त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए नामांकन का आज आखिरी दिन है। पांच और छह अप्रैल को नामांकन पत्रों की जांच होगी। सात अप्रैल को दोपहर तीन बजे तक नाम वापस लेने का मौका रहेगा। इसी दिन दोपहर तीन बजे के बाद प्रत्याशियों को चुनाव निशान आवंटित किए जाएंगे। 15 अप्रैल को मतदान होगा और दो मई को नतीजे आएंगे। जिले में प्रधान की 1294, ग्राम पंचायत सदस्य की 16,372, बीडीसी की 1700 और जिला पंचायत सदस्य की 68 सीटों के लिए शनिवार से कड़ी सुरक्षा के बीच नामांकन शुरू हुआ। कलेक्ट्रेट स्थित एडीएम फाइनेंस और सीआरओ की कोर्ट समेत चार कक्षों में जिला पंचायत सदस्य पद के नामांकन हो रहे हैं, जबकि बाकी पदों के लिए संबंधित ब्लॉक कार्यालयों पर।
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UP Panchayat Election
- फोटो : अमर उजाला।
कलेक्ट्रेट से लेकर ब्लॉक कार्यालयों तक त्योहार जैसा माहौल दिख रहा है। माथे पर तिलक लगाए और गले में फूलों की माला पहने पंचायत चुनाव के प्रत्याशियों में इस कदर उत्साह देखने को मिला कि चिलचिलाती धूप भी बेअसर नजर आई। नामांकन स्थल के भीतर लाइन में खड़े प्रत्याशी अपनी बारी का इंतजार कर रहे तो बाहर समर्थक, प्रत्याशी के लौट कर आने का। कुछ प्रत्याशियों की पत्नियां और बच्चे नामांकन स्थल के बाहर समोसा और आइसक्रीम का जायका लेते हुए इंतजार करते दिखे। वहीं, कई प्रत्याशी पूरी तैयारी के बाद भी शुभ मुहूर्त के फेर में पहले दिन नामांकन दाखिल करने नहीं पहुंचे। आज ज्यादा नामांकन होने की उम्मीद है।
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गौरतलब है कि शनिवार को कलेक्ट्रेट में जिला पंचायत सदस्य के नामांकन के लिए सुबह आठ बजे ही लाइन लग गई जो शाम पांच बजे समय खत्म होने के बाद टूटी। दो दिन पहले व्यापारी की हत्या के बाद गगहा ब्लॉक में खामोशी के बीच नामांकन हुआ। सुबह सात बजे ही कई प्रत्याशी अपने प्रस्तावक के साथ पहुंच गए। हालांकि जिला पंचायत सदस्य की तुलना में ग्राम प्रधान, बीडीसी और ग्राम पंचायत सदस्य पद के नामांकन के लिए सभी ब्लॉकों में पहले दिन भीड़ कम दिखी।
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ढोल न नगाड़ा, सादगी से पहुंचे नामांकन करने
पंचायत चुनाव के पहले ही दो-तीन हत्याएं हो जाने से पुलिस और प्रशासन सतर्क हो गया है। नामांकन के पहले दिन कलेक्ट्रेट से लेकर हर ब्लॉक के बाहर सख्ती दिखाई पड़ी। नामांकन स्थल के सौ से दो सौ मीटर पहले ही प्रत्याशियों और उनके समर्थकों की गाड़ियां रोक दी जा रही थीं। वहां से सिर्फ प्रत्याशी और प्रस्तावक को प्रवेश करने दिया जा रहा था। प्रत्याशी भी करीबी लोगों के साथ दो से तीन गाड़ियों में नामांकन करने पहुंचे। न ढोल-नगाड़ा बजा न नारेबाजी हुई।
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अफसर एक से दूसरे ब्लॉक दौड़ते रहे
नामांकन प्रक्रिया सुचारू रुप से चल रही है या नहीं, इसका जायजा लेने के लिए डीएम के. विजयेंद्र पांडियन, सीडीओ इंद्रजीत सिंह, संबंधित एसडीएम और डीपीआरओ हिमांशु शेखर ठाकुर पूरे दिन एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक का निरीक्षण करते रहे।
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मास्क न सोशल डिस्टेंसिंग, कोविड प्रोटोकॉल की उड़ीं धज्जियां
कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बाद भी नामांकन के दिन जिला मुख्यालय से लेकर ब्लॉकों तक कोविड प्रोटोकॉल की खूब धज्जियां उड़ीं। कुछ स्थानों पर अफसरों ने एक-दो बार टोका भी लेकिन उत्साहित प्रत्याशियों पर इसका विशेष असर नहीं दिखाई पड़ा। लोग एक-दूसरे से सटकर खड़े रहे। तमाम प्रत्याशियों ने मास्क लगाना भी जरूरी नहीं समझा। अफसर टोकते तो कुछ देर के लिए मास्क या गमछा नाक पर चढ़ा लेते और फिर उनके हटते ही हटा देते। कलेक्ट्रेट में चल रहे जिला पंचायत सदस्य के नामांकन के दौरान तो पूरे दिन प्रत्याशी व प्रस्तावक एक-दूसरे से सटकर लाइन में खड़े दिखे।
एक ही सीट पर कहीं सास-बहू तो कहीं भाभी-ननद ने भरा पर्चा
नामांकन के लिए सिर्फ दो ही दिन मिलने की वजह से बहुत से प्रत्याशियों को जरूरी तैयारियों के लिए ज्यादा वक्त नहीं मिल पाया। पर्चा खारिज न हो जाए इसलिए कई ब्लॉकों की पंचायतों में महिला सीटों पर प्रधान और बीडीसी पद के लिए सास-बहू ने पर्चा भरा तो कहीं भाभी-ननद ने। ऐसा इसलिए कि एक का पर्चा खारिज हो जाए तो घर की ही दूसरी महिला की दावेदारी बच जाए। इसी तरह कुछ सीटों पर दो सगे भाइयों और बाप-बेटे ने भी नामांकन किया। शनिवार को खोराबार की एक ग्राम पंचायत से प्रधान पद के लिए जब सास और बहू दोनों नामांकन करने पहुंचीं तो कई तरह की चर्चा शुरू हो गई। माजरा जानने के बाद लोग चुप हुए।