गोरखपुर जेल और फांसी घर।
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‘बैठकी’ का फायदा उठाते हैं पैसे वाले आरोपित
जेल में सुविधा पाने को कुछ न कुछ खर्च करना ही पड़ता है। जेल प्रशासन से जुड़े जिम्मेदार यह सुविधा मुहैया करने के लिए जो करते हैं, हम उनकी बात नहीं कर रहे। मुद्दा प्रभावशाली सजायाफ्ता और अंडर ट्रायल बंदियों से जुड़ा है। ये भी नए कैदियों को आराम से जीने देने के लिए चौथ वसूली करते हैं। जेल प्रशासन इसे खारिज करता है, मगर सच यही है कि यह सब कुछ जेल का कांस्पेट आने के साथ ही जेलों में शुरू हो गया था। कैदियों की भाषा में इसे ‘बैठकी’ कहते हैं। इसका फायदा घर से समृद्ध अपराधी उठाते हैं। वह जेल के दबंग सजायाफ्ता या अंडर ट्रायल को समय-समय से ‘बैठकी’ की रकम देकर, आराम से रहते हैं।