एक तरफ कोरोना महामारी ने जहां रिश्तों में दूरियां ला दी हैं, वहीं पुराना गोरखपुर मोहल्ले में एक संक्रमित युवक ने खुद की परवाह किए बिना न केवल अपनी गर्भवती बहन बल्कि अस्पताल में भर्ती अन्य मरीजों की उखड़ती सांसें बचाई। संक्रमित होने के बावजूद खुद ऑक्सीजन की व्यवस्था की। करीब 50 किलोमीटर एंबुलेंस चलाते हुए सिलिंडर लेकर आया। सोमवार को जब दोनों भाई-बहन कोरोना से जंग जीतकर घर लौटे तो पूरे मोहल्ले के लोगों ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया।
फार्मा कंपनी में रिजनल मैनेजर पद पर काम करने वाले पंकज शुक्ला अपनी पत्नी, दो बेटियों और मां के साथ पुराना गोरखपुर मोहल्ले में रहते हैं। साल 1986 में पिता का देहांत होने के बाद कम उम्र में ही उनके कंधों पर परिवार की जिम्मेदारी आ गई। छत्तीसगढ़ के विलासपुर में रहने वाले बहनोई के भी अकेले होने से 15 अप्रैल को घर वालों ने गर्भवती बहन को देखरेख के लिए गोरखपुर बुला लिया था। कुछ दिन बाद बहन सर्दी-जुकाम हुआ तो उन्होंने डॉक्टर से सलाह ली।