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Yagya Bhasin Interview: पता ही नहीं था शूटिंग के बारे में, आवाज आई ‘एक्शन’ और बूम माइक पर बोल दिए सारे संवाद

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यज्ञ भसीन - फोटो : अमर उजाला
देव भूमि उत्तराखंड के शहर रुड़की के कस्तूरी नर्सिंग होम में जन्मे अभिनेता यज्ञ भसीन के माता-पिता इन दिनों जितने खुश हैं, उतना ही कष्ट उन्होंने अपने बेटे को यहां तक लाने में झेला है। लगातार संघर्ष, हिम्मत न हारने और रोज एक नया हौसला लेकर पिता के साथ घर से काम की तलाश में निकलने वाले यज्ञ अब तक तमाम धारावाहिकों और फिल्मों में काम कर चुके हैं। बड़े परदे पर रिलीज हुई फिल्म ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ में वह पहली बार शीर्षक भूमिका निभा रहे हैं। कम लोग ही जानते होंगे कि यज्ञ का इस फिल्म के लिए चुनाव देश भर के करीब 10 हजार बच्चों के ऑडिशन के बाद हुआ है। यज्ञ भसीन के वीडियो इंटरव्यू के खास अंश..
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माता-पिता के साथ यज्ञ भसीन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
यज्ञ बताएं जब आपका 10 हजार बच्चों के ऑडीशन के बाद छोटा भीम के किरदार के लिए चयन हुआ तो कितना खुश थे आप?
नींद तो नहीं आ रही थी खुशी से। बहुत ज्यादा एक्साइमेंट थी, खुशी थी। मेरे पैरेंट्स तो पागल हो गए थे खुशी से। मैं हमेशा से छोटा भीम देखता आ रहा हूं शुरू से तो ये एक बहुत प्राउड मोमेंट था। मेरी पूरी फैमिली के लिए। मेरे लिए। और, मेरे लिए खुशी का मौका ये भी था कि मैं छोटा भीम देखते देखते खुद ही छोटा भीम बन गया।
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यज्ञ भसीन - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
आपके पापा दीपक भसीन ने मुझे बताया था कि आपको फिल्मों को लेकर बचपन से ही क्रेज रहा है और आप पापा को बोलते रहते थे कि मुझे हॉलीवुड जाना है। छोटा भीम की सबसे अच्छी चीज क्या लगती है आपको?
मुझे सबसे अच्छी बात जो छोटा भीम की लगती है वो ये कि वह बहुत केयरिंग है। वह सबकी हेल्प करता है और वह दिल का बहुत ज्यादा साफ है। कभी भी किसी के लिए कुछ बुरा नहीं सोचता है। वही मुझे सबसे अच्छी चीज लगती है इस किरदार के बारे में।
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'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
यज्ञ, आपके माता-पिता जब कुछ पीछे छोड़कर आपको अभिनेता बनाने के लिए आपको उत्तराखंड से लेकर मुंबई आए तो पहली बार जब कैमरे के सामने आए तो उस दिन का अनुभव क्या रहा?
मैं बहुत ज्यादा एकदम से नर्वस हो गया था। धारावाहिक ‘मेरे साईं’ की शूटिंग पर मैं पहली बार किसी सेट पर गया था उसमें मेरा एक छोटा सा कैमियो था गांव के लड़के का किरदार था। उसमें वह शूट के समय बूम माइक लगाते हैं (फ्रेम के बाहर रहने वाला एक शक्तिशाली माइक जो कलाकारों की आवाज़ें रिकॉर्ड करता है और जिसे एक लंबी लग्गी से कलाकार के ऊपर लटकाते हैं) तो मुझे पता नहीं था कि ये माइक को देखना ही नहीं होता है..लेकिन जब एक्शन की आवाज पड़ी मेरे कानों में तो मैं कैमरे की तरफ ध्यान हटाकर ऊपर बूम की तरफ देखकर डॉयलॉग बोलने लगा।
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'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

फिर क्या हुआ?
फिर मेरे निर्देशक ने मुझे समझाया कि अरे ऐसा नहीं करते हैं, बूम माइक को भूल जाओ तुम। ऐसी बहुत सारी दिक्कतें आई थीं। कभी कभी मैं कैमरे को ही देखकर बोल देता था सीधा।

‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ टीम का पूरा वीडियो इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं:

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