
बता दें कि उपचुनाव में मतदाता विकास का मुद्दा भूल गया। वभनी द्वितीय, महुआबारी सहित कई गांवों में लोगों ने 'सड़क नहीं तो वोट नहीं' का नारा दिया तो था, लेकिन चुनाव के लिए उनका मुद्दा गायब हो गया। बूथ पर ऐसे लोगों ने बताया कि चुनाव में उनकी मांगे पूरी नहीं होने वाली थीं। ऐसे में उन्होंने विकास का मुद्दा छोड़ दिया।
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देवरिया उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
ग्राम प्रधान प्रेम यादव ने बताया कि लोग दल और जाति के आधार पर मतदान कर रहे हैं। न्यू कालोनी के पूर्व सभासद जय प्रकाश सिंह का कहना है कि वह अपने व्यक्तिगत संबंधों के आधार पर एक प्रत्याशी का समर्थन कर रहे हैं। चुनाव में बिरादरी कहां जा रही, इससे हमें कुछ भी लेना देना नहीं है। साकेत नगर के पूर्व सभासद अवधेश यादव ने कहा कि बेरोजगारी, उत्पीड़न, भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वह इस बार मतदान कर रहे हैं।

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देवरिया उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
कारोबारी संजय जायसवाल का कहना है कि विकास कोई नहीं देख रहा। हमने तो देश के मुद्दे पर मतदान किया और परिवार के लोगों से भी करने को कहा। कारोबारी एवं कोटेदार सुरेश जायसवाल का कहना है कि विकास के मुद्दे पर हमारे परिवार ने रामनाथ देवरिया बूथ पर मतदान किया है। लकड़ी हट्टा के दुकानदार महासागर पांडेय का कहना है कि देश, प्रदेश के विकास के मुद्दे पर हमारे मोहल्ले के लोगों ने मतदान किया है।
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देवरिया उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
सिविल लाइन की रेनू श्रीवास्तव का कहना है कि हमने तो प्रत्याशी के व्यवहार एवं आचरण को देखकर वोट दिया। हमें ऐसा विधायक चाहिए जो महिला हित की बात करें। गायत्रीपुरम की रीता श्रीवास्तव का कहना है कि इस बार के उपचुनाव में न कोई मुद्दा हावी रहा और न ही दल। उम्मीदवारों के समर्थक तो मुखर रहे, लेकिन वोटर खामोश दिखे।
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देवरिया उपचुनाव। - फोटो : अमर उजाला।
उम्मीदवारों को भितरघातियों से डर
चुनावी चौसर में शह मात का जमकर खेल हुआ। उम्मीदवारों ने तो सभी दांव आजमाएं, वोटरों को लुभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन वोट डलवाने के लिए न तो प्रशासन ने कोई खास जागरूकता अभियान चलाया और न ही संगठन स्तर पर प्रयास किए गए। यही कारण है कि बूथों पर भीड़ नहीं रही। चुनाव में वोटरों की चुप्पी की वजह से तस्वीर साफ नहीं हो सकी है। हां यह जरूर है कि भाजपा एवं सपा के उम्मीदवारों को भितरघातियों से अधिक डर है। दलों के विभीषण ने उम्मीदवारों की चिंता बढ़ा दी है। भाजपा एवं सपा के कुछ नेता अपनी-अपनी योजना को अंजाम देने में पीछे नहीं रहे। बाइक से घूम रहे एक निर्दल उम्मीदवार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह इसलिए चुनाव लड़ रहा है कि वह जिसे चाहता था उसे टिकट पार्टी ने नहीं दिया।
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