सांकेतिक तस्वीर
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इस स्थिति में जा सकती है मरीज की जान
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि जिन मरीजों को पहले से कोई बीमारी है। जैसे शुगर, बीपी या फिर ह्रदय रोग से संबंधित, तो ऐसे मरीजों पर कोरोना का असर सबसे ज्यादा है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों का काम करना कम हो जाता है और धमनी रक्त में ऑक्सीजन का दबाव भी कम हो जाता है। इसकी वजह से शरीर के दूसरे हिस्से में जाने वाले रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और मरीजों की जान भी चली जाती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। आनन-फानन में परिजन अस्पताल ले जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन तब तक केस बिगड़ जाता है। बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सजीन नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर सहारा है। यह मशीनें बाजार में उपलब्ध भी हैं। आइसोलेट मरीज इसे जरूर रखें।