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Yogi Special: सीएम योगी को इस वजह से पड़ी थी डांट, नहीं भूले यह सीख, जानें क्यों लोग देखने लगे उनमें महंत दिग्विजयनाथ की छवि

Fri, 25 Mar 2022 05:25 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
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योगी आदित्यनाथ। (file) - फोटो : अमर उजाला।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को लगातार दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ग्रहण की। आज हम आपको उत्तर प्रदेश के सीएम व गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के बारे में एक रोचक कहानी बताने जा रहे हैं। इस कहानी के माध्यम से आप यह जान सकेंगे कि योगी आदित्यनाथ छोटी उम्र में ही अपने कार्यों से लोगों के बीच नायक बन गए थे। बता दें कि योगी ने सन्यासी बनने के बाद पहली बार गोरखनाथ मंदिर के बाहर निकलकर छात्रों का नेतृत्व किया और एसएसपी को फोन कर चेतावनी दे डाली। दूसरी ओर लोगों ने कहना शुरू कर दिया- 'महंत दिग्विजयनाथ ने दोबारा जन्म लिया है।'
 
अवेद्यनाथ के नक्शे कदम पर चलते हुए 22 साल की आयु में योगी आदित्यनाथ मंदिर के विशाल साम्राज्य का उत्तराधिकारी बन गए थे। इसके अपने नुकसान और खतरे थे। यह संयोग ही था कि उत्तराधिकारी घोषित होने के महज एक महीने बाद योगी आदित्यनाथ, प्रताप आश्रम के छात्रों के साथ पुलिस कार्रवाई के खिलाफ विरोध करने के लिए गोरखनाथ मंदिर परिसर से बाहर निकले थे, उस समय महंत अवेद्यनाथ संसद सत्र में शामिल होने के लिए दिल्ली में थे। वह जब भी बाहर रहते थे उस समय वह अपने शिष्यों पर विशेष नजर रखते थे। वह हमेशा योगी के साथ अपने विश्वासपात्रों को रखते थे। वे उनसे कहते थे कि 'छोटका बाबा तनिक उग्र हैं ध्यान रखिए'।
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सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

जब वाहन चलाना सीखते समय सीएम योगी को लगी चोट

योगी आदित्यनाथ की सीखने की शक्ति और सन्यासी जीवन में ढलने की क्षमता उल्लेखनीय थी, लेकिन वाहन सीखने की उनकी कोशिशों को जल्द ही झटका लगा। एक बार वह जोंगा वाहन चला रहे थे जो एक पेड़ से टकरा गई और योगी बुरी तरह से घायल हो गए। योगी को काफी दिन तक अस्पताल में रहना पड़ा था।
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योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

मंदिर में जनता दरबार की कमान योगी के संभालते ही दूर-दूर से पहुंचने लगे लोग 

इसी बीच गोरखनाथ मंदिर में रोजाना लगने वाले जनता दरबार को भी योगी ने अपने हाथ में ले लिया था। यह गोरखपुर के लोगों के साथ शुरू हुआ था, लेकिन जैसे ही चर्चाएं फैलने लगीं कि कैसे महंत ने जमीनी विवाद हल कर दिया या चुटकियों में वैवाहिक मामलों का निपटारा हो गया। लोग दूर-दूर से अपनी समस्याओं के अंबार लेकर वहां पहुंचने लगे। गोरखनाथ मंदिर में कोई भी अपने प्रार्थनापत्र के साथ पहुंच सकता था।

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अपने गुरु महंत अवेद्यनाथ के साथ सीएम योगी आदित्यनाथ। - फोटो : अमर उजाला।

इस बात पर महंत अवेद्यनाथ ने योगी को दी सीख

एक बार मंदिर में कई श्रद्धालुओं ने जूता-चप्पल चोरी होने की शिकायतें कीं। मठ के कर्मचारियों ने बताया कि इस चोरी के पीछे आसपास के मुस्लिम इलाकों के बच्चों का हाथ है। एक शाम योगी भंडारे का निरीक्षण कर रहे थे तो मुस्लिम लड़कों का एक समूह पंक्ति में बैठा था। उन्हें बताया गया कि ये भोजन करेंगे और दूसरे का चप्पल पहनकर चल देंगे। योगी ने देखा और बोले- 'यहां कैसे, चलो भागो यहां से', जैसे ही लड़के निकलने लगे, इतने में महंत अवेद्यनाथ ने योगी को अपने पास बुला लिया। महंत के पूछने पर योगी बोले-शरारती बच्चे यहां जूते-चप्पल चुराते हैं तो महंत बोले- फिर क्या हुआ? वे आपके मेहमान थे। भंडारे से किसी को भूखे नहीं लौटाना चाहिए। जाइए और उन्हें वापस लेकर आइए। योगी उन बच्चों को वापस भंडारे में बुलाकर प्यार से खाना खिलाया।
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गोरखनाथ मंदिर में पूजा करते सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला।

आज भी लगातार चलता रहता है भंडारा

जानकारी के लिए बता दें कि मंदिर में यह भंडारा आज भी लगातार चलता रहता है, यहां आया कोई भी शख्स भूखा नहीं जाता। यह भंडारा 24 घंटे चलता रहता है। सीएम योगी की यही दरियादिली देखकर गोरखपुर की जनता ने उन्हें विधानसभा चुनाव 2022 के लिए चुना है। सीएम योगी उत्तर प्रदेश के इतिहास में पहली बार ऐसे मुख्यमंत्री बनेंगे, जो दोबारा लगातार दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करेंगे।
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