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कोरोना का असर: बढ़ते संक्रमण से सहमा उद्योग जगत, इस खास वजह से पड़ रहा उत्पादन पर असर

Sun, 04 Apr 2021 02:50 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
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कोरोना का असर। - फोटो : अमर उजाला।
कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों की वजह से औद्योगिक जगत फिर सहम गया है। उसे आशंका है कि यदि कोरोना संक्रमण के मामले इसी तरह बढ़ते रहे तो हालात फिर बिगड़ सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो काफी नुकसान हो जाएगा। अभी पिछले साल लगे लॉकडाउन के कारण हुए नुकसान की ही भरपाई नहीं हो पाई है। दरअसल, पिछले साल जब लॉकडाउन लगा और उसके खुलने तक उद्योगों के पहिए पूरी तरह थमे रहे। इस वजह से न सिर्फ उत्पादन ठप रहा, बल्कि फैक्ट्री मालिक से लेकर कर्मचारी व मजदूर तक की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो गई।
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एसके अग्रवाल - फोटो : अमर उजाला।
चेंबर ऑफ इंडस्ट्रीज के पूर्व अध्यक्ष एसके अग्रवाल ने बताया कि पिछले साल के लॉकडाउन में आवश्यक सेवाओं से संबंधित उद्योगों को छोड़कर अन्य उद्योग पूरी तरह ठप रहे। इससे अब तक उद्योग सामान्य नहीं हो सके हैं। कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी होने से बाजार और ठंडा हो गया है। ऐसे में यदि फिर स्थिति बिगड़ती है तो हालात काफी खराब हो जाएंगे। मजबूरी में उद्योगों को बंद करना होगा और उद्यमियों से लेकर कर्मचारियों तक को परेशानी झेलनी पड़ेगी।
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अशोक शॉ। - फोटो : अमर उजाला।
एवीआर पेट्रो प्रोडक्ट्स के एमडी अशोक शॉ ने बताया कि सरकार की जो गाइडलाइन आएगी उसके अनुरूप फैक्ट्री संचालित करनी होगी। मेरी फैक्ट्री में आवश्यक सेवाओं संबंधी उत्पादों के लिए बैग बनाए जाते हैं। ऐसे में उद्योग बंद करने की नौबत तो नहीं आएगी, पर संक्रमण की रोकथाम के लिए सभी जरूरी कदम उठा लिए गए हैं। फैक्ट्री में टनल बनी है, जिसमें पूरा शरीर सैनिटाइज हो जाता है।
 

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दीपक कारीवाल - फोटो : अमर उजाला।
कारीवाल टेक्सटाइल के एमडी दीपक कारीवाल ने बताया कि जिस तरह से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है उससे कई तरह की आशंकाएं पैदा हो रही हैं। इस पर नियंत्रण के लिए कुछ जरूरी कदम उठाया जाना चाहिए। लॉकडाउन अंतिम विकल्प होना चाहिए। औद्योगिक जगत को मंदी से बाहर निकलने में तीन से चार साल लग जाएंगे।
 
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प्रवीण मोदी - फोटो : अमर उजाला।
मोदी केमिकल्स के निदेशक प्रवीण मोदी ने बताया कि कोरोना का बढ़ता संक्रमण खतरे का संकेत दे रहा है। पिछली बार जब लॉकडाउन लगा था, तब से लेकर अब तक कई उद्योग टूट चुके हैं। अगर दोबारा वैसी स्थिति बनती है तो कई उद्यमियों के लिए उठना मुश्किल हो जाएगा। पहले लॉकडाउन फिर कच्चे माल की कीमतों में उछाल की वजह से उद्योग पूरी क्षमता से संचालित नहीं हो रहे हैं। इस वजह से उत्पादों की कीमतें भी बढ़ गई हैं।
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