कानपुर के व्यापारी मनीष गुप्ता हत्याकांड के मामले में मुख्य आरोपी इंस्पेक्टर जेएन सिंह और दरोगा अक्षय मिश्रा को गिरफ्तार किया गया। गोरखपुर पुलिस ने अमर उजाला तिराहे के पास से हत्यारोपियों को गिरफ्तार किया है। दोनों से रामगढ़ताल और क्राइम ब्रांच की टीम पूछताछ कर रही है। जल्द ही उन्हें कानपुर एसआइटी के हवाले कर दिया जाएगा। अन्य आरोपियों की तलाश में गोरखपुर के साथ ही कानपुर जिले की पुलिस छापेमारी कर रही है। आगे की स्लाइड्स में पढ़िए कि घटना वाली रात (27 सितंबर) पुलिसकर्मियों ने ऐसा क्या किया था जो सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी...
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मनीष हत्याकांड
- फोटो : अमर उजाला।
कारोबारी मनीष गुप्ता को 27 सितंबर की रात जब पुलिसकर्मी कमरा नंबर 512 से बाहर लाए, तो उनके शरीर में कोई हरकत नहीं थी। इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह उस समय मौके पर मौजूद थे। जगत नारायण ने ही बेजान-से मनीष को दूसरे दरोगा और अन्य पुलिसकर्मियों के साथ लिफ्ट से नीचे भिजवाया। यह सब कयास नहीं, बल्कि होटल के अंदर की उस सीसीटीवी फुटेज का सच है, जो अब एसआईटी के कब्जे में है। सीसीटीवी में साफ नजर आ रहा है कि रात 12 बजकर 10 मिनट पर तत्कालीन चौकी इंचार्ज अक्षय मिश्रा बेजान-से मनीष को कमरे से बाहर लेकर आए थे। इसके बाद वह नीचे उतर गए। साथ में मौजूद दूसरे दरोगा ने अन्य पुलिसकर्मियों व होटल के दो स्टॉफ से मनीष के हाथ-पैर पकड़वाकर होटल की लिफ्ट से नीचे उतरवाया था।
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मनीष हत्याकांड: मनीष का दोनों हाथ, दोनों पैर पकड़ ले जाती पुलिस।
- फोटो : अमर उजाला।
घटना वाले दिन, 27 अक्तूबर की रात 12 बजे के आसपास इंसपेक्टर जगत नारायण सिंह चौकी प्रभारी फलमंडी अक्षय मिश्रा के साथ होटल कृष्णा पैलेस पहुंचे थे। कमरे में सवाल-जवाब के बीच जो भी हालत हुए हों, लेकिन सीसीटीवी फुटेज में होटल के कमरा नंबर 512 के बाहर का नजारा साफ है। इसमें दिखाई दे रहा कि रात 12 बजकर 10 मिनट पर पुलिसकर्मी मनीष का हाथ पैर पकड़कर कमरे से बाहर आ रहे हैं। कमरे से आगे आकर दाईं तरफ लकड़ी की अलमारी है। इससे चंद कदम आगे की तरफ लिफ्ट लगी है।
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मनीष हत्याकांड: मौके पर हत्यारोपी दरोगा जेएन सिंह सीसीटीवी में कैद हो गया।
- फोटो : अमर उजाला।
कमरे से बाहर लाने के बाद पुलिसकर्मी मनीष को आलमारी के पास ही लिटा देते हैं। इस समय मनीष के शरीर पर सिर्फ अंडरवियर थी। फोटो में इसे साफ देखा जा सकता है। इस बीच अक्षय मिश्रा नीचे की तरफ निकल जाते हैं। दूसरी तरफ कमरे से एक तौलिया लेकर दरोगा बाहर की तरफ आता है। इसी तौलिये को लपेटकर मनीष के शरीर को लिफ्ट के जरिए पुलिसकर्मी नीचे ले जाते हैं। देखकर लग रहा है कि, भारी होने की वजह से पुलिस के अलावा होटल के दो स्टॉफ ने मनीष के हाथपैर पकड़े, जबकि पास में खडे़ इंसपेक्टर जगत नारायण सिंह ने मनीष को हाथ लगाकर नीचे उतारने में सहयोग देना भी उचित नहीं समझा।
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मनीष हत्याकांड: कमरे से बाहर लेटे मनीष को तौलिया लेकर देते दरोगा।
- फोटो : अमर उजाला।
होटल के कमरे में इसी तौलिये के मिलने की संभावना
कमरे से नीचे लेकर आने पर लिफ्ट के बाहर अक्षय मिश्रा के अलावा अन्य दरोगा (जो अचेत मनीष को ऊपर से नीचे लेकर आया था) ने तौलिया मनीष की कमर से हटा दिया और रिसेप्शन के पास खड़े एक शख्स को दे दिया। फुटेज देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह होटल कर्मचारी या मनीष का ही दोस्त रहा होगा। जांच में पुलिस को एक खून से सना तौलिया भी मिला है। शायद मनीष को अस्पताल लेकर जाने के बाद, इसी तौलिये को वापस उस युवक ने कमरे में रख दिया होगा या हो सकता है कि इसी तौलिये से अंदर का खून साफ किया गया हो।
इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह व मनीष की फाइल फोटो।
- फोटो : अमर उजाला।
ये है पूरा मामला
कानपुर के बर्रा निवासी कारोबारी मनीष गुप्ता 27 सितंबर की सुबह आठ बजे गोरखपुर अपने दो दोस्तों हरवीर व प्रदीप के साथ घूमने आए थे। तीनों तारामंडल स्थित होटल कृष्णा पैलेस के कमरा नंबर 512 में ठहरे थे। 27 सितंबर की रात ही रामगढ़ताल थाना प्रभारी इंस्पेक्टर जगत नारायण सिंह, फलमंडी चौकी प्रभारी रहे अक्षय मिश्रा सहित छह पुलिस वाले आधी रात के बाद होटल में चेकिंग को पहुंच गए थे। कमरे की तलाशी लेने पर मनीष ने आपत्ति जताई तो पुलिसकर्मियों से उनका विवाद हो गया। आरोप है कि पुलिस वालों ने उनकी पिटाई कर दी थी जिससे उनकी मौत हो गई थी। शुरुआत में पुलिस की ओर से नशे में गिरने से मौत बताया था मगर बाद में हत्या का केस दर्ज किया गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मनीष के शरीर पर कई जगह चोट के निशान मिले। मनीष की पत्नी मीनाक्षी की तहरीर पर पुलिस ने तीन नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया, तब जाकर परिवार के लोग शव लेकर कानपुर रवाना हुए थे।