कोरोना वायरस की दूसरी लहर बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक साबित हो रही है। अब तक मिले 12-15 प्रतिशत बच्चे संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। इनकी उम्र एक साल से लेकर 16 माह के बीच है। हालांकि राहत की बात यह है कि 99 प्रतिशत बच्चे घर पर ही ठीक हो जा रहे हैं। साथ ही अब तक किसी भी बच्चे की जान संक्रमण की वजह से नहीं गई है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। वायरस का असर इस बार इन पर ज्यादा है।
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BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज की बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता के मुताबिक बीआरडी मेडिकल कॉलेज में अब तक केवल तीन बच्चे संक्रमण की चपेट में आने से भर्ती हैं। इनकी उम्र 14 से 16 के बीच मे है जबकि अब तक जो भी बच्चे संक्रमण का शिकार हुए हैं, वह घर पर ही रहकर ठीक हो जा रहे हैं। कई नवजात शिशु भी संक्रमण की चपेट में आए हैं, लेकिन उन्हें कोई दवा नहीं देनी पड़ी। 12 साल से अधिक उम्र वाले बच्चों के लिए कुछ दवाएं चलाई जाती हैं, वह भी बेहद सीमित मात्रा में। विभागाध्यक्ष बताती हैं कि इस बार बच्चे संक्रमण की चपेट में ज्यादा आ रहे हैं। इसकी वजह यह है कि लोग बच्चों पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। यही वजह है कि इस बार 12 से 15 प्रतिशत बच्चे अब तक संक्रमित हो चुके हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पीटीआई
पांच साल से कम उम्र के बच्चों पर दें ज्यादा ध्यान
डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों और शिशुओं पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। अगर आपके बच्चे को सर्दी-खांसी या बुखार है तो सबसे पहले उसकी केस हिस्ट्री पर ध्यान दीजिए। अगर उसे सर्दी-खांसी की शिकायत पहले भी होती रही है, अगर बच्चा कहीं बाहर नहीं गया है, किसी बाहरी व्यक्ति से मिला-जुला नहीं है, घर का कोई सदस्य कहीं बाहर नहीं गया है या कहीं यात्रा से वापस नहीं आया है, तो इसका मतलब है कि उसे कोरोना वायरस होने की आशंका कम है। वह भी संक्रमित हो सकता है। इसलिए बच्चों को बाहर न जाने दें और पिछली बार की तरह खुद लॉकडाउन समझकर बाहर न जाएं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
तीन संक्रमितों ने स्वस्थ बच्चे को दिया जन्म
कोरोना वायरस के कारण गर्भवती स्त्रियों के भ्रूण में पल रहे शिशुओं को कोई खतरा नहीं है। इसका खुलासा पिछले साल हो चुका है। पिछले साल 140 से अधिक संक्रमित महिलाओं ने बच्चे को जन्म दिया था। लेकिन इसमें एक भी बच्चा गर्भ में संक्रमित नहीं निकला था। इस साल 17 अप्रैल को तीन पॉजिटिव महिलाओं ने बच्चे को जन्म दिया। तीनों बच्चे संक्रमण का शिकार नहीं हुए हैं। डॉ. अनीता ने बताया कि तीनों बच्चों की हालत एकदम ठीक है। मासूम संक्रमित नहीं हैं।