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बीआरडी मेडिकल कॉलेज: आरटीपीसीआर से अब तक 10 लाख हुई जांच, संक्रमित होने के बाद भी कर्मचारियों ने नहीं हारी हिम्मत

Fri, 23 Jul 2021 01:05 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।

सार

जांच के दौरान संक्रमित हो गए थे 55 में से 43 कर्मचारी, नहीं हारी हिम्मत।
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कोरोना जांच करते कर्मचारी। - फोटो : अमर उजाला।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभाग में बुधवार को कोरोना के नमूनों की रीयल टाइम पालीमरेज चेन रियेक्शन (आरटीपीसीआर) जांच का आंकड़ा 10 लाख के पार हो गया। हालांकि इस बीच विभागाध्यक्ष सहित 43 कर्मचारी पाजिटिव भी हुए लेकिन सभी ने हिम्मत नहीं हारी।

पिछले वर्ष 24 अप्रैल को एक आरटीपीसीआर मशीन से जांच शुरू हुई। विभाग के पास सिर्फ आठ कर्मचारी थे। 24 घंटे में अधिकतम 500 नमूनों की जांच हो पाती थी। इसके बाद दो और मशीनें आ गई हैं। लैब टेक्नीशियनों व कर्मचारियों की संख्या बढ़ाकर 55 कर दी गई। जांच क्षमता दो हजार तक बढ़ गई है। दूसरी लहर जब अप्रैल में शुरू हुई तो इन्हीं कर्मचारियों व मशीनों से 24 घंटे में पांच हजार नमूनों की जांच की जाने लगी। अब पांच मशीनें और मिल चुकी हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह के मुताबिक 24 घंटे में सामान्यतया आठ हजार नमूनों की जांच की क्षमता हो गई है। विषम परिस्थितियों में 10 हजार से अधिक जांच की जा सकेगी। विभागाध्यक्ष सहित 43 कर्मचारी नमूनों की जांच करते पॉजिटिव हुए लेकिन कोरोना को मात देने के बाद पुन: अपनी जिम्मेदारी संभाल ली।
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डॉ. अमरेश कुमार सिंह। - फोटो : अमर उजाला।
इनका रहा महत्वूपर्ण योगदान
जांच में डॉ. अमरेश कुमार सिंह, प्रवक्ता जयेश पांडेय, माइक्रोबायोलाजिस्ट विवेक कुमार गौड़, अंकुर चौधरी, सिद्धार्थ राय, लैब टेक्नीशियन उमेश चौधरी, अखिलानंद राय, अंबरीश त्रिपाठी, अभिषेक राम त्रिपाठी, विवेक गुप्ता, श्री देवेंद्र कुमार, बृजपाल वर्मा, दुर्गा प्रसाद, जितेंद्र गिरी, श्री सुरेंद्र, चण्डी प्रसाद मिश्रा, बृजेश रंजन, कृतिका, जग मोहन प्रसाद, चंद्रभान व राम लखन का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।
पहली लहर में हुई थी पांच लाख जांच
आंकड़ों के मुताबिक पहली लहर के दौरान पांच लाख नमूनों की जांच हुई थी। जितनी जांच पहली लहर के एक साल में हुई थी। उतनी ही जांच दूसरी लहर में मात्र चार महीने में ही पूरी हो गई।

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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला।
अब लैब में ऑटोमेटिक मशीनें लगी हैं। इसकी वजह से जो जांच पहले 12 घंटे में होती थी, अब वह छह-सात घंटे में हो जाती है। दूसरी लहर में एक दिन 10700 जांच की गई, यह अब तक का रिकार्ड है।
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प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज के डॉ गणेश कुमार। - फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि माइक्रोबायोलॉजी विभाग ने अपनी क्षमता से ज्यादा काम किया। इस कार्य में शासन व जिला प्रशासन का भरपूर सहयोग मिला। पर्याप्त मशीनें और कर्मचारी मिले। अधिक जांच की वजह से दूसरी लहर में कोरोना पर जल्दी नियत्रंण प्राप्त किया गया।
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