सुबह आठ बजे से ही चिड़ियाघर के मुख्य द्वार पर बच्चों की भीड़ जुटने लगी। मुख्य द्वार पर वंदे मातरम और राष्ट्र गान के बाद बच्चे हॉल में पहुंचे। छोटे-छोटे हाथों में रंग, पेंसिल और ब्रश लिए बच्चे अपनी शीट पर बैठते ही कल्पना की उड़ान भरने लगे। किसी ने कागज पर हिरन को जंगल में दौड़ते हुए दिखाया तो किसी ने पक्षियों से भरे नीले आसमान को उकेरा।
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बाल दिवस के अवसर पर अमर उजाला की तरफ से आयोजित प्रतियोगिता में शामिल हुए बच्चे
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाल दिवस के अवसर पर शुक्रवार को चिड़ियाघर में आयोजित बाल मेला बच्चों की रचनात्मकता, ऊर्जा और उत्साह का रंगीन उत्सव बन गया।
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प्रतियोगिता में बच्चों ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया
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अमर उजाला की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में शहर के विभिन्न स्कूलों से आए सैकड़ों बच्चों ने चित्रकला प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपनी कल्पनाशक्ति को कागज पर उकेर दिया। जंगल, पहाड़, नदियां, वन्यजीव, पर्यावरण संरक्षण आदि विषयों पर बने रंग-बिरंगे चित्रों ने कार्यक्रम को खास बना दिया।
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प्रतिभाग करने पहुंचे बच्चे
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सुबह आठ बजे से ही चिड़ियाघर के मुख्य द्वार पर बच्चों की भीड़ जुटने लगी। मुख्य द्वार पर वंदे मातरम और राष्ट्र गान के बाद बच्चे हॉल में पहुंचे।
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प्रतियोगिता में शामिल बच्चे
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छोटे-छोटे हाथों में रंग, पेंसिल और ब्रश लिए बच्चे अपनी शीट पर बैठते ही कल्पना की उड़ान भरने लगे। किसी ने कागज पर हिरन को जंगल में दौड़ते हुए दिखाया तो किसी ने पक्षियों से भरे नीले आसमान को उकेरा। कई बच्चों ने बाघ, हाथी और मोर जैसे जानवरों के साथ प्रकृति संरक्षण का संदेश भी दिया।
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मस्ती करते स्कूली बच्चे
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बच्चों के लिए विशेष रूप से थीम तय की गई थी- प्रकृति और वन्यजीव। इससे बच्चों की सोच का दायरा और भी विस्तृत हुआ। चित्रकला प्रतियोगिता का निरीक्षण करने पहुंचे विशेषज्ञों ने बच्चों की रचनात्मकता और रंगों के चयन की सराहना की।
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प्रतियोगिता में बच्चों की पेटिंग देखते वीसी और निदेशक जू
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मुख्य अतिथि दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. पूनम टंडन, विशिष्ट अतिथि चिड़ियाघर के निदेशक डॉ. बीसी ब्रह्मा और चिड़ियाघर के उप निदेशक एवं मुख्य वन्यजीव चिकित्सक डॉ. योगेश प्रताप सिंह ने बच्चों के उत्साह की प्रशंसा की।
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पेंटिंग करती छात्राएं
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करीब दो हजार बच्चों ने किया प्रतिभाग
प्रतियोगिता में कक्षा छह से 12वीं तक के बच्चों ने प्रतिभाग किया। छोटे बच्चों ने क्रेयॉन और स्केचपेन से सरल लेकिन बेहद आकर्षक चित्र बनाए, जबकि बड़े बच्चों ने वॉटरकलर और पोस्टर कलर का उपयोग कर बारीक कलात्मक प्रस्तुतियां दीं।
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प्रतिभागी बच्चे
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कुछ बच्चों ने चिड़ियाघर में मौजूद जानवरों को देखकर ही अपनी चित्रकारी की शुरुआत की। प्रतियोगिता में करीब 30 विद्यालयों के दो हजार बच्चों ने प्रतिभाग किया। निर्णायक मंडल में सीआरडीएपीजी कॉलेज की डॉ. रेखा रानी शर्मा, डीडीयू के सहायक आचार्य डॉ. गौरीशंकर चौहान और डॉ. प्रदीप राजौरिया शामिल रहे। प्रतियोगिता का परिणाम जल्द ही जारी किया जाएगा। कई बच्चों ने कहा कि उन्हें पहली बार इतनी बड़ी प्रतियोगिता में हिस्सा लेने का मौका मिला और यह दिन उनके लिए यादगार रहेगा।
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पेटिंग करती छात्राएं
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बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ाती है प्रतियोगिता : कुलपति
कुलपति प्रो. पूनम टंडन ने कहा कि बच्चों की कल्पनाशक्ति अत्यंत व्यापक होती है। इस तरह की प्रतियोगिताएं न केवल उनकी प्रतिभा को निखारती हैं, बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी बढ़ाती हैं। जब बच्चे प्रकृति और वन्यजीवों के विषय पर सोचते हैं तो उनमें पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित होती है।
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प्रतियोगिता में शामिल बच्चे
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उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन नियमित रूप से होने चाहिए ताकि बच्चों को अपने कौशल को अभिव्यक्त करने का मंच मिल सके। उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से भी आग्रह किया कि वे बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें।
बाल मेला में पहुंची छात्राएं
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चिड़ियाघर के निदेशक डॉ. बीसी ब्रह्मा ने कहा कि बच्चों की रचनात्मकता देखकर मन प्रसन्न हो गया। आज की पीढ़ी केवल किताबों तक सीमित नहीं है, वह प्रकृति, पर्यावरण और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील सोच रखती है। ऐसे कार्यक्रम बच्चों को सीखने के साथ-साथ जिम्मेदारी का भाव भी देते हैं।