उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की एक महिला का ऑक्सीजन लेवल गिरता चला गया लेकिन किसी अस्पताल में जगह नहीं मिल सकी। परिजन एक-एक अस्पताल फोन करते रहे लेकिन हर जगह से निराशा हाथ लगी। महिला की एक निजी पैथालॉजी में कोरोना जांच हुई थी लेकिन रिपोर्ट नहीं मिली है। टेलीफोन से बताया गया था कि वह कोरोना पॉजिटिव है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के मुताबिक, शहर के सहारा इस्टेट परिसर के बहार-6 क्लस्टर की उर्मिला सिंह ने शनिवार को इलाज के अभाव में तड़पकर दम तोड़ दिया। उर्मिला का ऑक्सीजन लेवल 40 तक आ गया था। तबीयत बिगड़ने के बाद परिजनों ने अस्पताल में भर्ती कराने का प्रयास किया लेकिन सफलता नहीं मिल सकी।
कोविड कमांड सेंटर से भी अस्पतालों में जगह न होने का हवाला दिया गया। उर्मिला के परिवार के ज्यादातर लोगों की तबीयत खराब है। एक सप्ताह पहले उर्मिला को बुखार आया, फिर खांसी आने लगी। इसी बीच ऑक्सीजन लेवल कम होने लगा। शनिवार को तबीयत ज्यादा खराब हो गई। ऑक्सीजन लेवल एकदम से नीचे आ गया। इससे चिंतित परिजनों ने कई निजी चिकित्सालयों से संपर्क साधा। उर्मिला को भर्ती कराने की गुहार लगाई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। निजी अस्पताल ने ऑक्सीजन की कमी का हवाला देकर भर्ती से इंकार कर दिया।
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कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने के लिए हाथ-पांव मारे गए। देर शाम उर्मिला ने घर पर ही दम तोड़ दिया। आशंका है कि उर्मिला की मौत कोरोना संक्रमण से हुई है। इसके बावजूद शव का अंतिम संस्कार नहीं किया जा सका। शव वाहनों के चालकों को फोन किया गया तो अजीब सी शर्त सामने रखी मिली। चालकों ने कहा कि किट दे देंगे लेकिन घर वालों को ही शव किट में डालना पड़ेगा। घाट पर शव उतारने के लिए भी लोगों की जरूरत पड़ेगी। इसी का नतीजा रहा कि शव को अंतिम संस्कार के लिए नहीं ले जाया जा सका है। बेबस परिजनों ने रविवार को अंतिम संस्कार किया।
मां का अंतिम दर्शन नहीं कर सका बड़ा बेटा
उर्मिला के बड़े बेटे कोरोना संक्रमित हैं। उनका इलाज बीआरडी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इसी बीच मां का निधन हो गया। ऐसे में बेटा मां का अंतिम दर्शन नहीं कर सका।