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दोबारा संक्रमण होने पर ज्यादा दर्द दे रहा कोरोना, सामने आ चुके हैं कई केस

Sat, 28 Nov 2020 07:39 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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कोरोना वायरस। - फोटो : PTI
गोरखपुर शहर के एक डॉक्टर अगस्त माह में पॉजिटिव हुए थे। 10 से 15 दिनों के अंदर वह ठीक हो गए। इसके बाद वह अक्तूबर माह में फिर से संक्रमित हो गए। इस बीच उन्होंने एंटीबॉडी की जांच कराई तो पता चला कि उनके अंदर एंटीबॉडी बनी ही नहीं। ऐसे में उन्हें 20 से 25 दिन हो गए ठीक होने में। दूसरी बार संक्रमण के दौरान उन्हें कमजोरी और हाथों में झनझनाहट की शिकायत होने लगी।
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covid 19 test - फोटो : iStock
वहीं शहर के बिछिया कॉलोनी के रहने वाले एक कर्मचारी अक्तूबर माह में दूसरी बार संक्रमण का शिकार हो गए। इसके बाद उनकी समस्याएं और बढ़ गई। उन्हें कमजोरी, शरीर में दर्द की शिकायत के साथ-साथ खाना न अच्छा लगने की समस्या होने लगी। निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी सांस लेने में परेशानी जारी रहा। अंत में ठीक होने के बाद भी डॉक्टर से सलाह लेकर दवा शुरू किया।

 
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कोरोना वायरस। - फोटो : अमर उजाला।
ये दो केस तो महज बानगी है। ऐसे 20 से अधिक मामले शहर में अब तक आ चुके हैं, जो कोरोना वायरस की चपेट में आ चुके हैं। दूसरी बार संक्रमण उन्हें ज्यादा दर्द दे रहा है। हाथों में झनझनाहट के साथ कमजोरी, सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ रही है। ऐसे में विशेषज्ञ भी इन लक्षणों और वायरस के बदलाव से चिंतित है।

 

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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस को लेकर स्पष्ट रूप से कुछ कह पाना संभव नहीं है। क्योंकि अब तक कई तरह के मरीज सामने आ चुके हैं। सभी मरीजों पर वायरस का असर अलग-अलग तरीकों से रहा है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि ऐसे मरीजों के आंकड़े इकट्ठा किए जा रहे हैं। दो मरीजों पर बकायदा शोध करके उसके रिसर्च पेपर जनरल में प्रकाशित करने के लिए भी अमेरिका भेज दिए गए हैं। यह दोनों मामले इसी तरह से थे।
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कोरोना वायरस। - फोटो : PTI
वायरस को कमजोर आंकना गलत
डॉ. अमरेश सिंह ने कहा कि वायरस को कमजोर आंकना गलत होगा। जब तक पूरी तरह से वायरस पर शोध न हो जाए, कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। क्योंकि वायरस की संरचना में लगातार बदलाव हो रहे हैं। मरीजों की स्थिति बता रही है कि वायरस कब किस पर कौन से असर डाल दें, यह कोई भी बता नहीं सकता है। इतना जरूर है कि गंभीर मरीज वायरस से बच कर रहे। वरना उनके लिए यह ज्यादा घातक हो सकता है।

 
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTi
एंटीबॉडी के बारे में स्पष्ट बता पाना अभी कुछ संभव नहीं
विशेषज्ञों का मानना था कि संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों के शरीर में अगर एक बार एंटीबॉडी विकसित हो जाती है, तो उन्हें तीन माह तक डरने की जरूरत नहीं है। लेकिन वायरस ने इस मिथक को तोड़ दिया है। अब तक 20 से अधिक लोग दोबारा संक्रमण के शिकार हो चुके हैं। वह भी तीन माह के अंदर। ऐसे में एंटीबाडी के बारे में स्पष्ट रूप से विशेषज्ञ भी नहीं बता पा रहे हैं।
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