योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले महायोगी गुरु गोरखनाथ की पूजा कर उन्हें 'रोट' का महाप्रसाद चढ़ाया। ये प्रसाद आटा और गुड़ को मिलाकर बनाया जाता है। इसके बाद अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पूजा करके आशीर्वाद लिया। इसके बाद देव और समाधियों की खास पूजा की। गोरखनाथ मंदिर में सुबह 6.30 बजे से विशेष आरती हुई, जिसमें विभिन्न राज्यों से आए नाथ योगी, संत, महात्मा और गृहस्थ शिष्य भी शामिल हुए। यहां उन्हें गोरक्षपीठाधीश्वर का आशीर्वाद भी मिला। उन्होंने ने कहा कि व्यक्ति को सकारात्मक दृष्टिकोण रखना चाहिए। आशावादी लोग हमेशा सबसे कठिन समय में भी समाधान खोजने का प्रबंधन करते हैं। दूसरी ओर, नकारात्मक लोगों की हर चीज पर पकड़ होती है।
गोरक्षपीठाधीश्वर व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जो नकारात्मक हैं, वह अच्छा नहीं सोच सकते हैं। अच्छा कर भी नहीं सकते। सकारात्मक व्यक्ति समाधान का रास्ता बनाता है, जबकि नकारात्मक व्यक्ति समाधान न होने के बहाने गिनाता है।
गोरक्षपीठाधीश्वर बुधवार को गोरखनाथ मंदिर के महंत दिग्विजयनाथ स्मृति सभागार में गुरु पूर्णिमा पर आयोजित समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जीवन में अवसर सबको मिलता है। उन अवसरों को सकारात्मकता के साथ अपने, समाज व देशहित के अनुकूल बनाकर आगे बढ़ने वाला ही सफल होता है। यदि किसी समस्या का समाधान करना है तो सकारात्मकता यानी अच्छी सोच होनी चाहिए। उपस्थित लोगों को गुरु की तरह जीवन का व्यावहारिक ज्ञान दिया और कहा कि सनातन संस्कृति में पर्व-त्योहारों की विशिष्ट परंपरा किसी न किसी विशिष्ट व युगांतकारी घटना से जुड़कर हमें प्रेरणा देती हैं।
श्री रामनवमी, वासंतिक नवरात्रि, शिवरात्रि, शारदीय नवरात्रि, विजयादशमी, दिवाली, मकर संक्रांति, श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, सावन में पावन ज्योतिर्लिंगों का जलाभिषेक, नाग पंचमी आदि पर्वों से जुड़ी युगांतकारी घटनाओं की जीव सृष्टि के संरक्षण व मानव कल्याण में बड़ी और स्मरणीय भूमिका रही है। ऐसा ही प्रमुख व पावन पर्व गुरु पूर्णिमा भी है।
महापुरुषों की जयंती पर भी हों विशिष्ट आयोजन
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को आजादी दिलाने वाले महापुरुषों की जयंती पर भी विशिष्ट आयोजन होने चाहिए। मुख्यमंत्री ने काकोरी, चौरीचौरा क्रांति, डोहरिया के आंदोलन के साथ ही रानी लक्ष्मीबाई, बंधु सिंह, मंगल पांडेय, धन सिंह गुर्जर, पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, चंद्रशेखर आजाद, ठाकुर रोशन सिंह, अशफाक उल्ला खां की चर्चा भी की। साथ ही कहा कि हमें आजादी का महत्व समझना चाहिए, क्योंकि पराधीन भारत में इतने बड़े पैमाने पर आयोजन करते तो ब्रिटिश सरकार अन्याय व अत्याचार पर उतारू हो जाती।